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Maheshwari Chauhan Asian Games 2026 Bronze | माहेश्वरी चौहान ने जीता कांस्य

Admin by Admin
October 4, 2026
in खेल
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Maheshwari Chauhan Asian Games 2026 Bronze | माहेश्वरी चौहान ने जीता कांस्य


Last Updated:October 04, 2026, 08:03 IST

Maheshwari Chauhan Asian Games 2026 Bronze: राजस्थान की स्टार शूटर माहेश्वरी चौहान ने एशियन गेम्स 2026 में महिला स्कीट टीम इवेंट में भारत के लिए कांस्य पदक जीता है. जालौर के सियाणा गांव से सफर शुरू करने वाली माहेश्वरी ने पेरिस ओलंपिक में मामूली अंतर से पदक चूकने के बाद शानदार वापसी की. शादी के बाद राजसमंद के केलवा शूटिंग रेंज और उदयपुर में घंटों अभ्यास कर उन्होंने अपनी तकनीक को निखारा. ससुर राघवेंद्र सिंह राठौड़ और परिवार के सहयोग से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया. उनकी यह सफलता मेहनत, लगन और असफलता से न हारने के जज्बे की अनूठी मिसाल है.

ख़बरें फटाफट

Udaipur: राजस्थान के छोटे से गांव सियाणा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग रेंज तक का सफर तय करने वाली निशानेबाज माहेश्वरी चौहान ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है. पेरिस ओलंपिक में मामूली अंतर से पदक चूकने की निराशा को पीछे छोड़ते हुए माहेश्वरी ने एशियन गेम्स 2026 में भारत का परचम लहराया है. जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में माहेश्वरी चौहान ने महिला स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम कर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है. उनकी इस ऐतिहासिक जीत में भारतीय टीम की साथी खिलाड़ी राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल का भी अहम योगदान रहा. भारतीय त्रिमूर्ति ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए 331 अंकों का संयुक्त स्कोर हासिल किया और पोडियम पर अपनी जगह पक्की की. इस प्रतियोगिता में चीन की टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि कजाकिस्तान ने रजत पदक पर कब्जा जमाया.

माहेश्वरी चौहान का जन्म और शुरुआती जीवन राजस्थान के जालौर जिले के सियाणा गांव में बीता. निशानेबाजी के प्रति उनका रुझान बचपन से ही देखने को मिला, जिसे उनके परिवार ने समय रहते पहचाना. उन्हें इस खेल का प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने दादा गणपत सिंह और पिता प्रदीप सिंह चौहान से प्राप्त हुआ. बेटी की असाधारण प्रतिभा और जुनून को देखते हुए पिता प्रदीप सिंह ने गांव में ही एक समर्पित शूटिंग रेंज तैयार करवा दी थी. इसी गांव की मिट्टी और घरेलू शूटिंग रेंज पर दिन-रात अभ्यास करते हुए माहेश्वरी की निशानेबाजी की नींव मजबूत हुई. अपनी अटूट मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उन्होंने राज्य, राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी धाक जमानी शुरू की.

पेरिस ओलंपिक का झटका और वापसी का जज्बा
हर महान एथलीट के जीवन में कठिन दौर आते हैं और माहेश्वरी के करियर में भी पेरिस ओलंपिक एक बड़ा मोड़ साबित हुआ. पेरिस ओलंपिक के दौरान वह बेहद मामूली अंतर से पदक तालिका से बाहर रह गई थीं. महज कुछ अंकों के फासले से मेडल चूक जाना किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक रूप से तोड़ देने वाला क्षण होता है. लेकिन माहेश्वरी ने इस असफलता को निराशा में बदलने के बजाय अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. उन्होंने इस हार से सीख ली और अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए पहले से दोगुनी शिद्दत से मेहनत शुरू कर दी. पेरिस की इस टीस ने उनके भीतर एशियन गेम्स में देश को मेडल दिलाने का नया संकल्प भर दिया.

उदयपुर और राजसमंद बने अभेद्य तैयारी के केंद्र
ओलंपिक के बाद माहेश्वरी चौहान के खेल सफर में मेवाड़ का उदयपुर संभाग एक बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभरा. शादी के बाद भी उनके खेल का सिलसिला थमा नहीं, बल्कि उसे और नया आयाम मिला. राजसमंद के केलवा स्थित शूटिंग रेंज में माहेश्वरी ने लगातार घंटों अभ्यास किया. केलवा की शूटिंग रेंज पर उन्होंने अपनी तकनीक, एकाग्रता और निशाने की सटीकता को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला. इस दौरान उनके परिवार और ससुराल पक्ष से उन्हें अभूतपूर्व सहयोग मिला. माहेश्वरी के ससुर राघवेंद्र सिंह राठौड़ स्वयं राजसमंद राइफल एसोसिएशन से सक्रिय रूप से जुड़े हैं. इस खेल पृष्ठभूमि के कारण उन्हें घर पर ही पूरी तरह से अनुकूल और प्रोत्साहन देने वाला माहौल मिला.

एशियन गेम्स में पोडियम तक पहुंची मेहनत
उदयपुर और राजसमंद की शूटिंग रेंज में बहाए गए पसीने का सुखद परिणाम आइची-नागोया एशियन गेम्स में पूरी दुनिया के सामने आया. माहेश्वरी चौहान का यह कांस्य पदक केवल एक खेल उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, दृढ़ संकल्प और असफलता के बाद उठ खड़े होने का एक जीवंत उदाहरण है. सियाणा गांव की पगडंडियों से शुरू होकर एशियन गेम्स के पोडियम तक का यह सफर राजस्थान की लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है. माहेश्वरी की यह सफलता साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार का सम्बल मिले, तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती. आज उनके गांव सियाणा से लेकर राजसमंद और पूरे राजस्थान में जश्न का माहौल है.

About the Author

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Location :

Udaipur,Udaipur,Rajasthan

First Published :

October 04, 2026, 08:03 IST



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