नई दिल्ली. भारतीय खेल इतिहास के पन्नों में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. देश की प्रतिभावान जिम्नास्ट अरिहा पंगमबम ने एशियन एयरोबिक जिम्नास्टिक चैंपियनशिप में वरिष्ठ व्यक्तिगत महिला वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है. वह इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत को पहला ऐतिहासिक गोल्ड मेडल दिलाने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बन गई हैं. इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न केवल भारतीय जिम्नास्टिक को नई पहचान दी है, बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है.
मणिपुर की रहने वाली 22 वर्षीया अरिहा पंगमबम (Ariha Pangambam) ने प्रतियोगिता के फाइनल में अपने अविश्वसनीय संतुलन, फुर्ती और कलात्मकता से जजों को मंत्रमुग्ध कर दिया. उन्होंने शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए कुल 19.100 का शानदार स्कोर दर्ज किया. जिम्नास्टिक के तीनों मानकों में अरिहा का प्रदर्शन बेमिसाल रहा. भारतीय जिम्नास्ट ने फाइनल में 19.100 के स्कोर के साथ पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया और इस प्रतियोगिता में भारत का पहला स्वर्ण पदक जीता. अरिहा ने ‘आर्टिस्ट्री’ के लिए 8.650, ‘एक्ज़ीक्यूशन’ के लिए 7.600 और ‘डिफ़िकल्टी’ के लिए 2.850 अंक हासिल करके खिताब अपने नाम किया. इन शानदार अंकों के साथ उन्होंने पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया और भारत को इस स्पर्धा में उसका पहला गोल्ड मेडल दिलाया.
अरिहा गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनीं.
अतीत की निराशाओं से लेकर स्वर्ण तक का सफर
अरिहा की यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं है, बल्कि सालों के कड़े संघर्ष, निरंतरता और कभी न हार मानने वाले जज्बे का सुखद परिणाम है. इससे पहले, वह 2022 और 2024 की एशियाई चैंपियनशिप में बेहद मामूली अंतर से पदक से चूक गई थीं और दोनों बार उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था. अपनी पिछली असफलताओं से निराश होने के बजाय अरिहा ने उन्हें अपनी ताकत बनाया. राष्ट्रीय स्तर पर वे अपनी धाक पहले ही जमा चुकी थीं 2023 और 2025 के राष्ट्रीय खेलों में वे स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं और कई बार की राष्ट्रीय चैंपियन भी रही हैं. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस जीत ने उनके करियर को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है.
‘जिम्नास्टिक मेरी जिंदगी की भाषा बन चुका है’
इस ऐतिहासिक जीत के बाद अरिहा ने मणिपुर के स्थानीय मैदानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक के अपने लंबे सफर को याद किया. उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंकडेन पर एक भावुक पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा कि जिम्नास्टिक अब उनके लिए ‘सिर्फ एक खेल या अनुशासन नहीं रह गया है, बल्कि यह उनकी जिंदगी की भाषा बन चुका है.’ अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने अपने कोच युमनाम रंजन सिंह (Yumnam Ranjan Singh) को दिया. अरिहा ने माना कि स्थानीय प्रतियोगिताओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की उनकी यह यात्रा लगातार सीखने, कड़ी मेहनत और उनके कोच के मार्गदर्शन पर टिकी रही है.
खेल प्रबंधन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने का लक्ष्य
मैदान पर इतिहास रचने वाली अरिहा केवल एक बेहतरीन एथलीट ही नहीं हैं, बल्कि वे खेल के भविष्य को लेकर भी बेहद सतर्क और दूरदर्शी हैं. वर्तमान में वह AISTS India से पोस्ट-ग्रेजुएट सर्टिफिकेट (Post-Graduate Certificate) की पढ़ाई कर रही हैं. यहाँ वे ‘स्पोर्ट्स लीडरशिप’ और ‘स्पोर्ट्स मैनेजमेंट’ के गुण सीख रही हैं. उनका लक्ष्य भविष्य में एथलीटों के विकास और खेल प्रबंधन में अपना अहम योगदान देना है.
खेल जगत से मिली सराहना
अरिहा की इस अविश्वसनीय सफलता पर जिम्नास्टिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (GFI) के अध्यक्ष सुधीर मित्तल ने उन्हें और उनके कोच को बधाई दी. उन्होंने अरिहा के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है. अरिहा ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया. इस ऐतिहासिक पल के लिए अरिहा और उनके कोच को बहुत-बहुत बधाई.’
अंतरराष्ट्रीय अनुभव का मिला फायदा
अरिहा इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करती रही हैं. उन्होंने एफआईजी एयरोबिक जिम्नास्टिक वर्ल्ड चैंपियनशिप जापान में आयोजित सुजुकी वर्ल्ड कप (Suzuki World Cup) और एशियाई चैंपियनशिप के पिछले कई संस्करणों में तिरंगे का प्रतिनिधित्व किया है.
भारतीय खेल जगत के लिए एक नया सवेरा
अरिहा पंगमबम की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत में एयरोबिक जिम्नास्टिक के बढ़ते कद का भी प्रतीक है. क्रिकेट और अन्य पारंपरिक खेलों के प्रभुत्व वाले देश में, मणिपुर की इस बेटी ने जिम्नास्टिक जैसे कठिन खेल में नया इतिहास लिखकर देश की हजारों युवा महिला एथलीटों को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की एक नई राह दिखाई है.








