नई दिल्ली. ग्लासगो के स्कॉटस्टौन स्टेडियम में गुरुवार की सुबह जेवलिन थ्रो के खिलाड़ियों के लिए एक कठिन परीक्षा की तरह रही. 14 डिग्री की ठिठुरती ठंड, 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहती हवाएं और दिशा बदलती क्रॉसविंड्स ने दुनिया के दिग्गज एथलीटों का कड़ा इम्तिहान लिया. लेकिन इन विपरीत परिस्थितियों से पार पाते हुए भारत के स्टार एथलीट और पूर्व कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीयों ने शानदार प्रदर्शन कर 12 खिलाड़ियों वाले फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है.
भारत के लिए यह एक ऐतिहासिक पल रहा क्योंकि फाइनल की कुल 12 में से एक-चौथाई जगह पर तिरंगे का कब्जा है. नीरज चोपड़ा के अलावा रोहित यादव और यश वीर सिंह ने भी शुक्रवार को होने वाले ग्रैंड फिनाले का टिकट कटा लिया है.
2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन नीरज चोपड़ा (Neeraj Chopra) ने चोट के कारण 2022 बर्मिंघम खेलों में भाग नहीं लिया था, इस बार चोट से उबरने के बाद अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए मैदान में उतरे. उन्होंने अपने पहले प्रयास में 76.28 मीटर का थ्रो किया, लेकिन दूसरे प्रयास में सुधार करते हुए 79.61 मीटर की दूरी तय की और तालिका में पांचवां स्थान हासिल करते हुए आसानी से फाइनल में प्रवेश कर लिया.
फाइनल में जगह बनाने के बाद नीरज चोपड़ा ने कहा, ‘मैं खुश हूं कि मैं फाइनल में पहुंच गया. मेरा मुख्य लक्ष्य यही था. थ्रो ठीक-ठाक था, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि क्वालीफाई किया जाए. अब लक्ष्य यही है कि फाइनल में जाकर अपना 100 प्रतिशत दूं और सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं.’
मौसम और कठिन परिस्थितियों पर अपने अनुभव को साझा करते हुए नीरज ने विस्तार से बताया. उनहोंने कहा, ‘मौसम और परिस्थितियां जेवलिन थ्रोअर्स के अनुकूल बिल्कुल नहीं थीं. वहां न केवल बहुत ठंड थी, बल्कि तेज हवा भी चल रही थी. सबसे बड़ी समस्या यह थी कि हवा सामने से नहीं आ रही थी, जिससे थ्रो का सही आकलन करना बहुत मुश्किल हो रहा था. कई बार मुझे लगा कि मैं भाला एक तरफ फेंक रहा हूं, लेकिन हवा का झोंका उसे दूसरी तरफ ले गया. यही वजह थी कि बहुत सारे थ्रोअर्स को संघर्ष करना पड़ा. कोई भी खिलाड़ी ऑटोमैटिक क्वालीफिकेशन (84 मीटर) का आंकड़ा नहीं छू पाया.’ नीरज नेक कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हो रही है कि हम तीनों भारतीय (मैं, रोहित और यश वीर) फाइनल में पहुंच गए हैं..
वहीं श्रीलंका के उभरते हुए खिलाड़ी और इस मुकाबले के बड़े दावेदार रुमेश थारंगा पथिराजे पर बात करते हुए नीरज ने उनकी तारीफ की. नीरज ने कहा, ‘वह बहुत अच्छा लड़का है और मेरा दोस्त है. इस साल उसने वाकई बेहतरीन थ्रो किए हैं. यह बहुत अच्छी बात है कि वह श्रीलंका के लिए कुछ बड़ा और शानदार काम कर रहा है.’ नीरज चोपड़ा के साथ-साथ दो अन्य युवा भारतीय एथलीटों ने भी कठिन हवाओं के बीच सूझबूझ का परिचय दिया.
रोहित यादव ने अपने प्रदर्शन में शानदार सुधार दिखाया. उन्होंने अपने पहले प्रयास के 77.04 मीटर के स्कोर को पीछे छोड़ते हुए 78.37 मीटर का थ्रो किया और 10वें स्थान पर रहकर फाइनल में जगह बनाई. यश वीर सिंह ने भी 78.36 मीटर का थ्रो फेंककर 11वां स्थान हासिल किया. इस प्रकार, 12 खिलाड़ियों वाले फाइनल मुकाबले में 3 भारतीय अपनी दावेदारी ठोकते नजर आएंगे.
कोई नहीं छू पाया 84 मीटर का आंकड़ा
स्कॉटस्टौन में स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि आयोजकों द्वारा तय किया गया 84 मीटर का ऑटोमैटिक क्वालीफिकेशन मार्क दुनिया का कोई भी दिग्गज पार नहीं कर सका. श्रीलंका के रुमेश थारंगा पथिराजे (Rumesh Tharanga Pathirage) 82.84 मीटर के अपने पहले ही थ्रो के साथ क्वालीफिकेशन राउंड में शीर्ष पर रहे. उन्होंने इस सत्र में रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का थ्रो फेंककर हलचल मचाई थी और इस समय वे सबसे बड़े खतरे के रूप में देखे जा रहे हैं.
दूसरे स्थान पर ग्रेनाडा के एंड्रसन पीटर्स रहे, जिन्होंने अपनी रन-अप रणनीति में बदलाव करते हुए 81.29 मीटर का थ्रो किया. दक्षिण अफ्रीका के 27 वर्षीय डोव स्मिट (Douw Smit), जो एक समय 5 साल की गंभीर पीठ की चोट के कारण खेल छोड़ने की सोच रहे थे, उन्होंने 80.64 मीटर फेंककर तीसरा स्थान हासिल किया. वहीं इंग्लैंड के बेन ईस्ट 80.38 मीटर के थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहे और 80 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले 4 खिलाड़ियों में शामिल हुए.
शुक्रवार के फाइनल से क्या हैं उम्मीदें?
क्वालीफिकेशन का प्रदर्शन सिर्फ फाइनल का रास्ता साफ करता है, लेकिन असली जंग शुक्रवार शाम को होगी. स्कॉटस्टौन में शाम के वक्त हवाओं का रुख बदल सकता है. इस सीजन में जहां पथिराजे (92.62m) और रोहित यादव (87.05m) अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर शीर्ष फॉर्म में हैं, वहीं नीरज चोपड़ा का अनुभव और बड़े मैचों में वापसी करने की क्षमता उन्हें स्वर्ण पदक का सबसे प्रबल दावेदार बनाती है. अब निगाहें शुक्रवार की शाम पर टिकी हैं, जब तीनों भारतीय खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों में तिरंगा लहराने के इरादे से मैदान में उतरेंगे.






