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Barmer News : बाड़मेर जिले के सीमावर्ती गांव गंगासरा के रहने वाले और भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे प्रवीण सिंह धांधू ने अपनी मेहनत और अनुशासन के दम पर देशभर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. पुणे में आयोजित अंडर-23 रोइंग नेशनल चैंपियनशिप में सर्विसेज टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया. रेगिस्तान की धरती से निकलकर पानी के खेल रोइंग में गोल्ड जीतना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. इस प्रदर्शन के आधार पर प्रवीण सिंह का चयन दिसंबर में होने वाली एशियन रोइंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में किया गया है, जहां वे देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. उनकी सफलता से परिवार, गांव और पूरे बाड़मेर जिले में खुशी का माहौल है. सीमित संसाधनों के बावजूद मिली यह सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और अब सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन पर टिकी हैं.

जिस बाड़मेर में पानी की हर बूंद की कीमत सोने सी समझी जाती है उसी धरती के बेटे प्रवीण सिंह ने पानी के खेल रोइंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है. छोटे से गांव गंगासरा के इस जवान ने लहरों पर ऐसी नाव दौड़ाई कि अब उसका चयन एशियन रोइंग चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम में हो गया है.

बाड़मेर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के गंगासरा गांव से निकलकर भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे प्रवीण सिंह धांधू ने खेल जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पुणे में आयोजित अंडर-23 रोइंग नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने सर्विसेज टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए शानदार प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया है.

प्रवीण सिंह पुत्र कालूसिंह धांधू ने सीएमई नोड,पुणे में आयोजित अण्डर-23 रोइंग नेशनल चेम्पियनशिप में सर्विसेज टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल हासिल किया है.प्रतियोगिता में देशभर के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया लेकिन प्रवीण सिंह ने अपने अनुशासन और तकनीक के दम पर गोल्ड मेडल जीता है.
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रेगिस्तान की कठिन परिस्थितियों में पले बढ़े प्रवीण सिंह की यह सफलता युवाओ के लिए प्रेरणादायक है. सेना में सेवाएं देने के साथ-साथ खेलों में भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. प्रवीण सिंह की इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि बाड़मेर जिले का नाम रोशन किया है.

स्वर्ण पदक जीतने के बाद प्रवीण सिंह का चयन दिसम्बर में आयोजित होने वाली एशियन रोइंग चेम्पियनशिप के लिए हुआ है जहां वे भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. अब सबकी निगाहें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने पर है.

प्रवीण ने साबित कर दिया कि हौसले बुलंद हों तो मंजिल तक पहुंचने के लिए न संसाधनों की कमी मायने रखती है और न ही परिस्थितियों की कठिनाई. अब पूरे जिले की निगाहें दिसम्बर में आयोजित होने वाली एशियन रोइंग चैंपियनशिप पर टिकी हुई हैं जहां यह रेगिस्तान का लाल देश के लिए एक और इतिहास रचने की तैयारी में है.






