बभनी/सोनभद्र. @अरुण पांडेय……
— मूल सुविधाओं के लिए ग्रामीण आज भी बाट जो रहे
— स्थानीय लोगों के गंभीर सवाल – जन प्रतिनिधियों व आलाधिकारियों के चेहरे पर चुप्पी क्यों?

बभनी विकास खंड के ग्राम पंचायत संवरा गांव में विकास के नाम पर आज भी वही तस्वीरें मिलेंगी जो आज ढाई दशक पहले थी, तीस वर्ष पहले जो सड़कें बनवाई गई थीं उन सड़कों कि गिट्टियां उखड़ चुकी हैं, सड़कें गड्ढों में तब्दील हो रही हैं लोगों को आने-जाने में केवल दुआओं के सहारे चलना पड़ता है, कुछ सड़कें निर्माणाधीन अवस्था में ही छोड़ दी गई हैं, जिनकी सोलिंग गिट्टियां भी उखड़ कर गायब हो चुकी हैं, गांव में कोई छठघाट नहीं बनवाया गया, पूजा-पाठ का कोई केंद्र नहीं बनवाया गया कोई पुलिया नहीं बनवाई गई, गांव में मनरेगा के तहत कभी भूमि सुधार का काम नहीं चला किसी बांध की झराई नहीं हुई।
गांव में तिराहों या चौराहों पर बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है, मोहल्लों में सीसी रोड बनवाए गए हैं वे भी उखड़ने लगे हैं, लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, सिंचाई कूप जमींदोज होने लगे हैं नदियों पर बनी बिछलियां टूट चुकी हैं, गांव में लोगों को कोई रोजगार नहीं जिसके कारण गांव के लोग बाहर अपनी दैनिक रोजमर्रा की चीजों के जुगाड़ में लगे होते हैं ।

गांव के लगभग 90 प्रतिशत आवास अधूरे हैं शौचालय अधूरे हैं बने भी हैं तो प्रयोग विहीन हैं, रात के समय गांव में अंधेरों का सन्नाटा पसरा होता है कोई स्ट्रीट लाईट नहीं है, हाई मास्क लाईट नहीं है रात के समय सड़कों पर चलना अपनी दुर्घटनाओं को दावत देना है, आएदिन लोग चोटिल होते रहते हैं स्वास्थ्य के लिए कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। यह लेख किसी कवि की कल्पना की आकांक्षाओं को दर्शाना नहीं बल्कि संवरा गांव में जमीनी स्तर की जांच कराई जाए तो हकीकत कुछ और बयां करेंगी।
जनता का सवाल – संवरा गांव की जनता यह सवाल पूछने को विवश है कि क्या यही विकास है? यही प्रतिनिधि हैं जो विश्वास हमारे विश्वास के साथ छल और भरोसे के साथ खिलवाड़ करते हैं?यदि गांव में विकास कार्य नहीं कराए जाते तो इसका जिम्मेदार कौन है? ब्लाक में बैठे अधिकारी किस विकास की जांच करते हैं? क्या गांव में कराए गए विकास कार्य की जांच केवल फाईलों तक ही सिमट कर रह जाती है स्थलीय निरीक्षण के लिए खंड विकास अधिकारी कभी स्थल पर पहुंचे हैं यदि पहुंचे हैं तो बनवाए गए सिंचाई कूप पुलिया बिछली सीसी रोड क्यों जर्जर अवस्था में हैं?
कुर्सी घोटाला मामले में सलाखों की सजा काट चुके ग्राम प्रधान
यदि स्थानीय लोगों की मानें तो विगत वर्ष पूर्व जब कुर्सी घोटाला का मामला सामने आया तब लगभग पांच पंचवर्षीय तक ग्राम प्रधान को सलाखों के पीछे सजा काटनी पड़ी। यदि ग्राम प्रधान के विकास कार्य में पारदर्शिता है तो इन्हें जेल क्यों जाना पड़ा? यदि किसी एक्सपर्ट टेक्निकल एजेंसी द्वारा विकास कार्य के गंभीर मुद्दों पर जांच कराई जाए तो पारदर्शिता सामने आ सकेगी।
जन प्रतिनिधियों व ब्लाक में बैठे अधिकारियों की चुप्पी
गांव के संभ्रांत लोगों का यह मानना है कि लंबे समय से प्रतिनिधित्व कर चुके ग्राम प्रधान की विकास कार्य में अनियमितता पर अधिकारियों व क्षेत्रीय प्रतिनिधियों की चुप्पी कहीं इस बात को लेकर किसी बात संशय तो नहीं कि दाल में नमक है या नमक में दाल? तथ्य प्रमाणित होने पर साझा किया जाएगा।
ब्लाक प्रमुख की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल
गांव के स्थानीय लोगों की मानें तो क्षेत्र के तेज-तर्रार व चर्चित ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि राजन सिंह जिनकी लोग विकास के क्षेत्र में काफी प्रशंसा करने से पीछे नहीं हटते आज वहीं सवंरा गांव के लोगों ने एक गंभीर सवाल खड़े कर दिए लोगों का दावा है कि ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि राजन सिंह जब बभनी ब्लाक के गांवों के विकास के लिए कई सुविधाएं मुहैया कराए तो पांच वर्षों के दौरान सवंरा गांव में उनका दर्शन दुर्लभ क्यों रहा? क्या उनके द्वारा संवरा गांव के विकास कार्य पर कोई सुध नहीं ली गई? यदि सुध ली गई तो विकास के नाम पर उदासीनता क्यों?