संवाददाता@विशाल टंडन…..

रॉबर्ट्सगंज के विकास नगर स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर आयोजित तीन दिवसीय ग्रीष्मकालीन दिव्य बाल व्यक्तित्व विकास शिविर का शनिवार सायंकाल भव्य समापन हुआ। शिविर का उद्देश्य बच्चों में मानवीय मूल्य, आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक संस्कार एवं व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना था।
शिविर के दौरान बच्चों के लिए सृजनात्मक, मानसिक तथा खेल आधारित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता का विकास हो सके। समापन समारोह में सेवा केंद्र की मुख्य संचालिका बी.के. सुमन दीदी ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया।

उन्होंने कहा कि बच्चे परिवार की अमूल्य धरोहर और राष्ट्र का स्वर्णिम भविष्य हैं। माता-पिता को अपने व्यवहार और आचरण से बच्चों के सामने आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए, क्योंकि बच्चों में देखकर सीखने और समझने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। शिविर में डॉ. बी.के. हरिंद्र भाई ने जीवन लक्ष्य की पहचान और उसे प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानसिक शक्तियों के विकास पर प्रेरणादायक व्याख्यान दिया। बी.के. सीता बहन ने बच्चों में मानवीय मूल्यों के विकास एवं संवर्धन पर प्रकाश डाला।
पुलिस कांस्टेबल सुमनलता बहन ने आत्म सुरक्षा के महत्व और सुरक्षा संबंधी आवश्यक जानकारी दी। बी.के. कविता बहन ने जीवन में दिव्य गुणों और शक्तियों के विकास पर चर्चा की, जबकि बी.के. दीपशिखा बहन ने बेहतर भविष्य के निर्माण में मानवीय मूल्यों की भूमिका को रेखांकित किया। शिविर में आर्नव सिंह को सर्वश्रेष्ठ बालक का पुरस्कार प्रदान किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं में आयुष्मान विश्वकर्मा, आयांश वर्मा, सत्यम केशरी, प्रियांशु विश्वकर्मा एवं आन्वी श्रीवास्तव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

वहीं दिव्यांश, नित्या केशरी, सत्यम मौर्य, अव्यक्त मिश्रा, रागवी सिंह, वैभव चौबे, रूद्र सिंह तथा आर्ना सोनी को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण बी.के. सुमन बहन एवं बी.के. प्रतिभा बहन द्वारा किया गया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए बच्चों ने गमलों में पौधे लगाकर उनकी देखभाल और सुरक्षा का संकल्प भी लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक और माता-पिता उपस्थित रहे।
इस अवसर पर बी.के. सुमन दीदी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में मानवीय मूल्यों के विकास के लिए घर-परिवार का वातावरण सकारात्मक और संवेदनशील होना चाहिए। बच्चों के प्रति नकारात्मक टिप्पणियों से बचना आवश्यक है, क्योंकि ऐसी बातें उन्हें भावनात्मक रूप से आहत कर सकती हैं और उनके व्यक्तित्व पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि ईश्वरीय ज्ञान और राजयोग के माध्यम से परिवार और मन को सहज रूप से सकारात्मक बनाकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।





