नई दिल्ली. विश्व फुटबॉल में जब भी किसी खिलाड़ी के आक्रामक खेल और रिकॉर्ड्स की बात होती है, तो जेहन में एर्लिंग हालैंड का नाम कौंध जाता है. डिफेंडर्स के लिए खौफ का दूसरा नाम बन चुका यह खिलाड़ी मैदान पर किसी ‘रोबोट’ या ‘गोल मशीन’ की तरह दिखता है. लेकिन, इस फौलादी बदन और कड़क मिजाज स्ट्राइकर के भीतर एक बेहद संवेदनशील, भावुक और जड़ों से जुड़ा हुआ दिल धड़कता है. फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में जब नॉर्वे ने पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को मात दी, तो वह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि एक बेटे द्वारा अपने पिता के अधूरे सपनों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि थी.
एर्लिंग हालैंड (Erling Haalland) के पिता अल्फी हालंद नॉर्वे के लिए फुटबॉल खेल चुके हैं.वह 1994 के विश्व कप दल का हिस्सा थे. बचपन में जब नन्हे एर्लिंग अपने पिता की गोद में बैठकर विश्व कप की कहानियां सुना करते थे, तभी उनके मासूम दिल में एक कसम ने जन्म ले लिया था. जो पिता नहीं कर सके, वह मुझे देश के लिए करना है. हालैंड फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सात गोल दाग चुके हैं. वह इस विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल दागने वाले खिलाड़ियों में तीसरे नंबर पर हैं. एम्बाप्पे और मेसी 8-8 गोल के साथ पहले और दूसरे नंबर पर हैं.
मेटलाइफ स्टेडियम में ब्राजील के खिलाफ 79वें और 90वें मिनट में दागे गए दो जादुई गोल सिर्फ नॉर्वे को पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचाने वाले शॉट नहीं थे, वे एक बेटे के अपने पिता से किए वादे की गूंज थे. मैदान पर शेर की तरह दहाड़ लगाने वाले हालैंड असल जिंदगी में कितने भावुक हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्होंने पहली बार चैंपियंस लीग जीती थी, तो उनकी आंखों से बहे आंसुओं ने दुनिया को बता दिया था कि सफलता के इस शिखर के पीछे कितना त्याग छिपा है. इस विश्व कप में वह अपनी जर्सी पर सिर्फ हालैंड नहीं, बल्कि ‘ब्राउट हालैंड’ लिखकर खेल रहे हैं, जो उनकी एथलीट मां ग्री मारिटा ब्रॉट के प्रति उनका अगाध सम्मान और प्रेम दर्शाता है.
छोटे कस्बे से इतिहास के पन्नों तक
आज भले ही एर्लिंग हालैंड की हर दिन की डाइट 6,000 कैलोरी की हो, वे एक खास फिल्टर्ड पानी पीते हों, या सोने के लिए एंटी-ब्लू लाइट चश्मा और माउथ टेप जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हों, लेकिन उनका दिल आज भी नॉर्वे के उसी छोटे से कस्बे ‘ब्रायने’ में धड़कता है। ब्रायने में फुटबॉल कोई कारोबार नहीं, बल्कि एक रूहानी जुनून था.
‘मैच बॉल्स’को बिस्तर पर साथ लेकर सोते हैं
बचपन में हालैंड न तो बहुत लंबे थे और न ही शारीरिक रूप से मजबूत. लेकिन उनके भीतर कुछ कर गुजरने की तड़प थी. महज 5 साल की उम्र में उन्होंने ‘स्टैंडिंग लॉग जंप’ में 5 फीट 4 इंच की ऐसी छलांग लगाई, जो आज भी एक विश्व रिकॉर्ड है. वह छलांग सिर्फ रेत पर नहीं, बल्कि उनके सुनहरे भविष्य की नींव थी. ऑस्ट्रिया के क्लब रेड बुल साल्जबर्ग के लिए खेलते हुए जब उन्होंने लगातार पांच मैचों में हैट्रिक लगाई, तो जीती हुई पांचों ‘मैच बॉल्स’ को वे आज भी अपने बिस्तर पर साथ सुलाते हैं. यह दिखाता है कि इतिहास रचने वाला यह खिलाड़ी अपनी हर छोटी से छोटी याद को कितनी शिद्दत से संजोकर रखता है.
एक संवेदनशील और अतरंगी नायक
एर्लिंग हालैंड का व्यक्तित्व विरोधाभासों से भरा है, जो उन्हें और अधिक मानवीय बनाता है. जहां एक तरफ वे मैदान पर खूंखार दिखते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे मानसिक शांति के लिए ध्यान (मेडिटेशन) और माइंडफुलनेस का सहारा लेते हैं. उनका यह दर्शन कि, ‘जिंदगी के हर सेकंड का आनंद लो, क्योंकि यह हमारी सोच से कहीं ज्यादा छोटी है,’ उनकी गहरी सोच को उजागर करता है.
बटर चिकन और गार्लिक नान का शौकीन हैं हालैंड
हालैंड की सादगी और अतरंगी मिजाज भी कमाल का है. करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट्स साइन करने वाला यह खिलाड़ी आज भी अपनी मां के हाथों के स्वाद और ब्राइन के कबाब के अलावा बटर चिकन और गार्लिक नान का शौकीन है. दोस्तों के साथ मिलकर रैप सॉन्ग बनाना हो या वीडियो गेम ‘माइनक्राफ्ट’ खेलना, उनके भीतर का वो 16 साल का अल्हड़ लड़का आज भी जिंदा है. यहां तक कि जब उन्होंने 1.3 लाख अमेरिकी डॉलर में 430 साल पुरानी दुर्लभ ऐतिहासिक किताब ‘हेइम्सक्रिंगला’ खरीदी, तो उसे अपने घर की तिजोरी में बंद करने के बजाय अपनी स्थानीय लाइब्रेरी को दान कर दिया, ताकि उनके कस्बे के बच्चे अपने इतिहास को जान सकें.






