दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के केस में अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 को दोषी करार दिया है। फैसला सुनते ही ताहिर रो पड़े। सरकारी वकील ने इसे समाज की हार करार दिया।
दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने जैसे ही ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया वह फूट-फूटकर रोने लगा। उसकी वकील ने उसे ढांढस बंधाया। ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने कहा कि बेशक हम इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करेंगे।
फैसले को चुनौती देगा ताहिर हुसैन
ताहिर हुसैन की वकील तारा नरूला ने कहा कि इस फैसले से अंकित शर्मा के परिवार और ताहिर हुसैन दोनों को न्याय नहीं मिला। हम निराश हैं। हमने इस केस को बहुत अच्छी तरह से लड़ा। हम फैसले को चुनौती देंगे। वहीं जिन छह लोगों को बरी किया गया है उनका मामला बहुत मजबूत था। इसे अदालत ने भी माना… वहीं सरकारी वकील मधुकर पांडे ने कहा कि यह फैसला किसी पक्ष की जीत नहीं है। इसमें समाज की हार हुई है।
फैसले ने ताजा कर दी दर्दनाक यादें
वहीं इस फैसले से आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा के परिजन को कुछ राहत तो मिली है लेकिन खालीपन का गहरा एहसास अब भी उन्हें परेशान कर रहा है। अंकित के भाई ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर कहा कि इस फैसले के साथ दर्दनाक यादें भी ताजा हो गई हैं। हमें दुख है, गुस्सा है और एक ऐसा खालीपन है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकता है। कोई भी फैसला अंकित को वापस नहीं ला सकता है।
ड्यूटी पर थे अंकित शर्मा
अंकित के भाई ने कहा- मेरे भाई को उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने हालात का जायजा लेने के लिए भेजा था। उनकी क्या गलती थी? वह तो बस अपना फर्ज निभा रहे थे। हमें लगता है कि उन्हें उनके धर्म की वजह से निशाना बनाया गया और यह दर्द हर पल हमारे साथ रहेगा।
खुद को बताया था दिल्ली पुलिस का अधिकारी
अंकित के भाई ने आगे कहा कि मेरे भाई जब ड्यूटी पर थे तब उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। वह देश की सेवा कर रहे थे। आईबी के अधिकारी आम तौर पर अपनी पहचान जाहिर नहीं करते हैं। यही कारण है कि उन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया था। फिर भी दंगाइयों ने उनको नहीं बख्शा और बेरहमी के साथ उनकी हत्या कर दी थी। उनकी डेड बॉडी पर चाकू और अन्य हथियारों से हमलों के 51 जख्म थे। घातक वार से फेफड़े फट गए थे।
फांसी ना मिलने तक इंसाफ अधूरा
अंकित के भाई ने आगे कहा कि परिवार 5 आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के लिए हम अदालत के आभारी हैं लेकिन असली न्याय तब होगा, जब हत्या में शामिल सभी लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। हम चाहते हैं कि दोषियों को सबसे कठोर सजा मिले। आज सिर्फ कुछ लोगों को दोषी ठहराया गया है। हम चाहते हैं कि भाई की हत्या में शामिल हर एक को सजा मिले… उन्हें फांसी होनी चाहिए। फांसी ना मिलने तक इंसाफ अधूरा है।
शादी के सपने संजो रहे थे अंकित
अंकित के भाई ने कहा कि मेरे भाई का जन्मदिन दो फरवरी को था और उसके कुछ ही दिन बाद हमने उनको खो दिया। वह युवा थे, सपनों से भरे थे और शादी करने के बारे में सोच रहे थे। उस दिन के बाद हमारे पूरे परिवार का भविष्य हमेशा के लिए बदल गया।
परिवार ने छोड़ दी थी दिल्ली, अब किराए के मकान में गुजारा
अंकित के परिजनों ने कहा कि घटना के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई थी। घटना के कुछ ही महीनों के भीतर हमने दिल्ली छोड़ दिया। इस घटना के बाद हमें वहां रहना सुरक्षित महसूस नहीं हुआ। अब हम यूपी में किराये के एक मकान में रहते हैं। हमारी जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है। अंकित के परिजनों ने कहा कि आज भी हमारे साथ दिल्ली दंगे की उस दहशतगर्दी के खौफ का एहसास परेशान करता रहता है।







