फीफा वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल करने वाले छह खिलाड़ियों में से 5 खिलाड़ी अब भी मैदान में बने हुए हैं जिससे ‘गोल्डन बूट’ हासिल करने की दौड़ रोचक बन गई है। मेस्सी और एमबाप्पे ने आठ-आठ गोल किए हैं।
मौजूदा फीफा वर्ल्ड कप में सर्वाधिक गोल करने वाले छह खिलाड़ियों में से 5 खिलाड़ी अब भी मैदान में बने हुए हैं जिससे ‘गोल्डन बूट’ हासिल करने की दौड़ रोचक बन गई है। अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे ने आठ-आठ गोल किए हैं और वह ‘गोल्डन बूट’ हासिल करने की दौड़ में सबसे आगे हैं। इन दोनों खिलाड़ियों के बीच विश्व कप करियर में सर्वाधिक गोल करने का रिकॉर्ड बनाने के लिए भी रोचक जंग चल रही है। मेस्सी ने अभी तक सभी विश्व कप में कुल मिलाकर 21 गोल किए हैं जबकि एमबाप्पे के नाम पर 20 गोल दर्ज हैं।
मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में इन दोनों के बाद नॉर्वे के एर्लिंग हालैंड का नंबर आता है जिन्होंने सात गोल किए हैं लेकिन उनकी टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई है।
इसके अलावा इंग्लैंड के जूड बेलिंगहम और हैरी केन भी दौड़ में हैं। इन दोनों ने छह-छह गोल किए हैं। फ्रांस के औस्मान डेम्बेले पांच गोल करके ज्यादा पीछे नहीं हैं।
स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल ने चार गोल किए हैं। अगर स्पेन सेमीफाइनल में फ्रांस को हरा देता है तो वह चुनौती पेश कर सकते हैं।
फ्रांस बनाम स्पेन सेमीफाइनल:
फ्रांस और स्पेन किसी बड़ी प्रतियोगिता के सेमीफाइनल में फिर से आमने-सामने होंगे। यह दोनों टीम दो साल पहले यूरोपीय चैंपियनशिप में एक दूसरे से भिड़ी थीं।
स्पेन ने उस मैच में 2-1 से जीत हासिल की थी। उस मैच में यामल ने गोल किया था जो तब 16 वर्ष के थे। स्पेन ने फाइनल में इंग्लैंड को हराकर यूरो कप का खिताब अपने नाम किया।
नाक में चोट लगने के बाद एमबाप्पे उस टूर्नामेंट में खास कमाल नहीं दिखा पाए थे जबकि माइकल ओलिस और डेसिरे डोए जैसे उभरते सितारों को अभी सफलता हासिल करनी बाकी थी।
दो साल बाद फ्रांस को मौजूदा विश्व कप की सबसे प्रभावशाली टीम माना जा रहा है जिसकी अग्रिम पंक्ति में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। सबकी निगाह हालांकि एमबाप्पे पर टिकी रहेगी जिन्होंने अभी तक टूर्नामेंट में संयुक्त रूप से सर्वाधिक गोल किए हैं।
स्पेन को टूर्नामेंट में आने से पहले यामल और साथी विंगर निको विलियम्स की चोटों से जूझना पड़ा। स्पेन को पिछले दो दौर में पुर्तगाल और बेल्जियम को हराने के लिए स्थानापन्न खिलाड़ी मिकेल मेरिनो के अंतिम क्षणों में किए गए गोल पर निर्भर रहना पड़ा।
विश्व कप या यूरो कप में ये दोनों देश कई बार आमने-सामने आ चुके हैं। यूरो कप 1984 के फाइनल में फ्रांस ने स्पेन को हराया था।
इंग्लैंड बनाम अर्जेंटीना सेमीफाइनल:
अर्जेंटीना और इंग्लैंड की प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। इस प्रतिद्वंद्विता में फुटबॉल के मैदान से इतर 1982 में फ़ॉकलैंड द्वीप समूह पर हुए संघर्ष से जुड़ा तनाव भी शामिल हैं।
विश्व कप में इन दोनों टीमों के बीच कई बार तनाव के क्षण आए हैं। विश्व कप 1966 में इंग्लैंड के खिलाफ तनावपूर्ण क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन को मैदान से बाहर भेज दिया गया था। रैटिन का हाल में ही निधन हुआ है। इंग्लैंड ने वह मैच 1-0 से जीता था। इंग्लैंड के तत्कालीन कोच अल्फ रैमसे ने तब अपने खिलाड़ियों को विपक्षी टीम के खिलाड़ियों के साथ जर्सी बदलने से रोकने की कोशिश की थी।
अब इससे 20 साल बाद की बात करते हैं। विश्व कप 1986 में डिएगो माराडोना के कुख्यात ‘हैंड ऑफ गॉड’ गोल ने अर्जेंटीना को क्वार्टरफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 2-1 से जीत दिलाने में मदद की, जिसके चलते अर्जेंटीना ने ट्रॉफी जीती।
विश्व कप 1998 में डेविड बेकहम को अर्जेंटीना के मिडफील्डर डिएगो सिमोन को लात मारने के लिए मैदान से बाहर भेज दिया गया था। सिमोन की इस प्रतिक्रिया की इंग्लैंड के मीडिया ने आलोचना की थी, क्योंकि ऐसा लग रहा था कि यह मामूली सी टक्कर थी। अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट में राउंड ऑफ 16 का यह मैच जीता था।
इसके चार साल बाद ग्रुप चरण में यह दोनों टीम आमने-सामने थी। बेकहम ने पेनल्टी पर गोल करके बदला चुकता किया और इंग्लैंड को 1-0 से जीत दिलाई, जिसके चलते अर्जेंटीना बाहर हो गया।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मेस्सी और केन में से कौन अपनी टीम की जीत का नायक बनकर सामने आता है।
मेस्सी पर सबकी नजर रहेगी जो संभवत: अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे हैं। यह विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ उनका पहला मैच होगा। अगर मेस्सी अर्जेंटीना को खिताब दिला देते हैं, तो वह अपने देश के लिए दो विश्व कप जीतकर महान माराडोना को पीछे छोड़ देंगे।
इससे अर्जेंटीना 1958 और 1962 में ब्राजील के बाद लगातार दो बार चैंपियन बनने वाला पहला देश भी बन जाएगा। फुटबॉल के महान खिलाड़ी पेले ब्राजील की उन टीमों का हिस्सा थे और उन्होंने 1970 में तीसरा विश्व कप भी जीता था।






