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Who is Soman Rana: समान राण ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों के शॉट पुट एफ57 इवेंट में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिलाया. सोमन ने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का विनिंग थ्रो किया. उन्होंने 13.38 मीटर के शुरुआती थ्रो के साथ शानदार शुरुआत की. इसके बाद अपने दूसरे प्रयास में गोल्ड मेडल दिलाने वाले 13.40 मीटर के थ्रो तक सुधार किया. तीसरा प्रयास फाउल रहा, जबकि बचे थ्रो क्रमश: 13.14 मीटर, 13.17 मीटर और 13.11 मीटर के थे. हालांकि, दूसरे प्रयास का थ्रो पोडियम पर उन्हें पहला स्थान दिलाने के लिए काफी साबित हुआ.
सोमन राणा की नेशनल बॉक्सर से लेकर शॉट पुट हीरो बनने तक की कहानी.
नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जब भारत के सोमन राणा ने शॉट पुट F57 में गोल्ड मेडल जीता तो यह सिर्फ एक जीत नहीं थी. यह उस सैनिक की जीत थी, जिसने देश की रक्षा करते हुए अपना पैर खो दिया, लेकिन अपने हौसले को कभी टूटने नहीं दिया. सोमन राणा ने अपने दूसरे प्रयास में 13.40 मीटर का थ्रो किया, जिसके कोई नजदीक भी नहीं पहुंच पाया. कभी बॉक्सिंग रिंग में मुक्के बरसाने वाला यह खिलाड़ी आज शॉट पुट में भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर रहा है. हालांकि, उनकी कामयाबी की यह कहानी इतनी आसान नहीं रही. उनकी कहानी बताती है कि मुश्किलें रास्ता रोक सकती हैं, लेकिन मंजिल नहीं छीन सकतीं. चलिए जानते हैं सोनम राणा के नेशनल बॉक्सर से लेकर शॉट पुट हीरो बनने के सफर के बारे में.
बिहार से सेना तक… खेल हमेशा रहा जिंदगी का हिस्सा
16 जनवरी 1983 को बिहार में जन्मे सोमन राणा बचपन से ही खेलों के प्रति जुनूनी थे. भारतीय सेना की 2nd Battalion, 8 Gorkha Rifles में भर्ती होने के बाद भी उनका यह जुनून कम नहीं हुआ. उस समय उनकी पहचान एक बेहतरीन बॉक्सर के रूप में थी. वह सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की ओर से मिडिलवेट वर्ग में खेलते थे. साल 2005 की सीनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया. इस दौरान उन्होंने भारत के दिग्गज मुक्केबाज विजेंदर सिंह जैसे खिलाड़ियों के साथ भी ट्रेनिंग की.
एक धमाका, जिसने बदल दी जिंदगी
दिसंबर 2006, जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में सेना का सर्च ऑपरेशन चल रहा था. इसी दौरान सोमन राणा का पैर एक लैंडमाइन पर पड़ गया. धमाका इतना जबरदस्त था कि उनका दाहिना पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा. एक झटके में उनका बॉक्सिंग करियर खत्म हो गया. जिस खिलाड़ी ने देश के लिए बड़े सपने देखे थे, उसे अब अपनी नई जिंदगी के बारे में सोचना पड़ रहा था.
10 साल तक लगा सब खत्म हो चुका है
इलाज के बाद सोमन पुणे स्थित आर्मी रिहैबिलिटेशन सेंटर पहुंचे. वहां से ठीक होने के बाद उन्होंने करीब 10 साल तक सेना में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं. उन्हें लगने लगा था कि अब उनका खिलाड़ी वाला जीवन हमेशा के लिए खत्म हो चुका है. लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था. साल 2017 में सेना के अधिकारी कर्नल गौरव दत्ता ने सोमन को पुणे स्थित आर्मी पैरालंपिक नोड से जोड़ा. यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया.
2017 में मिली नई राह, शॉट पुट ने बदल दी तकदीर
सोमन ने पैरा शॉट पुट को चुना. उन्हें लगा कि बॉक्सिंग में मुक्का मारने की जो तकनीक उन्होंने वर्षों तक सीखी है, वही ताकत और शरीर का संतुलन शॉट पुट में भी काम आ सकता है. F57 वर्ग में बैठकर शॉट पुट फेंकने की तकनीक उन्होंने तेजी से सीखी और कुछ ही समय में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली.
सोमन राणा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीता.
दो पैरालंपिक, एशियन गेम्स और फिर दुनिया में पहचान
पैरा एथलेटिक्स में आने के बाद सोमन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2019 से उन्होंने भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करना शुरू किया. 2021 में ट्यूनिस में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद 2022 एशियन पैरा गेम्स में पुरुष F57 शॉट पुट में रजत पदक हासिल किया. उन्होंने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि दोनों बार वह पदक से बेहद करीब रहकर चौथे और पांचवें स्थान पर रहे.
2025 में मिला करियर का सबसे बड़ा इनाम
सोमन राणा के करियर का सबसे यादगार पल 2025 विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में आया. नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतियोगिता में उन्होंने 14.69 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए कांस्य पदक जीता. यह उनके करियर का पहला विश्व चैंपियनशिप पदक था और यहीं से उन्होंने खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पैरा शॉट पुट खिलाड़ियों में शामिल कर लिया.
कॉमनवेल्थ गेम्स में पूरा हुआ गोल्ड का सपना
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में सोमन राणा शानदार लय में पहुंचे थे. उन्होंने पहले राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और फिर ग्लासगो में भी अपना दबदबा कायम रखा. पुरुष F57 शॉट पुट फाइनल में उन्होंने 13.40 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया. खास बात यह रही कि भारत के शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर इस स्पर्धा में भारत को डबल पोडियम भी दिलाया. आज सोमन राणा सिर्फ भारत के लिए मेडल्स जीतने वाले खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो मुश्किल हालात में भी हार मानने के बजाय नई शुरुआत करने का साहस रखते हैं.
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परिचय
शिवम उपाध्याय एक खेल पत्रकार हैं, जो नवंबर 2025 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं. क्रिकेट उनकी विशेषज्…
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