हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनावों में धर्मशाला से BJP ने 11 वार्ड और पालमपुर से कांग्रेस ने 11 सीटें जीती हैं। इन नतीजों ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर बड़े सियासी संकेत दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश में रविवार को घोषित नगर निगम चुनावों के नतीजों ने केवल स्थानीय निकायों की तस्वीर ही साफ नहीं किए हैं। इन चुनाव नतीजों ने कई नेताओं के सियासी रुतबे को भी नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। खासकर कांगड़ा जिले के 2 नगर निगमों धर्मशाला और पालमपुर के नतीजों ने भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल को अपनी-अपनी पार्टियों में और मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। अगले विधानसभा चुनावों से पहले इन नतीजों को सेमीफाइनल मुकाबले के रूप में भी देखा जा रहा था।
धर्मशाला में भाजपा का दबदबा
धर्मशाला में भाजपा ने 17 में से 11 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस 5 सीटों पर सिमट गई और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
पालमपुर में कांग्रेस का परचम
दूसरी ओर पालमपुर नगर निगम में कांग्रेस ने 15 में से 11 सीटें जीतकर अपना दबदबा बरकरार रखा, जबकि भाजपा को केवल चार सीटों पर संतोष करना पड़ा।
कांगड़ा में सुधीर का बढ़ा कद, सुक्खू को झटका
धर्मशाला नगर निगम चुनाव के नतीजों ने कांगड़ा जिला में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा का राजनीतिक कद और मजबूत कर दिया है। दो साल पहले सीएम सुक्खू से छत्तीस के आंकड़े के चलते कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सुधीर शर्मा ने पहले विधानसभा उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की और अब नगर निगम चुनाव में भी पार्टी को बड़ी सफलता दिलाकर अपनी रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन किया है।
धर्मशाला में सुधीर की भूमिका अहम
धर्मशाला नगर निगम चुनाव में भाजपा उम्मीदवारों के चयन में सुधीर शर्मा की अहम भूमिका मानी जा रही थी। पार्टी ने अधिकांश वार्डों में उन्हीं की पसंद और रणनीति के आधार पर उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। परिणाम आने के बाद भाजपा ने 17 में से 11 सीटें जीत लीं, जो पिछले नगर निगम चुनाव के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है।
धर्मशाला में सुक्खू का प्रचार लेकिन 5 सीटों पर सिमटी कांग्रेस
धर्मशाला का चुनाव BJP और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सबब बना था। कांग्रेस ने यहां वरिष्ठ मंत्री चंद्र कुमार और पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष एवं विधायक आरएस बाली को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू भी चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे। इसके बावजूद कांग्रेस 5 सीटों से आगे नहीं बढ़ पाई और कई वार्डों में मुकाबले में भी कमजोर दिखाई दी।
सुधीर शर्मा की स्थिति मजबूत
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धर्मशाला के नतीजों ने भाजपा संगठन में सुधीर शर्मा की स्थिति को और मजबूत किया है। कांगड़ा जिले की राजनीति में पहले से प्रभावशाली माने जाने वाले सुधीर अब पार्टी के प्रमुख चेहरों में और मजबूती से उभरते दिखाई दे रहे हैं।
पालमपुर में कांग्रेस ने दोहराया इतिहास, सुक्खू पास
धर्मशाला की तरह पालमपुर नगर निगम के नतीजों ने भी एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। यहां कांग्रेस ने 15 में से 11 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार नगर निगम पर कब्जा बरकरार रखा है। भाजपा केवल चार सीटें जीत सकी। विशेष बात यह है कि वर्ष 2021 के नगर निगम चुनाव में भी कांग्रेस ने पालमपुर में शानदार जीत दर्ज की थी। इस बार भी पार्टी ने लगभग वैसा ही प्रदर्शन दोहराया है। कुल मिलाकर पालमपुर में सीएम सुक्खू की साख बच गई है।
पालमपुर के कांग्रेसी धुरंधर कौन-कौन?
इस जीत का श्रेय स्थानीय कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल और प्रदेश सरकार में मंत्री राजेश धर्माणी को दिया जा रहा है। चुनाव प्रचार और संगठनात्मक रणनीति की जिम्मेदारी मुख्य रूप से इन्हीं नेताओं के पास थी। परिणामों ने दोनों नेताओं की राजनीतिक पकड़ को मजबूत किया है।
BJP के गढ़ में कांग्रेस का परचम
पालमपुर का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार का गृह क्षेत्र है और लंबे समय तक भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे इलाके में कांग्रेस का लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल करना पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
BJP को आत्ममंथन की जरूरत
दूसरी ओर भाजपा ने पालमपुर की जिम्मेदारी वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री विपिन सिंह परमार को सौंपी थी। हालांकि पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी और चार सीटों तक सीमित रह गई। इससे भाजपा को आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो सकती है।
कांगड़ा के नतीजों के क्या मायने?
कांगड़ा जिला हिमाचल की राजनीति का सबसे अहम जिला माना जाता है। विधानसभा की सबसे अधिक सीटें इसी जिले में हैं और प्रदेश की सत्ता का रास्ता भी काफी हद तक कांगड़ा से होकर गुजरता है। ऐसे में धर्मशाला और पालमपुर के नतीजे केवल नगर निगम चुनावों के परिणाम नहीं माने जा रहे, वरन इन चुनाव नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।
2027 में BJP-कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर के संकेत
धर्मशाला में भाजपा की बड़ी जीत ने सुधीर शर्मा को मजबूती दी है, जबकि पालमपुर में कांग्रेस की शानदार सफलता ने आशीष बुटेल और राजेश धर्माणी की राजनीतिक हैसियत बढ़ाई है। इन परिणामों से यह भी साफ हुआ है कि कांगड़ा में दोनों दलों के बीच मुकाबला अभी भी बेहद दिलचस्प बना हुआ है। यही नहीं आगामी विधानसभा चुनाव में यह क्षेत्र एक बार फिर राजनीतिक टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।







