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‘म्हारी छोरियां छोरों से कम है के’ जमुई की बेटी 4 साल में बनी कराटे क्वीन, ब्लैक बेल्ट और 70 से अधिक पदक जीत रचा इतिहास

Admin by Admin
January 28, 2026
in खेल
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‘म्हारी छोरियां छोरों से कम है के’ जमुई की बेटी 4 साल में बनी कराटे क्वीन, ब्लैक बेल्ट और 70 से अधिक पदक जीत रचा इतिहास
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Last Updated:January 28, 2026, 13:03 IST

जूही ने मात्र चार साल में कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर अलग पहचान बनाई है. जूही के पिता मंटू प्रजापति पेशे से मजदूर हैं और जयपुर में रहकर मजदूरी करते हैं. उन्होंने बताया कि बेटी दिन में स्कूल जाती है और शाम को खेलों की प्रैक्टिस करती है. 

जमुई. महज 14 साल की उम्र में कोई क्या कुछ कर सकता है, अगर आपके मन में भी कभी यह सवाल आया है तो आपको जमुई के जूही की कहानी जाननी चाहिए. जिस उम्र में बच्चे पढ़ाई और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में जूही ने कराटे की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है, जिस तक पहुंचने में खिलाड़ियों को सालों लग जाते हैं. जूही ने मात्र चार साल के खेल करियर में कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर न सिर्फ सिमुलतला बल्कि पूरे बिहार राज्य का नाम रोशन किया है.

जूही के पिता मंटू प्रजापति ने बताया कि जूही इस समय राजस्थान के जयपुर में रहकर पढ़ाई कर रही है. पढ़ाई के साथ-साथ वह कराटे, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में भी लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है. उन्होंने बताया कि ब्लैक बेल्ट का यह सम्मान साईगोकाई कराटे डो एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सिहान तरुण चक्रवर्ती और राहा मेमोरियल कराटे एकेडमी के कोच सेंसई द्वारा दिया गया है. मंटू ने बताया कि जूही की मेहनत, अनुशासन और नियमित अभ्यास का ही परिणाम है कि इतनी कम उम्र में उसने यह बड़ी सफलता हासिल की है.

अब तक छह बार रह चुकी है राष्ट्रीय चैंपियन
मंटू प्रजापति ने बताया कि जूही अब तक छह बार राष्ट्रीय चैंपियन, दो बार इंडिया ओपन इंटरनेशनल चैंपियन और आठ बार राज्य स्तरीय चैंपियन रह चुकी है. अपने छोटे से खेल करियर में जूही ने अब तक 72 पदक अपने नाम किए हैं, जिनमें 50 स्वर्ण पदक शामिल हैं. यह आंकड़ा किसी भी अनुभवी खिलाड़ी के लिए गर्व का विषय हो सकता है, लेकिन जूही ने यह सब महज चार वर्षों में कर दिखाया है.

पिता जयपुर में करते हैं मजदूरी
जूही के पिता मंटू प्रजापति पेशे से मजदूर हैं और जयपुर में रहकर मजदूरी करते हैं. उन्होंने बताया कि बेटी दिन में स्कूल जाती है और शाम को खेलों की प्रैक्टिस करती है. सीमित संसाधनों के बावजूद वे अपनी बेटी के सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. उनका कहना है कि जूही का लक्ष्य आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर भारत के लिए मेडल जीतना है. जूही की इस सफलता से न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे जमुई जिले में खुशी और गर्व का माहौल है.

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Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें

First Published :

January 28, 2026, 13:03 IST

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