संवाददाता@अनिल अग्रहरी……

डाला की मलिन बस्ती में भूमि विवाद एक बार फिर गहरा गया है। शनिवार को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ एवं पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने विवादित स्थल का निरीक्षण कर मौके की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में बस्तीवासी हनुमान मंदिर परिसर में एकत्र हुए और अपनी समस्याओं से अवगत कराया। लोगों ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी उन्हें भूमि खाली करने के लिए दबाव बना रही है, जबकि उनके परिवार तीन पीढ़ियों से यहां निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, अतः अंतिम निर्णय तक किसी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने भूमि अधिकार, पुनर्वास तथा प्रभावित परिवारों के भविष्य से जुड़े मुद्दे उठाए। स्थानीय प्रतिनिधि उमेश प्रसाद मेहता ने कहा कि यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के आशियाने और उनके अधिकारों का है। उनके अनुसार पहले इस भूमि पर जेपी एसोसिएट्स ने दावा किया था और अब अल्ट्राटेक कंपनी अपना दावा प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने बताया कि मामले में पुनर्स्थापन याचिकाएं भी न्यायालय में लंबित हैं तथा कंपनी के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद बस्ती को हटाने का प्रयास किया जा रहा है।

भाजपा जिला उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह ने भी प्रभावित परिवारों के समुचित पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के बिना किसी को हटाना उचित नहीं होगा। स्थानीय निवासी घनश्याम प्रसाद कुशवाहा के अनुसार विवाद 338 परिवारों से जुड़ा है। बस्तीवासियों का दावा है कि क्षेत्र में लगभग 500 मकान और करीब तीन हजार निवासी हैं तथा नगर पंचायत यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य करा चुकी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षण के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर उच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।





