हिमाचल में बड़े आंदोलन की तैयारी है। सोमवार को सीटू और हिमाचल किसान सभा के आह्वान पर शिमला सहित 25 स्थानों पर प्रदर्शन हुआ। 26 नवंबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया गया है।
शिमला की सड़कों पर सोमवार को किसान और मजदूर संगठनों ने अपनी ताकत दिखाई। ‘खेती बचाओ, उद्योग बचाओ, भारत बचाओ’ के नारे के साथ सीटू और हिमाचल किसान सभा के आह्वान पर जेल भरो आंदोलन किया गया। शिमला में सैकड़ों लोग गिरफ्तारी देने के लिए रिपोर्टिंग रूम पहुंचे। करीब डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी हुई, लेकिन जिला प्रशासन ने किसी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार नहीं किया। आयोजकों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में शिमला के अलावा रामपुर, नाहन सहित करीब 25 जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर भी प्रदर्शन हुए, जिनमें हजारों लोग शामिल हुए।
तीन रैलियां निकलीं, रिपोर्टिंग रूम पर सभा
शिमला में आंदोलनकारियों ने जैन धर्मशाला, रिज मैदान और इवनिंग कॉलेज से तीन रैलियां निकालीं। तीनों रैलियां रिपोर्टिंग रूम पहुंचकर जनसभा में बदल गईं। यहां केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए गए। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने और आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया गया, लेकिन वे गिरफ्तारी देने की मांग पर डटे रहे। रामपुर और नाहन में चक्का जाम भी किया गया।
लेबर कोड और ट्रेड डील का विरोध
प्रदर्शन में सीटू, हिमाचल किसान सभा, सेब उत्पादक संघ, पेंशनर एसोसिएशन, एसएफआई, जनवादी महिला समिति, डीवाईएफआई, एआईएलयू, दलित शोषण मुक्ति मंच और शिमला नागरिक सभा सहित कई संगठन शामिल हुए।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध
संगठनों ने चार लेबर कोड, यूरोपीय संघ और इंग्लैंड के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया। महंगाई, बेरोजगारी, तहबाजारी हटाने, नई शिक्षा नीति और आउटसोर्स नीति के मुद्दे भी उठाए गए। संसद और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने तथा पेपर लीक आंदोलनों में छात्रों और युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की गई।
26 नवंबर से देशव्यापी लड़ाई का ऐलान
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, कोषाध्यक्ष जगत राम, सेब उत्पादक संघ प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर और हिमाचल किसान सभा नेता संदीप वर्मा ने कहा कि 10 अगस्त का आंदोलन आगे के बड़े संघर्ष की तैयारी है। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर 2026 से देशभर में ‘खेती बचाओ, उद्योग बचाओ और भारत बचाओ’ के नारे के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
लेबर कोड को बताया मजदूर विरोधी
नेताओं ने कहा कि 26 नवंबर 2020 को शुरू हुए किसान-मजदूर आंदोलन की तरह इस बार भी किसान और मजदूर एकजुट होकर संघर्ष करेंगे। संगठनों का कहना है कि चार लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। मुक्त व्यापार समझौतों से खेती और उद्योगों पर भी असर पड़ेगा। इससे हिमाचल की सेब और फल अर्थव्यवस्था को भी खतरा है।
क्या उठाई मांगे?
संगठनों ने चार लेबर कोड रद्द करने, मजदूरों को कम से कम 42 हजार रुपये महीने मजदूरी, सभी फसलों के लिए सी2+50 प्रतिशत के आधार पर कानूनी एमएसपी और सरकारी खरीद की गारंटी की मांग की। यही नहीं मनरेगा में 200 दिन काम और 700 रुपये दैनिक मजदूरी, किसानों की कर्ज माफी तथा आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी रखी गई। इसके साथ ही बिजली का निजीकरण रोकने, प्री-पेड स्मार्ट मीटर वापस लेने, राज्यों का डिविजिबल पूल में हिस्सा 31 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग उठाई गई।










