संवाददाता@विशाल टंडन…
— ड्रैगन फ्रूट की खेती से हो रही अब लाखों की आय; दूर-दूर से किसान सीखने पहुंच रहे मानपुर

विकासखंड के ग्राम मानपुर के छोटे किसान बाबूलाल मौर्य ने अपनी मेहनत, नई सोच और उद्यान विभाग के मार्गदर्शन से यह साबित कर दिया कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही लाभ लें तो खेती भी लाभ का बड़ा माध्यम बन सकती है। कभी परंपरागत खेती से केवल परिवार का भरण-पोषण करने वाले बाबूलाल आज ड्रैगन फ्रूट की खेती से लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं और अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
करीब पांच वर्ष पहले तक बाबूलाल मौर्य पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन इससे उनकी आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी मिली। उन्होंने जिला उद्यान विभाग से संपर्क किया और शुरुआती प्रयोग के तौर पर मात्र 10 पोल पर ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए। साथ ही इस नई फसल की तकनीक, रखरखाव और बाजार की जानकारी भी जुटाते रहे।कुछ समय बाद उनकी मुलाकात जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम से हुई।
उन्होंने बाबूलाल को ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती, सरकारी योजनाओं, अनुदान और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी तथा इस खेती को बड़े स्तर पर अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभाग के सहयोग और मार्गदर्शन से बाबूलाल ने अपनी खेती का विस्तार करते हुए 100 पोल पर ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगा दिए। मेहनत और सही तकनीक का परिणाम यह रहा कि पहले ही डेढ़ वर्ष में उन्हें लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

इसके बाद भी उनकी आय 1 लाख रु सालाना पहुंच गईं। वर्तमान में उनकी तीसरी फसल तैयार हो रही है, जो अक्टूबर,नवंबर तक बाजार में आने की उम्मीद है। अच्छी गुणवत्ता और बेहतर उत्पादन के कारण उनकी फसल की बाजार में अच्छी मांग बनी हुई है। आज बाबूलाल मौर्य की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। ड्रैगन फ्रूट की खेती से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनका परिवार पहले की तुलना में कहीं अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन गया है।

उनकी सफलता की चर्चा अब केवल सोनभद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य जिलों से भी किसान उनके खेत पर पहुंचकर ड्रैगन फ्रूट की खेती की तकनीक और अनुभव सीख रहे हैं।बाबूलाल मौर्य का कहना है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाने के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लें और खेती को व्यवसाय की तरह करें तो कम भूमि पर भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार की किसान हितैषी योजनाओं, जिला उद्यान विभाग के सहयोग तथा जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम के मार्गदर्शन को दिया। उनके अनुसार आधुनिक खेती अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।





