संवाददाता@विशाल टंडन…..
— बीएचयू, पीजीआई और एम्स में इलाज के बाद भी नहीं मिला आराम, आयुष चिकित्सालय मे फिजियोथेरेपी से मरीजों को मिली नई जिंदगी

जब दर्द पुराना हो जाए तो जिंदगी की रफ्तार थमने लगती है। कमर और पीठ का दर्द उठने-बैठने में परेशानी पैदा करता है, जबकि रीढ़, नसों और जोड़ों की समस्या मरीज को दूसरों पर निर्भर बना देती है। ऐसे मरीजों के लिए रॉबर्ट्सगंज के लोढ़ी स्थित 50 शैय्या आयुष चिकित्सालय का फिजियोथेरेपी विभाग राहत का सहारा बन रहा है। चिकित्सालय में पंचकर्म, योग और फिजियोथेरेपी के माध्यम से मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है।
यहां ऐसे मरीज भी पहुंच रहे हैं, जो बीएचयू, पीजीआई, एम्स और अन्य बड़े अस्पतालों में इलाज कराने के बाद भी दर्द से राहत नहीं पा सके। चिकित्सकीय परामर्श के बाद फिजियोथैरेपिस्ट डॉ.राकेश सिंह मरीज की समस्या के अनुसार उपचार करते हैं। मिर्जापुर के मड़िहान क्षेत्र के सुग्गा पाक गांव निवासी 28 वर्षीय धनंजय कुमार पिछले एक वर्ष से कमर और पैरों के दर्द, झनझनाहट व सुन्नपन से परेशान थे।
बीएचयू, राम मनोहर लोहिया अस्पताल लखनऊ और पीजीआई में इलाज के बाद भी उन्हें आराम नहीं मिला। करीब एक माह पहले आयुष चिकित्सालय में फिजियोथेरेपी शुरू हुई तो दो-तीन सत्रों के बाद ही उन्हें राहत महसूस होने लगी। रामगढ़, नरगा निवासी रमावती चार वर्षों से कमर दर्द और हाथ-पैरों में सुन्नपन से परेशान थीं।

बीएचयू और एम्स में लाखों खर्च कर इलाज के बावजूद राहत नहीं मिली। आयुष चिकित्सालय में नियमित फिजियोथेरेपी के बाद अब वह काफी हद तक सामान्य जीवन जी पा रही हैं। उनके अलावा शकुंतला देवी, रामविलास पांडे, मंजू देवी, संदीप और रामकेश समेत दर्जनों मरीजों को भी लाभ मिल रहा है।

समस्या के अनुसार तय होता है उपचार : फिजियोथैरेपिस्ट डॉ.राकेश सिंह बताते हैं कि मरीज की चिकित्सकीय जांच और डॉक्टर के परामर्श के बाद उपचार तय किया जाता है। ट्रैक्शन, हीट थेरेपी, वाइब्रेशन, योग और अन्य तकनीकों के माध्यम से उपचार किया जाता है। मरीजों को सही मुद्रा, उठने-बैठने और दैनिक जीवन में सावधानियों की जानकारी भी दी जाती है। उनका कहना है कि पुराने दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आयुष चिकित्सालय में चिकित्सकीय परामर्श, निशुल्क दवा, फिजियोथेरेपी और जरूरत पड़ने पर भर्ती की सुविधा भी उपलब्ध है।






