सोनम वांगचुक में पानी की कमी हो गई है। सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, उन्हें तुरंत लिक्विड की जरूरत है, लेकिन उनके परिवार ने इलाज से इनकार कर दिया है। अनशन के कारण सोनम वांगचुक के बिगड़ती सेहत पर क्या कह रहे चिकित्सा विशेषज्ञ…
सोनम वांगचुक में पानी की कमी के लक्षण हैं। सफदरजंग अस्पताल के प्राधिकारियों ने शनिवार को बताया कि सोनम वांगचुक को गंभीर जटिलताओं से बचाने के लिए उनको तत्काल लिक्विड और ‘इलेक्ट्रोलाइट’ देने की जरूरत है लेकिन बार-बार सलाह दिए जाने के बावजूद सोनम वांगचुक और उनके परिवार ने इलाज करने के लिए हामी नहीं भरी है। बीते 21 दिन से भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक होश में हैं। उनकी नब्ज, बीपी और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है। सफदरजंग अस्पताल ने रात करीब नौ बजे जारी एक बयान में उक्त जानकारियां दी।
‘इलेक्ट्रोलाइट’ देना जरूरी
सफदरजंग अस्पताल ने अपने बयान में कहा कि एम्स के एक विशेषज्ञ को भी सोनम वांगचुक का इलाज कर रहे दल में शामिल किया गया है। AIIMS में इमरजेंसी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार ने भी शनिवार को सोनम वांगचुक की जांच की। अनशन के कारण सोनम वांगचुक में डिहाइड्रेशन के लक्षण हैं। सोनम वांगचुक को तुरंत मुंह से या नसों से लिक्विड और ‘इलेक्ट्रोलाइट’ देना जरूरी हो गया है।
डॉक्टरों की निगरानी में वांगचुक
सफदरजंग अस्पताल ने बताया कि इलाज शुरू करने की तुरंत जरूरत बताए जाने के बाद भी सोनम वांगचुक ने नसों से लिक्विड या मुंह से पेय एवं अन्य दवाएं लेने से इनकार कर दिया है। इस तरह से वह सेहत को लेकर लगातार जोखिम मोल ले रहे हैं। मरीज के परिवार ने इलाज के लिए मंजूरी नहीं दी है। सोनम की हालत बिगड़ने और गंभीर समस्याओं से बचाने के लिए तुरंत इलाज जरूरी है। वांगचुक लगातार डॉक्टरों की निगरानी में हैं।
लगातार समझा रहे हैं डॉक्टर, बड़ा जोखिम
सफदरजंग अस्पताल का कहना है कि विशेषज्ञ सोनम वांगचुक और उनके परिवार को लगातार समझा रहे हैं कि स्वास्थ्य के बिगड़ने से बचाने के लिए जल्द से जल्द इलाज की अनुमति दी जाए। उनसे बार-बार गुजारिश की जा रही है कि इलाज को स्वीकार किया जाना चाहिए। लेकिन परिवार ने अब तक इलाज करने की मंजूरी नहीं दी है। इस तरह सोनम वांगचुक का परिवार एक बड़ा जोखिम मोल ले रहा है।
क्या बोले एम्स के डॉक्टर?
AIIMS दिल्ली में इमरजेंसी मेडिसिन के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अक्षय कुमार ने कहा कि मैंने सोनम वांगचुक की जांच की। उनके सभी जरूरी पैरामीटर (बीपी, ऑक्सीजन और पल्स रेट) नॉर्मल हैं। वे पूरी तरह होश में हैं। वह ठीक से बात कर पा रहे हैं। हम लगातार उन पर नजर रख रहे हैं। हम उनसे बात करने की भी कोशिश कर रहे हैं ताकि वे IV फ्लूइड और IV इलेक्ट्रोलाइट्स लें। हम उनके लिए जो भी सबसे अच्छा हो सकता है, वह कर रहे हैं। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि वे जल्द से जल्द ठीक हो जाएं।
खून में बनने लगते हैं कीटोन बॉडीज
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और उनकी बिगड़ती सेहत पर जनरल फिजिशियन डॉ. एम. वली ने कहा कि भूखे रहने पर खून में कीटोन बॉडीज बनती हैं। हम हर महीने या कुछ धर्मों में 40 दिन तक उपवास रखते हैं। हालांकि उपवास रखने का तरीका पालन करना भी बेहद जरूरी होता है। इससे हेल्दी मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा मिलता है। इसमें कीटोन बॉडी का बनना भी शामिल है।
3 तक किटोन लेवल खतरनाक
डॉ. एम. वली ने कहा कि भोजन शुरू करते ही कीटोन बॉडी का बनना बंद हो जाता है। यदि कीटोन लेवल .3 mmol/L के आसपास है तो यह नुकसानदायक नहीं होता है। आपको कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है लेकिन यदि कीटोन लेवल .3 से बढ़कर 3 तक पहुंच जाता है तो यह अलग-अलग अंगों के लिए बेहद नुकसानदायक हो जाता है।
…तब हो जाता है कीटोनमिया
डॉ. एम. वली ने आगे कहा कि भले ही कीटोन दिमाग के लिए न्यूट्रिशन का काम करता है, लेकिन यह खून के लिए बेहद घातक है। यदि यह खून में घूमता है तो इसे कीटोनमिया कहते हैं। शुगर के मरीजों में इसे कीटोएसिडोसिस कहते हैं। यदि कीटोन का लेवल 3 से अधिक हो जाए तो बेहद नुकसानदायक होता है। यही कारण है कि हम भूख हड़ताल करने वालों से खाना खाने के लिए कहते हैं।
अस्पताल में ही कराई जाती है फोर्स फीडिंग
डॉ. एम. वली ने कहा कि यदि मरीज बात नहीं मानते हैं तो उनको जबरदस्ती न्यूट्रिशन या खाना देने की सलाह दी जाती है। यदि वे मुंह से खाना नहीं चाहते तो उन्हें ग्लूकोज नसों के जरिए लिक्विड दिया जा सकता है। ऐसे पेशेंट को फोर्स फीडिंग कराई जाती है। हालांकि इस दौरान मरीज का बीपी, हाइड्रेशन, पल्स, ऑक्सीजन लेवल देखा जाना जरूरी होता है। यह काम अस्पताल में ही किया जा सकता है।
इलाज कराने से मना कर रहे
सोनम की बिगड़ती सेहत पर सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा कहती हैं कि सोनम अब भी उपवास पर हैं। वे पूरी तरह होश में हैं और उन्हें सब पता है। उनको इलाज की जरूरत है। फिर भी वे इलाज कराने से मना कर रहे हैं। सोनम वांगचुक ना थेरेपी और ना ही इलाज ले रहे हैं। हम सोनम वांगचुक को लगातार फ्लूइड थेरेपी या ORS लेने के लिए समझा रहे हैं। लेकिन वे इसे लेने को तैयार नहीं हैं।
एसिड बढ़ने से एसिडोसिस का खतरा
वहीं अपोलो अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. सुरनजीत चटर्जी ने बताया कि अधिक दिन तक खाना नहीं खाने से शरीर खुद के फैट, प्रोटीन एवं मांसपेशियों से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है। इस कारण बॉडी में जरूरी पोषक तत्वों का बैलेंस बिगड़ जाता है। बॉडी में एसिड भी अधिक हो जाता है। इस कारण बॉडी का पीएच कम हो जाता है। ऐसी परिस्थिति को एसिडोसिस कहते हैं।
…तब खराब होने लगते शरीर के अंग
डॉ. सुरनजीत चटर्जी ने आगे कहा कि फिर बॉडी तेजी से सांस लेकर एसिड कम करने की कोशिश करता है। बॉडी पीएच को मेंटेन करने की कोशिश करता है। इस पूरी प्रॉसेस में बाइकार्बोनेट अधिक खर्च होता है। इस कारण किडनी से भी बाइकार्बोनेट अधिक बनता है। बॉडी एसिडोसिस से लड़ने की कोशिश करने लगता है। ऐसी स्थितियां कायम रहने से हालत बिगड़ने लगती है। फिर लिवर समेत महत्वपूर्ण अंग खराब होने लगते हैं। यह बेहद खतरनाक होता है।







