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who is Ancy Sojan: भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में कुछ पल ऐसे आते हैं जो आने वाली सदियों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं. ओडिशा के भुवनेश्वर में स्थित कलिंगा स्टेडियम गवाह बना एक ऐसे ही ऐतिहासिक और अभूतपूर्व क्षण का, जिसने भारतीय खेल जगत की बुनियादी सोच को बदल दिय. केरल की 25 वर्षीय जांबाज एथलीट एंसी सोजन ने महिलाओं की लॉन्ग जंप इवेंट में वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना पिछले दो दशकों से हर भारतीय खेल प्रेमी कर रहा था. एंसी ने भारत की महानतम एथलीटों में से एक, अंजू बॉबी जॉर्ज के 22 साल पुराने नेशनल रिकॉर्ड को न सिर्फ तोड़ा, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स में एक नए युग की शुरुआत कर दी.

भारतीय एथलेटिक्स में अंजू बॉबी जॉर्ज (Anju Bobby George) का नाम एक ऐसे शिखर की तरह था, जिसे छू पाना नामुमकिन सा लगता था. साल 2004 के एथेंस ओलंपिक के दौरान अंजू बॉबी जॉर्ज ने 6.83m की लंबी कूद लगाकर एक ऐसा नेशनल रिकॉर्ड स्थापित किया था, जो पिछले 22 सालों से कोई भी भारतीय महिला एथलीट नहीं तोड़ पाई थी. लेकिन 24 से 28 जून 2026 तक भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित नेशनल इंटर-स्टेट एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एंसी सोजन (Ancy Sojan) ने हवा को चीरते हुए 6.88m की ऐतिहासिक छलांग लगाई. इस जादुई छलांग के साथ ही अंजू बॉबी जॉर्ज का 22 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड टूटा और भारत को लंबी कूद की नई महारानी मिल गई.

1 मार्च 2001 को केरल के त्रिशूर में जन्मी एंसी सोजन बचपन से ही असाधारण प्रतिभा की धनी थीं। खेल के प्रति उनके जुनून और देश सेवा के जज्बे ने उन्हें भारतीय नौसेना तक पहुंचाया, जहां वह वर्तमान में चीफ पेटी ऑफिसर के रूप में कार्यरत हैं. नौसेना के कड़े अनुशासन ने एंसी के खेल को एक नई धार दी. पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी निरंतरता से सबको प्रभावित किया और आज वह 25 वर्ष की उम्र में भारतीय एथलेटिक्स की सबसे चमकीली उम्मीद बनकर उभरी हैं.

अगर आंकड़ों की जुबानी इस कहानी को देखें, तो एंसी की तरक्की किसी रॉकेट की रफ्तार जैसी रही है. उन्होंने पहली बार इंटरनेशनल स्टेज पर अपनी धाक 2023 के हांग्जो एशियाई खेलों में जमाई थी, जहां उन्होंने 6.63m की कूद के साथ सिल्वर मेडल अपने नाम किया था. इसके बाद 2025 की एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक बार फिर सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपनी निरंतरता साबित की. साल 2026 की शुरुआत में उन्होंने एशियाई इनडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता. इसी सीजन में नेशनल फेडरेशन कप के दौरान उन्होंने 6.75m की छलांग लगाकर अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में सुधार किया था, जो अब कलिंगा स्टेडियम में 6.88m के महा-रिकॉर्ड में तब्दील हो गया.
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एंसी सोजन की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे महान धावक मिल्खा सिंह की जिंदगी का एक गहरा प्रभाव है. एंसी ने खुद खुलासा किया कि जब वह कलिंगा स्टेडियम में प्रतिस्पर्धा कर रही थीं, तो उनके दिमाग में 2013 की बायोपिक फिल्म भाग मिल्खा भाग का एक बेहद भावुक दृश्य चल रहा था. इस दृश्य में युवा मिल्खा सिंह भारत के आधिकारिक ब्लेजर को सिर्फ शौक के लिए पहन लेते हैं, जिस पर उनके कोच उन्हें थप्पड़ मारते हैं और कहते हैं कि ‘अगर इस जर्सी को पहनना है, तो तुम्हें इसे अपनी मेहनत से कमाना होगा और सामने वाले को हराना होगा.’ एंसी कहती हैं कि इस दृश्य ने उनके अंदर एक ऐसी आग सुलगा दी कि उन्हें लगा कि देश की जर्सी और मेडल ऐसे ही नहीं मिलते, उसके लिए सर्वश्रेष्ठ को हराना पड़ता है.

मैदान पर शारीरिक क्षमता से ज्यादा मानसिक स्थिरता काम आती है. एंसी ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपनी बेहतर हुई मानसिक स्थिति को दिया. प्रतियोगिता के दौरान एंसी ने अपने दिमाग में एक अनोखी रणनीति बनाई थी। उन्होंने कल्पना की कि वह नेशनल चैंपियनशिप में नहीं, बल्कि सीधे एशियन गेम्स के कड़े मुकाबले में कूद रही हैं और कोई प्रतिद्वंद्वी उन्हें हराने के लिए उनके ठीक पीछे खड़ा है. इस काल्पनिक डर और देश के लिए मेडल जीतने की जिद ने उन्हें आखिरी पलों में वो एक्स्ट्रा पुश दिया, जिसने उन्हें 6.88m दूर फेंक दिया.

एक सच्चे एथलीट को सफलता के लिए अपनी सबसे पसंदीदा चीजों की आहुति देनी पड़ती है. एंसी के लिए यह आहुति थी उनकी पसंदीदा ‘बिरयानी’. एंसी खाने की बेहद शौकीन हैं, लेकिन विश्व स्तरीय जम्पर बनने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाने के साथ-साथ बिरयानी खाना पूरी तरह छोड़ दिया। जब भी उनका मन डगमगाता, वह खुद से एक ही सवाल करतीं- ‘तुम यहां क्यों आई हो? तुमने स्पोर्ट्स क्यों शुरू किया था? तुम्हें क्या बनना है? अगर लक्ष्य बड़ा है, तो पहले अपना गोल अचीव करो, खाना तो बाद में भी खा सकती हो.’

एक साल पहले तक एंसी सोजन का वजन 60kg था और उनके शरीर का बॉडी फैट प्रतिशत 26% था, जो एक एथलीट के लिहाज से थोड़ा ज्यादा माना जाता है. एंसी ने कड़े प्रशिक्षण और सख्त डाइट चार्ट के जरिए अपनी बॉडी में चमत्कारी बदलाव किया. उन्होंने एक साल के भीतर अपना वजन 60kg से घटाकर 55kg कर लिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि उन्होंने अपने शरीर के फैट प्रतिशत को 26% से घटाकर सीधे 13% पर ला खड़ा किया. इसी लीन बॉडी प्रोफाइल और फिटनेस ने उन्हें हवा में ज्यादा समय तक रहने और लंबी दूरी तय करने की ताकत दी.

भुवनेश्वर का कलिंगा स्टेडियम भारतीय खेलों का नया गवाह बनता जा रहा है. 24 से 28 जून 2026 तक आयोजित इस नेशनल इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में जिस वक्त एंसी दौड़ रही थीं, पूरे स्टेडियम में सन्नाटा था. लेकिन जैसे ही एंसी ने टेक-ऑफ बोर्ड से हवा में छलांग लगाई और 6.88m के निशान को छुआ, पूरा स्टेडियम चीख उठा. यह सिर्फ एक मेडल की छलांग नहीं थी, यह 22 साल पुराने उस मिथक को तोड़ने की छलांग थी कि अंजू बॉबी जॉर्ज का रिकॉर्ड तोड़ना असंभव है.

इस ऐतिहासिक 6.88m के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ ही एंसी सोजन ने आगामी विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए भारत की तरफ से सबसे मजबूत पदक दावेदारों में अपना नाम दर्ज करा लिया है। ग्लोबल लेवल पर इस समय जो दूरियां मापी जा रही हैं, उसमें एंसी का यह नया आंकड़ा दुनिया के शीर्ष एथलीटों को कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

एंसी सोजन का सफर यहीं नहीं रुकता. नेशनल रिकॉर्ड तोड़ना उनका एक पड़ाव था, मंजिल नहीं. उनकी आंखों में अब सिर्फ एक ही सपना तैर रहा है. इंटरनेशनल लेवल और एशियाई खेलों में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतना. एंसी कहती हैं, ‘मेरा अंतिम लक्ष्य स्टेडियम में भारत का राष्ट्रगान सुनना है जब तिरंगा सबसे ऊपर लहरा रहा हो. मैं जानती हूं कि 6.88m की इस छलांग के बाद मैं उस सोने के तमगे को छू सकती हूं और मैं इसके लिए अपनी पूरी जान लगा दूंगी.’

एंसी सोजन की यह कहानी बताती है कि रिकॉर्ड चाहे कितने भी पुराने और बड़े क्यों न हों, अगर आपके इरादे मजबूत हों, आपके आदर्श मिल्खा सिंह जैसे हों और आप अपनी पसंदीदा बिरयानी तक का त्याग करने को तैयार हों, तो इतिहास की किताबों में आपका नाम दर्ज होने से कोई नहीं रोक सकता. अंजू बॉबी जॉर्ज की विरासत को अब एंसी सोजन के रूप में एक नया और बेहद मजबूत कंधा मिल चुका है. एक छोटे से गांव से निकलकर भारतीय नौसेना में चीफ पेटी ऑफिसर के पद पर देश की सेवा करने और फिर ट्रैक एंड फील्ड पर इतिहास रचने तक की एंसी की यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता नहीं है. यह कहानी है कड़े अनुशासन, अपनी पसंदीदा चीजों के त्याग और मानसिक दृढ़ता को अपने जीवन में उतारने की.






