• Home
  • Privacy Policy
Sonebhadra Live
No Result
View All Result
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

जौनपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर सिलविंदर सिंह मृत्यु के बाद करेंगे ये काम, बेटा विदेश में करता है काम, नहीं आता कोई मिलने

Admin by Admin
September 18, 2026
in उत्तर प्रदेश
0
जौनपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर सिलविंदर सिंह मृत्यु के बाद करेंगे ये काम, बेटा विदेश में करता है काम, नहीं आता कोई मिलने


Last Updated:September 18, 2026, 08:08 IST

जौनपुर के सिलविन्दर सिंह ने मृत्यु के बाद देहदान का फैसला किया है. सिलविन्दर सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और लंबे समय तक मुंबई में रहे. उन्होंने वर्ष 1978 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की. बेटा आज विदेश में नौकरी कर रहा है और उसकी पत्नी भी कामकाजी है, लेकिन पिछले कई वर्षों से सिलविन्दर सिंह से मिलने नहीं आया. परिवार की दूरी के बावजूद सिलविन्दर सिंह के मन में कोई शिकायत नहीं है.

जौनपुर: उम्र के उस पड़ाव पर जब इंसान को अपनों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, जौनपुर के वृद्धाश्रम में रह रहे सिलविन्दर सिंह ने ऐसा फैसला लिया है. जो समाज के लिए मिसाल बन गया है. परिवार से दूर जिंदगी गुजार रहे सिलविन्दर सिंह ने तय किया है कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मेडिकल शिक्षा और जरूरतमंदों के काम आए. उनके इस फैसले से आश्रम में रह रहे कई अन्य बुजुर्ग भी देहदान और अंगदान के लिए प्रेरित हुए हैं.

मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद चले गए मुंबई

वृद्धाश्रम के संचालक रवि चौबे के मुताबिक सिलविन्दर सिंह मूल रूप से पंजाब के रहने वाले हैं और लंबे समय तक मुंबई में रहे. उन्होंने वर्ष 1978 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी. अपने बेटे के बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की. बेटा आज विदेश में नौकरी कर रहा है और उसकी पत्नी भी कामकाजी है, लेकिन पिछले कई वर्षों से सिलविन्दर सिंह से मिलने नहीं आया. परिवार की दूरी के बावजूद सिलविन्दर सिंह के मन में कोई शिकायत नहीं है. उनका कहना है कि जिंदगी में भले ही वे ज्यादा लोगों के काम न आ सके हों, लेकिन मौत के बाद उनका शरीर किसी के लिए उपयोगी हो, इससे बड़ी संतुष्टि क्या होगी.

मेडिकल छात्रों के काम आए शरीर

उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से इस संबंध में बातचीत हुई है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वह देहदान के लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई करेंगे. अपनी बेटी की मदद से वह संबंधित दस्तावेज पूरे कराने की बात भी कह रहे हैं. सिलविन्दर सिंह की सोच का असर आश्रम के दूसरे बुजुर्गों पर भी पड़ा है. रवि चौबे के अनुसार, उनकी पहल से कई अन्य बुजुर्गों ने भी देहदान और अंगदान को लेकर अपनी सहमति जताई है. उनका मानना है कि मृत्यु के बाद उनका शरीर मेडिकल छात्रों की पढ़ाई में काम आए और भविष्य में बेहतर डॉक्टर तैयार करने में योगदान दे, तो यह जीवन का एक सार्थक अंत होगा. अपनों से दूर हुए इन बुजुर्गों का यह फैसला बताता है कि रिश्तों की कमी के बावजूद इंसानियत के लिए कुछ करने की इच्छा कभी खत्म नहीं होती.

About the Author

authorimg

Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

और पढ़ें

Location :

Jaunpur,Uttar Pradesh

First Published :

September 18, 2026, 08:08 IST



Source link

Previous Post

Mirzapur The Movie Box Office Day 14: ‘मिर्जापुर द मूवी’ ने लूट लिया बॉक्स ऑफिस, 14वें दिन फिल्म ने रचा इतिहास, भारत में 200 करोड़ का आंकड़ा पार

Next Post

‘हनुमान अंश’ के बाद ‘राम बोला’, फिल्म से होने वाली कमाई को लेकर प्रोड्यूसर का बड़ा ऐलान, बोले- ये मेरा वादा है

Next Post
‘हनुमान अंश’ के बाद ‘राम बोला’, फिल्म से होने वाली कमाई को लेकर प्रोड्यूसर का बड़ा ऐलान, बोले- ये मेरा वादा है

'हनुमान अंश' के बाद 'राम बोला', फिल्म से होने वाली कमाई को लेकर प्रोड्यूसर का बड़ा ऐलान, बोले- ये मेरा वादा है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Home
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.

No Result
View All Result
  • Home
  • Privacy Policy

© 2026 JNews - Premium WordPress news & magazine theme by Jegtheme.