संवाददाता@विशाल टंडन…..
— स्टेनलेस स्टील या सुरक्षित फूड-ग्रेड सामग्री से बने टिफिन का ही उपयोग करने क़ी सलाह, स्कूलों से भी जागरूकता अभियान चलाने की अपील

गर्मी की छुट्टियां समाप्त होते ही स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल फिर से शुरू हो गई है। नए बैग, नई किताबें, यूनिफॉर्म और टिफिन बॉक्स के साथ बच्चे विद्यालय पहुंच रहे हैं। अभिभावक भी बच्चों को धूप और गर्मी से बचाने के लिए पानी की बोतल, छाता और टोपी जैसी जरूरी व्यवस्थाएं कर रहे हैं, लेकिन बच्चों के टिफिन बॉक्स के चयन में बरती गई छोटी-सी लापरवाही उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है।

जनपद सोनभद्र के 100 शैय्या एमसीएच विंग के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीश श्रीवास्तव ने बताया कि अधिकांश बच्चे सुबह तैयार किया गया भोजन दोपहर के भोजन अवकाश तक करीब दो से तीन घंटे बाद खाते हैं। यदि यह भोजन प्लास्टिक के टिफिन में रखा जाता है, विशेषकर गर्म अवस्था में, तो प्लास्टिक से निकलने वाले कुछ हानिकारक रसायन भोजन में मिल सकते हैं। लंबे समय तक ऐसे भोजन का सेवन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा, “अभिभावकों को बच्चों के लिए स्टेनलेस स्टील या सुरक्षित फूड-ग्रेड सामग्री से बने टिफिन का ही उपयोग करना चाहिए। आकर्षक डिजाइन या कम कीमत के बजाय बच्चों की सेहत को प्राथमिकता देना अधिक जरूरी है।”उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से भी अपील करते हुए कहा, “स्कूल समय-समय पर अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।

यदि स्कूल स्तर पर सही जानकारी दी जाएगी तो बड़ी संख्या में परिवार प्लास्टिक के टिफिन के बजाय सुरक्षित विकल्प अपनाएंगे।” बाल रोग विशेषज्ञ ने अभिभावकों से आग्रह किया कि गर्म भोजन सीधे प्लास्टिक के टिफिन में न रखें, बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन दें तथा टिफिन और पानी की बोतल की नियमित सफाई करें। उन्होंने कहा, “बच्चों का स्वास्थ्य किसी भी सुविधा या फैशन से अधिक महत्वपूर्ण है। थोड़ी-सी सावधानी भविष्य में होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।”

नोट- यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसमें प्लास्टिक से जुड़े जोखिमों का उल्लेख जानकारी के आधार पर है। वैज्ञानिक रूप से जोखिम प्लास्टिक के प्रकार, गुणवत्ता और उपयोग के तरीके पर निर्भर करते हैं।





