संवाददाता@विजय अग्रहरी…..

श्री महाविघ्नेश्वर पूजा समिति के तत्वाधान में कस्बे के श्री रामेश्वर रामलीला मंच पर हो रहे पूजन के छठवे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पंडाल मे रही। पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। शुक्रवार को सुबह हवन किया गया। पूजन के समापन दिवस पर सुबह की आरती के समय पंडाल भक्तों से खचाखच भरा रहा। रिमझिम फुहारों के बीच देवी देवताओं की आरती व जयकारे से नगर गूँज उठा।

नगर बड़े ही आकर्षक ढंग से जगमग झालरों से सजा पटा रहा। रात मे सुंदरकांड मे उपस्थित श्रद्धालुओ ने भाग लिया। क्षेत्रीय गायकों कलाकारों ने भजन कीर्तन किया। पंडाल मे बीते छह दिनों से भगवान श्री गणेश, माता महालक्ष्मी और माँ सरस्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित रही।

नगर व दूर दराज से आए श्रद्धालु पंडाल मे जगत जननी माँ विंध्यवासिनी की झांकी व महाकाल की भव्य झांकी का दर्शन कर आनंदित हुए जोकि बहुत ही आकर्षक रही। समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार, कार्यक्रम संयोजक शिप्पू अग्रहरि, व्यवस्थापक शुभम कुमार लाला, अनुराग अग्रहरि, जय प्रकाश सेठ, अमन उमर, बाबूलाल शर्मा, वैभव, विवेक उमर, दिव्यांश अग्रहरि, विनायक, अरुण भोजवाल, जय, कार्तिकेय उमर, राजा, गुड्डू आदि श्रद्धालु पंडाल मे उपस्थित रहे।

प्रतिमा विसर्जन से पहले रामेश्वर रामलीला मैदान मे एक धर्म सभा आयोजित हुई। प्रयागराज से परशुरामाचार्य ब्रह्मर्षि सुदर्शन शरण जी महाराज का आगमन हुआ। समिति के पदाधिकारियों द्वारा उन्हें उमामहेश्वर स्मृति चिन्ह, नारियल व अंगवस्त्र भेंट किया गया। मंच से उन्होंने अपने उद्बोधन में भगवान गणेश के आयोजित कार्यक्रम को सराहनीय बताया।
उन्होंने भारत की संस्कृति व सनातन धर्म के विस्तार के लिए परीक्षेत्र के युवाओं के इस कार्य को सराहनीय ठहराया। कहा कि इन पूजन कार्यों से घोरावल ही नहीं अपितु हिंदुस्तान में ऐसे युवाओं के द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यों से अपना धर्म मजबूती के साथ स्थापित होगा। कहा कि सनातन संस्कृति समस्त संसार को अपना परिवार मानता है।

हमारा धर्म आदिकाल से है और आने वाले समय में पूरे विश्व में सनातन धर्म की पताका फहराएगी। उन्होंने धार्मिक विचार व्यक्त किए। उपस्थित लोगों का मार्गदर्शन किया। प्रत्येक धार्मिक कार्यो में शामिल होने के लिए उन्होंने बढ़कर हिस्सा लेने के लिए जनमानस से अपील की।
