घोरावल/सोनभद्र. @विजय अग्रहरी….

गुप्तकाशी शिवद्वार धाम में बृहस्पतिवार को कलश यात्रा के साथ 7 दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान गंगा यज्ञ का शुभारंभ किया गया।सर्वप्रथम विधि विधान के साथ मंडप पूजा के बाद मुख्य यज्ञाचार्य पं. मनीष पांडेय, कथा चाचक श्रीराधे अच्युतानंद शुक्ल एवं यजमान राजेंद्र मिश्र के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने 121 कलशों में जल भर कर कलश यात्रा निकाली गई, जो गांव में भ्रमण के बाद पुनः यज्ञ मंडप में पहुँची।यहां आचार्यों द्वारा मंडप प्रवेश एवं यज्ञ देवता के पूजा कर कलशों की स्थापना की गई।
इस अवसर पर पं. मनीष पांडेय ने कहा कि यज्ञ मानव एवं सृष्टि के कल्याण का सर्वोत्तम साधन है। यज्ञ ही सब प्रकार से मनुष्यों समेत समस्त प्राणियों और संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा करता है। सृष्टि के आदिकाल से प्रचलित यज्ञ सबसे पुरानी पूजा पद्धति है। वेदों में अग्नि परमेश्वर के रूप में वंदनीय है। समस्त भुवन का नाभि केंद्र यज्ञ ही है।
यज्ञ की किरणों और आहुतियों के माध्यम से संपूर्ण वातावरण पवित्र व देवगम बनता है। यज्ञ साक्षात भगवान विष्णु का स्वरूप है। वेदों का संदेश है कि शाश्वत सुख और समृद्धि की कामना करने वाले मनुष्य यज्ञ को अपना नित्य कर्तव्य अवश्य समझें।यज्ञ लौकिक संपदा के साथ-साथ आध्यात्मिक संपदा की प्राप्ति का द्वार है। आयोजक ने बताया कि श्रीराधे अच्युतानंद शुक्ल द्वारा प्रतिदिन दोपहर बाद 1 बजे से सायं 4 बजे तक संगीतमय श्रीमद भागवत कथा सुनाई जाएगी।
वहीं 12 मार्च को कलश विसर्जन और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।इस अवसर पर विहिप नेता राजीव कुमार, ग्राम प्रधान सियाराम यादव, मोनू पाठक, पुजारी सुरेश गिरी, शिवराज गिरी, सुभाष गिरी, अजय गिरी, अखिलेश दुबे, यादवेंद्र शुक्ल, नीरज तिवारी, सौरभपति तिवारी, दिलीप इत्यादि मौजूद रहे।