सलखन/सोनभद्र. @बद्री प्रसाद….
— लेखपाल एवं कानूनगो ने नहीं किया खातों का विभाजन, झाड़ा अपने अधिकार से पल्ला, किसानों में जबरदस्त आक्रोश
— न्यायालय बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सोनभद्र को किसानों ने सौंपा शिकायती पत्र, लगायी न्याय की गुहार

रावर्ट्सगंज तहसील के ग्राम कम्हरियां,परगना अगोरी,जिला सोनभद्र के चकबंदी समिति के अध्यक्ष,सदस्यों एवं कृषको को ग्राम कम्हरियां का नई खतौनी (जोत चकबंदी आकार पत्र 11) तैयार कर बीते दिनांक 24 फरवरी 2026 को समय तकरीबन 11 बजे चकबंदी कर्ता कार्यालय,सहायक चकबंदी अधिकारी राबर्ट्सगंज (द्वितीय) सोनभद्र के आदेशानुसार ग्राम पंचायत केवटा स्थित पंचायत भवन पर पढ़कर सुनाते हुए किसानों को अपने-अपने खातों का सत्यापन करवाया गया।
सबसे मजेदार एवं आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि ग्राम कम्हरिया में चकबंदी विभाग के हीला हवाली एवं लापरवाही का नतीजा है कि कई खातों में शामिल सहखातेदारों को पुनः एक नया खाता बनाकर पुनः सहखातेदार बना दिया गया है जबकि सहखातेदारों का कहना है कि चकबंदी विभाग के संबंधित लेखपाल एवं कानूनगो के घोर हिलाहवाली एवं लापरवाही का नतीजा है कि सहखातेदारों का खातों का विभाजन नहीं किया गया है और उन्हें एक नया खाता बनाकर पुनः सहखातेदार बनाते हुए अपना पल्ला झाड़ लिए है।इससे किसानों में तीव्र आक्रोश देखने को मिल रहा है।
इस संबंध में न्यायालय श्रीमान बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी सोनभद्र को प्रेषित शिकायती पत्र में किसान कमला प्रसाद पुत्र स्व.जवाहिर लाल निवासी ग्राम महुआवं खुर्द,लालजी पुत्र रामप्यारे निवासी ग्राम केवटा, विनोद कुमार विश्वकर्मा पुत्र स्व.ओमप्रकाश निवासी केवटा व हालपता वार्ड नंबर 9गुरमा मारकुंडी समेत कुल 35 किसानों ने अपील अं० धारा-11 (1) उ० प्र० जोत चक० अधिकारी अधिनियम विरूद्ध निर्णय व आदेश न्यायालय चकबन्दी रावर्ट्सगंज, जनपद -सोनभद्र,वादसंख्या- 202554166663011645,अं० धारा-9क (2) उ० प्र० जोत चक० अधिनियम, सरकार बनाम लालमनि आदि, ता०फै0-15.12.2025 ई० बाबत मौजा कम्हरिया,रावर्ट्सगंज,परगना अगोरी, तहसील-जनपद- सोनभद्र करने रद्द वअन्य आधारों पर अपील के आधार यह है कि अवर न्यायालय द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश सरासर गलत, खिलाफ कानून व असल तथ्यों के विपरीत होने के कारण खण्डित किये जाने योग्य है।

मौजा कम्हरिया, परगना-अगोरी, तहसील- रावर्ट्सगंज, जनपद-सोनभद्र की आधार वर्ष खतौनी खाता संख्या-37, 38 व 40 में अंकित आराजियात के संक्रमणीय भूमिधर मालिक व काबिज दाखिल अन्य खातेदारों / उत्तरदातागण के साथ हम अपीलकर्तागण हैं और सभी खातेदार अपने-अपने अंश पर काबिज दाखिल चले आ रहे हैं।दौरान चकबन्दी कार्यवाही मौजे में पड़ताल के समय मौके पर खातेदारों द्वारा अंश को बताया गया।
जिसके अनुसार जोत चकबन्दी आकार पत्र-5 में खातेदारों के अंश का विवाद भी बनाया गया,किन्तु अवर न्यायालय ने प्रश्नगत निर्णय/आदेश द्वारा खातेदारो के अंश का विभाजन नही किया गया,बल्कि खाते की सम्पूर्ण भूमि को बिना विभाजन के ही संयुक्त खाता कर दिया गया।अवर न्यायालय के समक्ष ग्राम में सुनवाई के समय हम अपीलकर्तागण अपने अंश के बावत् बयान किया था और यथा सम्भव साक्ष्य भी प्रस्तुत किया था,किन्तु अवर न्यायालय ने प्रश्नगत निर्णय / आदेश पारित करने के पूर्व हमारे द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों का कोई अवलोकन नही किया और मनमाने ढंग से प्रश्नगत निर्णय/आदेश पारित कर दिया गया।
जो साक्ष्यों के विपरीत,अवर न्यायालय ने प्रश्नगत निर्णय/आदेश पारित करने के पूर्व अपने स्वस्थ्य न्यायिक मस्तिष्क का कत्तई प्रयोग नही किया और मनमाने ढंग से प्रश्नगत निर्णय / आदेश पारित किया है।अपीलकर्तागण कानून- कायदा से अनभिज्ञ गाँव-घर के कृषक व्यक्ति है।दिनांक-12.02.2026 को अपीलकर्तागण आधार वर्ष खतौनी खाता संख्या-37, 38 एवं 40 की सत्य प्रतिलिपि सहायक चकबन्दी अधिकारी कार्यालय से लिया तो खतौनी में प्रश्नगत आदेश का अमलदरामद देखकर अपीलकर्तागण काफी हैरान हो गये।अपील प्रस्तुत करने में हम अपीलकर्तागण द्वारा जान-बुझकर हिला-हवाली या विलम्ब नही किया गया है।
बल्कि वजह उपरोक्त के कारण ही नियत अवधि के अन्दर अपील नही योजित कर सके।अवर न्यायालय की पत्रावली तलब कर अपीलकर्तागण को भारतीय मियाद अधिनियम की दफा-5 का लाभ प्रदान कर देरी को क्षमा करके अवर न्यायालय द्वारा पारित प्रश्नगत निर्णय/आदेश दिनांक- 15.12.2025 ई० खण्डित करके खाते का विभाजन पक्षों के अंश के अनुसार किये जाने की मांग की है ताकि किसानों के साथ न्याय हो सके।