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Who is Rishikant Singh: मणिपुर के इम्फाल वेस्ट से ताल्लुक रखने वाले और इंडियन आर्मी के स्पोर्ट्स सेटअप में खुद को तराशने वाले ऋषिकांत सिंह भारत के सबसे भरोसेमंद वेटलिफ्टर्स में से एक हैं. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुषों की 60 क्रिगा स्पर्धा में स्नैच में 121kg उठाकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए उन्होंने देश के लिए रजत पदक जीता. 271kg के पर्सनल बेस्ट स्कोर और नेशनल रिकॉर्ड के साथ ऋषिकांत का यह सफर भारतीय वेटलिफ्टिंग में अनुशासन, मेहनत और नए कीर्तिमान की मिसाल है.
ऋषिकांत सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता सिल्वर मेडल.
नई दिल्ली. मणिपुर की लाल मिट्टी से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के मंच पर भारत का परचम लहराने वाले ऋषिकांत सिंह आज देश के सबसे भरोसेमंद और प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर्स में से एक हैं. इम्फाल वेस्ट के रहने वाले ऋषिकांत ने राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 60 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में अपने ऐतिहासिक प्रदर्शन से न सिर्फ सिल्वर मेडल अपने नाम किया, बल्कि भारत का मान भी पूरी दुनिया में बढ़ाया. सेना के अनुशासित माहौल से निखरकर देश के शीर्ष एथलीटों की कतार में शामिल होने वाले ऋषिकांत की यह सफलता उनकी सालों की कड़ी मेहनत, समर्पण और कभी न हार मानने वाले जज्बे की कहानी बयां करती है.
मणिपुर का इम्फाल वेस्ट क्षेत्र भारत को कई बेहतरीन एथलीट देने के लिए जाना जाता है, और ऋषिकांत सिंह चानमबम (Rishikanta Singh Chanambam) इसी परंपरा का एक चमकता हुआ सितारा हैं. ऋषिकांत के खेल करियर को सही दिशा तब मिली, जब उन्होंने इंडियन आर्मी के स्पोर्ट्स सेटअप में ट्रेनिंग शुरू की. सेना के सख्त अनुशासन और बेहतरीन ट्रेनिंग सुविधाओं ने उनके कौशल को तराशने में अहम भूमिका निभाई. सेना के स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का हिस्सा बनने के बाद ऋषिकांत ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अपनी तकनीक को मजबूत करते हुए उन्होंने खुद को भारत के सबसे भरोसेमंद ‘लाइटवेट’ वेटलिफ्टर्स के रूप में स्थापित किया. छोटे कद और सटीक तकनीक के साथ भारी वजन उठाने की उनकी क्षमता ने उन्हें बहुत जल्द राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला दी.
कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक डेब्यू और वापसी
ऋषिकांत सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली बार बड़ा धमाका साल 2022 में किया था. बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने पुरुषों के 55 किलोग्राम भारवर्ग में अपना डेब्यू किया था. भले ही वहां का अनुभव उनके लिए सीखने का जरिया बना, लेकिन इसके बाद ऋषिकांत ने अपने खेल और वजन वर्ग दोनों में बड़ा बदलाव किया. 2022 के बाद ऋषिकांत ने 60 किलोग्राम वर्ग में अपनी दावेदारी मजबूत की और ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे. अपनी वेट कैटेगरी में मौजूदा कॉमनवेल्थ चैंपियन और भारत के सबसे मजबूत लिफ्टर के तौर पर उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों के मंच पर अपनी शानदार वापसी दर्ज की.
रिकॉर्ड्स और करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने से पहले ऋषिकांत लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे थे. 2024 नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में ऋषिकांत ने 61kg कैटेगरी में स्नैच में 124 किलोग्राम का वजन उठाकर नया नेशनल रिकॉर्ड अपने नाम किया था. 2025 कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप ऋषिकांत के करियर का सबसे यादगार पल साबित हुई. अहमदाबाद में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता और साथ ही नया नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया. इस चैंपियनशिप में उन्होंने 271 किलोग्राम (120kg स्नैच + 151kg क्लीन एंड जर्क) का अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ कुल स्कोर बनाया. इसी प्रदर्शन ने ग्लासगो गेम्स के लिए उनका टिकट पक्का किया था.
2025 वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में दुनिया के शीर्ष एथलीटों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए ऋषिकांत ने 60kg वर्ग में कुल 269 किलोग्राम वजन उठाया और वैश्विक स्तर पर 11वां स्थान हासिल कर भारत का नाम रोशन किया. राष्ट्रमंडल खेलों की पुरुषों की 60 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा बेहद रोमांचक रही. ऋषिकांत सिंह ने मैच की शुरुआत धमाकेदार तरीके से की. स्नैच राउंड में ऋषिकांत का प्रदर्शन बेमिसाल रहा. उन्होंने अपने पहले प्रयास में 116 किग्रा वजन सफलतापूर्वक उठाया. इसके बाद आत्मविश्वास से भरते हुए उन्होंने दूसरे प्रयास में 119 किग्रा और अंतिम प्रयास में 121 किग्रा वजन उठाकर खेलों का नया रिकॉर्ड (Games Record) स्थापित कर दिया. स्नैच के बाद वे स्वर्ण पदक की दौड़ में सबसे आगे चल रहे थे.
क्लीन एंड जर्क का संघर्ष
क्लीन एवं जर्क राउंड में मुकाबला बेहद कड़ा हो गया. ऋषिकांत ने अपने पहले प्रयास में 143 किग्रा वजन आसानी से उठा लिया. हालांकि, स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए उन्होंने दूसरे प्रयास में 148 किग्रा और तीसरे प्रयास में 151 किग्रा वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके. इस तरह ऋषिकांत ने स्नैच (121kg) + क्लीन एंड जर्क (143kg) को मिलाकर कुल 264 किलोग्राम भार उठाया और भारत के लिए रजत पदक (Silver Medal) हासिल किया. ऋषिकांत सिंह चानमबम भले ही बहुत मामूली अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए हों, लेकिन स्नैच में नया रिकॉर्ड बनाकर और देश के लिए रजत पदक जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि भारतीय वेटलिफ्टिंग का भविष्य बेहद सुरक्षित और चमकदार हाथों में है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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