संवाददाता@विशाल टंडन……

अखिल भारतीय किसान सभा, जनपद सोनभद्र संयोजक कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी सोनभद्र से मुलाकात की तथा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से किसानों की समस्याओं को गंभीर बताते हुए धंधरौल जलाशय की खाली पड़ी भूमि पर गरीब किसानों द्वारा की जा रही खेती का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
साथ ही सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता चतुर्थ नहर, रॉबर्ट्सगंज पर मिलीभगत और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सवाल भी खड़े किए गए। किसान सभा के जिला संयोजक प्रेमनाथ ने कहा कि सोनभद्र, जो एक कृषि प्रधान जिला है, वहां किसानों के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य, मुआवजा, भूमि सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है।

भूमि अधिग्रहण, फसल क्षति, स्मार्ट मीटर और बढ़ते बिजली बिलों ने किसानों की स्थिति को और अधिक दयनीय बना दिया है। ज्ञापन में मांग की गई कि सर्वे रिपोर्ट में दर्ज फसल क्षति की जानकारी किसानों को तत्काल उपलब्ध कराई जाए तथा प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
इसके साथ ही बैंक ऋण और बिजली बिलों को माफ करने, बड़े गांवों (1000 हेक्टेयर या उससे अधिक रकबे वाले) में सरकारी क्रय केंद्र खोलने तथा किसानों को ₹30,000 प्रति एकड़ की दर से फसल मुआवजा और फसल बीमा देने की मांग रखी गई।
साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया तुरंत बंद की जाए और पुराने सरकारी मीटरों को पुनः स्थापित किया जाए। इसके अलावा नोएडा में गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा करने की भी मांग की गई।प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि धंधरौल जलाशय की भूमि, जो अनुसूचित जाति एवं गरीब परिवारों को मिलनी चाहिए थी, वह उन्हें नहीं दी गई, जिससे गरीब परिवार परेशान हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से गरीबों को उजाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस मौके पर सीपीआईएम जिला मंत्री कॉ. नंदलाल आर्य, ऊँची कला के उदय प्रकाश, रामबचन, मुर्तजा अली सहित सैकड़ों किसान एवं पीड़ित ग्रामीण उपस्थित रहे।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
