संवाददाता@कृपा शंकर पांडेय….

चोपन थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी स्थित एक क्रेशर प्लांट में सोमवार को करंट लगने से एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में 40 वर्षीय प्रमोद पुत्र नवरत्न निवासी कोन की जान चली गई। प्रमोद की मौत के बाद उसके पांच बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, जिससे पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
जानकारी के अनुसार प्रमोद बिल्ली मारकुंडी के कोठा टोला स्थित आरएससी सेकेंड क्रेशर प्लांट में मजदूरी कर रहा था। कार्य के दौरान वह अचानक बिजली की चपेट में आ गया। प्लांट में मौजूद अन्य मजदूरों ने उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चोपन पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही चोपन पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. फैज़ ने बताया कि प्रमोद को अस्पताल लाया गया था, लेकिन जांच में स्पष्ट हुआ कि उसकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस को मेमो भेज दिया गया है।

परिजनों का कहना है कि उन्हें प्लांट प्रबंधन की ओर से केवल यह सूचना दी गई थी कि प्रमोद घायल हो गया है। मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली। परिजनों ने करंट लगने से मौत की आशंका जताई है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
मृतक प्रमोद मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके पांच बच्चे हैं, जिनमें चार अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह प्रमोद पर ही थी। उसकी असमय मौत से बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भविष्य पर संकट गहरा गया है।
घटना के बाद क्रेशर प्लांटों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बरसात के मौसम में बिजली से संचालित उपकरणों के बीच कार्य करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं, इसे लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। मजदूरों ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने और नियमित निरीक्षण की मांग की है।
साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस फर्म में प्रमोद कार्यरत था, क्या वहां कार्यरत मजदूरों का ग्रुप इंश्योरेंस कराया गया था या नहीं। यदि सुरक्षा और बीमा जैसी व्यवस्थाओं का प्रभावी पालन नहीं हुआ, तो ऐसे हादसों में मजदूरों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।





