एनसीपीआई सांसद सायोनी घोष ने संसद नहीं चलने देने के लिए विपक्ष को धोना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि सदन चलने दो, फिर जो कहना है, जो आरोप लगाना है, जो सुझाव देना है, वह सब कर सकते हैं।
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस से बगावत करके काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुईं सांसद सायोनी घोष ने संसद को नहीं चलने देने के लिए विपक्ष के पुराने साथियों पर हमला बोला है। केंद्र सरकार की तरफ से खुलकर बोलते हुए जाधवपुर की सांसद सायोनी घोष ने पेपर लीक रोकने वाले बिल पर चर्चा को जरूरी बताया और कहा कि देश के युवाओं को जानना चाहिए कि इसमें क्या प्रावधान है, सरकार क्या सुधार करना चाहती है। घोष ने कहा कि पहले विपक्ष कह रहा था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के बाद चर्चा करेंगे तो अब सदन को चलने देना चाहिए। माना जा रहा था कि बिल पर अगर लोकसभा में चर्चा होती है तो अपनी पार्टी की तरफ से सायोनी घोष पक्ष रख सकती हैं।
लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित होने के बाद सायोनी घोष ने संसद परिसर में समाचार एजेंसियों से बातचीत में कहा- ‘पहले बोल रहे थे कि धर्मेद्र प्रधान इस्तीफा देंगे, उसके बाद चर्चा करेंगे। इस्तीफा हो गया है और आज भी वो चर्चा करने से नाराज हैं। ये एक महत्वपूर्ण बिल है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि देश के युवा, छात्र-छात्रा दोनों का पक्ष सुनें। एक स्वस्थ चर्चा हो, बहस हो, सुझाव आए, जिस पर सरकार अमल करे। एक स्वस्थ लोकतंत्र को संसद के अंदर बचाए रख सकते हैं।’ सुबह भी सायोनी ने कहा था कि हम चाहते हैं कि चर्चा हैं, विपक्ष से सहयोग की उम्मीद है। पीएम नरेंद्र मोदी ने और सरकार ने जो कदम उठाए हैं, जिस तरह युवाओं की आवाज सुनी गई, वह स्वागत योग्य कदम है। चर्चा आगे बढ़े और सकारात्मक बहस हो।
सायोनी ने विपक्ष के सांसदों से सदन को चलने देने की अपील करते हुए कहा- ‘मैं उम्मीद करती हूं कि विपक्ष सदन को चलने दे। एक सप्ताह हो गया है। सदन नहीं चल रहा है। करदाताओं का पैसा है। हर मिनट कीमती है। हर दिन सदन को स्थगित करवाना और सदन के काम में बाधा पैदा करना ठीक नहीं है। आपको जो भी कहना है, जो भी सुझाव देना है, जो भी आरोप लगाना है, वो आप चर्चा के जरिए कर सकते हैं। देश को जानना चाहिए कि नए बिल में क्या है, क्या सुधार हम करना चाहते हैं। विपक्ष चर्चा करे, बहस करे, सदन को चलने दे।’
नरेंद्र मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए और कड़े कानून के लिए एक विधेयक पेश किया है। सरकार और स्पीकर ने चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण ऐसा हो नहीं सका। विपक्ष छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों के मुद्दे को उठाना चाहता है। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी बिहार समेत कई राज्यों में प्रदर्शन के दौरान उपद्रव के आरोप में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी को सरकार की वादाखिलाफी बताया है और फिर आंदोलन करने की धमकी दी है।







