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Sonbhadra। आदिशक्ति माँ भगवती की आराधना का पावन पर्व शारदीय नवरात्रि रविवार से अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और वैदिक विधि-विधान के साथ प्रारंभ हो गया। नवरात्रि के प्रथम दिन कस्बे के ऐतिहासिक व सुप्रसिद्ध श्री माँ काली जी मंदिर में आस्था और भक्ति का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही माँ के प्रथम स्वरूप ‘माँ शैलपुत्री’ के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे संपूर्ण मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘जय माता दी’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।

स्वर्णिम आभा में निखरा दरबार, दिव्य श्रृंगार ने मोहा मन:
नवरात्र के पहले दिन मंदिर के गर्भगृह को रंग बिरंगे सुगंधित फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक तोरणद्वारों से अलौकिक रूप से सजाया गया। सुबह तड़के मुख्य पुरोहितों द्वारा माँ काली का पंचामृत स्नान कराकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य महाश्रृंगार किया गया। जैसे ही मंगला आरती के पश्चात मंदिर के पट खुले, माँ के दिव्य स्वरूप के दर्शन पाकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। घंटे-घड़ियाल, शंखध्वनि और धूप-दीप की सुगंध से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो गया।

नारियल-चुनरी अर्पित करने को उमड़ी भक्तों की भीड़:
भोर के 4 बजे से ही हाथ में नारियल, चुनरी, रोली, अक्षत और पूजा की थाली लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था, जो दोपहर तक अनवरत चलता रहा। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने कतारबद्ध होकर बारी-बारी से माँ के चरणों में मत्था टेका और परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में कई भक्तों ने दुर्गा सप्तशती का पाठ व दुर्गा चालीसा का जप भी किया।

सुरक्षा एवं दर्शन व्यवस्था रही चाक-चौबंद:
भक्तों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रबंधन समिति और स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखा। कतारबद्ध दर्शन कराने के लिए आयोजकों की टीम लगी रही । प्रथम दिन की इस भव्य शुरुआत से पूरे दुद्धी नगर में भक्ति और उत्सव का माहौल बन गया है, जो आगामी नौ दिनों तक इसी आस्था और उल्लास के साथ जारी रहेगा।