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बालाघाट में आयोजित राज्य स्तरीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में मीना शर्मा आकर्षण का केंद्र रही. जिन्होंने इस प्रतियोगिता में पावरलिफ्टिंग में दमदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह किर्तीमान स्थापित करने के बाद चारों तरफ उनकी चर्चा हो रही है. मीना शर्मा का कहना है कि बीते 28 साल से वह अपनी फिटनेस पर काम कर रही है. वह लगातार योग और व्यायाम करती है.
बालघाट. महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी एक अलग छाप छोड़ रही है. एक वक्त था जब पावरलिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग को पुरुषों का खेल समझा जाता था. इस खेल में पुरुषों का ही दबदबा था लेकिन अब वक्त बदल रहा है. इस खेल में महिलाएं भी न सिर्फ अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रही है बल्कि नए किर्तीमान भी स्थापित कर रही है. कुछ ऐसा ही नजारा बालाघाट में देखने को मिला जहां राज्य स्तरीय पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में अपना दमखम दिखाया. इस प्रतियोगिता में आकर्षण का केंद्र रही 53 मीना शर्मा, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. अब चारों तरफ उनकी चर्चा है, जानिए उनकी कहानी…
मीडिया से बातचीत में मीना बताती हैं कि कोरोना काल में लॉकडाउन लगा. इस दौरान अपनी फिटनेस को बेहतर बनाने के लिए पावर लिफ्टिंग शुरू की थी. इसके बाद उन्हें पावर लिफ्टिंग का चस्का लग गया. ऐसे में सोशल मीडिया फैंस ने भी उनका हौसला बढ़ाया. फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ती रही. इसके बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया और पहली बार में ही गोल्ड मेडल हासिल कर लिया. फिर जो सिलसिला शुरू हुआ वह न सिर्फ राष्ट्रीय ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रही.
नेशनल ही नहीं इंटरनेशनल मंचों पर छोड़ी अपनी छाप
मीना पहले नेशनल और फिर एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल कर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए काबिल बन गईं और फिर 2022 में कजाकिस्तान में आयोजित विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में न सिर्फ भारत का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि सिल्वर पदक जीत का देश का मान-सम्मान भी ऊंचा किया. वहां पर 90 किलो ग्राम में मीना व प्रतिद्वंदी खिलाड़ी एक ही वेट पर रहे और वे गोल्ड मेडल की हकदार भी रही लेकिन महज कुछ ग्राम वजन ज्यादा होने उन्हें स्वर्ण पदक से हाथ धोना पड़ गया.
जानिए क्या सफलता का राज
मीना शर्मा का कहना है कि बीते 28 साल से वह अपनी फिटनेस पर काम कर रही है. वह लगातार योग और व्यायाम कर रही है. वह न सिर्फ पावर लिफ्टिंग की शौकीन है बल्कि मैराथन रेस में भी भाग लेती है. उन्होंने मुंबई में आयोजित 42 किलोमीटर लंबी मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया है, और यहां सैकड़ों की संख्या में शामिल प्रतिभागियों को पछाड़कर तीसरा स्थान प्राप्त किया है. इतना ही नहीं वह 10 बार 21 किलोमीटर की मैराथन में भाग ले चुकी है. उनकी डाइट लिमिडेट और संतुलित है, जो उनके एनर्जी का स्रोत है. वे ब्राउन राइस व सिंघाड़ा के आटा का उपयोग करती हैं.
सिर्फ खेल ही नहीं घरेलू कामों में भी आगे
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी वैसे तो आम दिनों में घरेलू महिला की भूमिका निभाती है और अपने पति के कामों में हाथ बंटाती है, लेकिन उनका जीवन इतना भी आसान नहीं है जितनी मेहनत कर उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है. उनके तीन प्रसव सीजर हुए है, बावजूद इसके उन्होंने अपने मनोबल को कभी रुकने नहीं दिया और लगातार पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में अपने दमखम का प्रदर्शन कर महिलाओं के लिए वे मिसाल बन रही हैं. उन्होंने बालाघाट जिले में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी अपने पावर का प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक को हासिल कर इस प्रतियोगिता को भी अपने नाम किया है.
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