@जेo केo/सोनभद्र…..
__बिचौलियों ने डकारा फंड, लाभार्थियों को 12 लाख में मिले चंद हजार, 7.20 लाख की सब्सिडी बिचौलियों ने हड़पी
— शिकायतकर्ता ने चार बिचौलियों के नाम सदाफल निषाद, जितेंद्र निषाद, हिमाचल साहनी और रमेश पटेल पर आरोप लगाया कि भोली भाली महिलाओं को आगे कर उनसे फॉर्म भरवाये गए

Sonbhadra । उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि महिला लाभार्थियों के नाम पर योजना का फायदा उठाकर बिचौलियों और विभागीय मिलीभगत से सरकारी सब्सिडी हड़प ली गई। जिस योजना का मकसद मछुआरा समाज को आर्थिक रूप से मजबूत करना था, वही योजना कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है।
सोनभद्र के मत्स्य विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 139 लाभार्थियों को मछली पालन के लिए केज दिए गए। हर लाभार्थी को 4 केज, कुल 658 केज रिंहद बांध और ओबरा डैम में लगाए जाने थे। रिंहद में 228 और ओबरा में 430 केज में मछली पालन होना था।
योजना के तहत 60 प्रतिशत यानी 7.20 लाख रुपए सरकारी अनुदान और 40 प्रतिशत लाभार्थी का अंशदान तय था।
लेकिन आरोप है कि इन केजों में मछली डाली ही नहीं गई।

शिकायतकर्ता अर्जुन सिंह के अनुसार, योजना का असली लाभ मछुआरा समाज तक नहीं पहुंचा। बिचौलियों ने महिलाओं को लालच देकर फॉर्म भरवाए और सादे चेक पर हस्ताक्षर करा लिए।
फिर विभाग की मिलीभगत से सब्सिडी की रकम निकाल ली गई और लाभार्थियों को सिर्फ कुछ हजार रुपए देकर बाकी पैसा आपस में बांट लिया गया।
लाभार्थी पार्वती पत्नी सदावृक्ष, सपना पत्नी शिव कुमार, साधना पत्नी साधु, मीना देवी पत्नी पारसनाथ, रंजना देवी पत्नी राजन साहनी का कहना है कि उन्होंने फॉर्म तो भरा, लेकिन वे मछली पालन नहीं करतीं। उन्हें यह तक नहीं पता कि उनके नाम पर केज कहां लगाए गए हैं। कुछ मामलों में आरोप है कि मौके पर फोटो किसी और का लगाकर भुगतान कर दिया गया, तो कहीं बिना किसी सत्यापन के ही 7.20 लाख रुपए खाते में ट्रांसफर दिखा दिए गए।

जब इस पूरे मामले में मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक से सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। आरोप है कि सदाफल निषाद, रमेश पटेल, हिमांचल साहनी और जितेंद्र निषाद ने विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया। कई शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस जांच नहीं हुई है।
सरकार की योजना गरीबों के लिए… लेकिन सोनभद्र में यही योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है, महिलाओं के नाम पर फॉर्म, सादे चेक पर साइन… और लाखों की सब्सिडी गायब… आखिर कौन जिम्मेदार?, अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा…
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर मंत्री संजय निषाद बीते दिनों जनपद सोनभद्र पहुंचे थे, केज कल्चर योजना के खामियों पर नाराजगी जताई, ओबरा डैम और रिहंद डैम में केज कल्चर योजना में गड़बड़ी मिली, मंत्री संजय निषाद मीडिया से बात करते हुए दोनों कहा था कि यह एक बड़ा रैकेट है, एक अधिकारी के बस का नहीं है, अधिकारी का काम है कमियों को दुरुस्त करना उन्हें ट्रेनिंग देना, जरूरतमंदों को ना देखकर गैर जरूरतमंदों को योजना का लाभ दिया गया, छोटे से बड़े सभी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, सभी को अटैच कर जांच कराई जाएगी, अगर छोटे अधिकारी ने बड़े अधिकारी को सूचना नहीं दिए तो दोषी वह भी है, उसने बिना जांच और निरीक्षण किए कैसे उसका भुगतान कर दिया, अधिकारियों ने संज्ञान क्यों नहीं लिया, इसमें सारे अधिकारी दोषी हैं।







