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Who is Randheer Singh: पांच बार के ओलंपियन, अर्जुन पुरस्कार विजेता और भारत, एशिया और इंटरनेशनल ओलंपिक समिति के सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक राजा रणधीर सिंह का बुधवार को उम्र संबंधी लंबी बीमारी से जूझने के बाद निधन हो गया. वह एशियाई खेलों में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाने वाले शूटर थे.
राजा रणधीर सिंह की मौत
नई दिल्ली: ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा समेत समूचे भारतीय खेल जगत ने वरिष्ठ प्रशासक और पूर्व निशानेबाज रणधीर सिंह के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें भारतीय खेलों का करिश्माई नेता और असल धुरंधर बताया है. खेल जगत में वह ‘राजा रणधीर सिंह’ के नाम से मशहूर थे.
कौन थे रणधीर सिंह? (Who is Randheer Singh)
रणधीर सिंह का जन्म 18 अक्टूबर 1946 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत के पटियाला में हुआ था. रणधीर शाही परिवार से आते हैं. वे पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह के छोटे बेटे भालिंद्र सिंह के बेटे थे. उनके पिता भालिंद्र सिंह 1947 से 1992 तक इंटरनेशनल ओलंपिक समिति (आईओसी) के सदस्य. 1960 से 1975 और 1990 से 1984 तक भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष रहे और 1982 के एशियाई खेलों को दिल्ली लाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. रणधीर सिंह के चाचा यादवेंद्र सिंह पटियाला रियासत के आखिरी महाराजा थे.
क्रिकेटर बनना चाहते थे रणधीर सिंह
रणधीर सिंह ने पटियाला के यादवेंद्र पब्लिक स्कूल से पढ़ाई पूरी की. सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में कला स्नातक की उपाधि प्राप्त की. रणधीर पहले क्रिकेटर बनना चाहते थे. वह अपनी स्कूल और कॉलेज की टीमों के लिए गेंदबाजी की शुरुआत किया करते थे. हालांकि, शूटिंग में उनका करियर फलता-फूलता देखकर उन्होंने क्रिकेट खेलना छोड़ दिया और अंतरराष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू कर दिया.
Deeply saddened to hear of the passing of Raja Randhir Singh ji.
He lived a life devoted to sport as an Olympian, as a sports administrator, and as someone who contributed immensely to Indian and World sport.
His legacy will remain an important part of our sporting history.
My…
एशियाई खेलों में भारत को पहला गोल्ड मेडल
रणधीर सिंह ने एशियाई खेलों में भारत को निशानेबाजी में पहला गोल्ड मेडल दिलाया. वह पांच बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 1978 में बैंकॉक, थाईलैंड के एशियाई खेलों में रणधीर ने गोल्ड पर निशाना साधा था. उन्हें 1979 में अर्जुन पुरस्कार मिला. 1982 में दिल्ली एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीता. 1968 से 1984 तक मिश्रित ट्रैप स्पर्धा में पांच ओलंपिक खेलों में भाग लिया. वह करणी सिंह के बाद पांच ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले दूसरे भारतीय थे. उनका सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक प्रदर्शन 1968 के ओलंपिक में 17वां स्थान था, जो करणी सिंह से दो अंक और कांस्य पदक से चार अंक पीछे था.
किसने कैसे याद किया?
अभिनव बिंद्रा ने एक्स पर लिखा, ‘राजा रणधीर सिंहजी के निधन से दुखी हूं. एक ओलंपियन, एक खेल प्रशासक और भारतीय तथा विश्व खेलों में अपार योगदान देने वाले शख्स के रूप में उनका जीवन खेलों को समर्पित था. हमारे खेलों के इतिहास में उनकी विरासत अहम रहेगी, उनके परिवार को प्रियजनों को मेरी सांत्वना.’
एशियाई ओलंपिक परिषद ने लिखा, ‘ओलंपिक आंदोलन के दिग्गज राजा रणधीर का जीवन खेलों की सेवा और एशिया में ओलंपिक मूल्यों के प्रसार को समर्पित रहा. एशियाई ओलंपिक परिषद उनके परिवार, दोस्तों, सहकर्मियों और पूरे ओलंपिक परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करती है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.’
Extremely saddened to hear of Raja Randhir Singh’s passing. I have fond memories of him, dating back to the time we were team-mates in the 1980 Olympic Games. He leaves behind a massive legacy as an athlete & sports administrator. Heartfelt condolences to his family & friends. pic.twitter.com/eeuBy4zwI4

