नई दिल्ली. श्री कांतिरावा स्टेडियम में जब बारिश की बूंदें गिर रही थीं, तब फुटबॉल फैंस को शायद ही अंदाजा था कि वे एक यादगार मुकाबले के गवाह बनने वाले हैं. भारत और दुनिया की 44वें नंबर की टीम पनामा के बीच हुआ मुकाबला किसी ‘डेविड वर्सेस गोलियाथ’ की कहानी से कम नहीं था. लगभग 68 मिनट तक ऐसा लगा कि भारतीय टीम एक बड़ा उलटफेर करने जा रही है. हालांकि अंत में मुकाबला 1-1 से बराबर रहा, लेकिन भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम ने इस मैच में जिस जज्बे का प्रदर्शन किया, उसने करोड़ों फैंस का दिल जीत लिया.
ब्राजील और उरुग्वे जैसी दुनिया की दिग्गज टीमों के खिलाफ होने वाले बेहद कड़े मुकाबलों से ठीक पहले, मुख्य कोच खालिद जमील की देखरेख में भारत ने हाल के दिनों का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन किया. जमील ने मैच की शुरुआत में ही बड़े बदलाव के संकेत दे दिए थे. उन्होंने इस साल यूनिटी कप में इस्तेमाल किए गए ‘बैक फाइव’ (पांच डिफेंडर्स) के फॉर्मेशन को हटाकर ‘बैक फोर’ (चार डिफेंडर्स) की नई रणनीति अपनाई. इस रक्षापंक्ति के केंद्र में अनवर अली और बिजॉय वर्गीज की नई जोड़ी ने कमाल का तालमेल दिखाया.
जमील की नई रणनीति और विंग्स का इस्तेमाल
कोच की रणनीति का सबसे ज्यादा फायदा भारत के आक्रमण को मिला. हालांकि टीम ने लंबी गेंदों (लांग बॉल्स) पर अपनी निर्भरता बरकरार रखी, लेकिन मैदान में एक अतिरिक्त खिलाड़ी होने से आशिक कुरुनियन और विक्रम प्रताप सिंह को विंग्स पर खुलकर खेलने और चौड़ाई बनाए रखने की आजादी मिली. मैच के पहले हाफ में आशिक कुरुनियन पनामा के डिफेंडर्स के लिए सिरदर्द बने रहे. अपनी तेज रफ्तार से उन्होंने पनामा के कप्तान सेसर ब्लैकमैन को कई बार छकाया. ऐसे ही एक हमले में आशिक ने बॉक्स के अंदर एक बेहतरीन फ्लैट क्रॉस दिया, जिसे गोल में बदलने से मनवीर सिंह और रयान विलियम्स चूक गए.
फैंस का बढ़ता उत्साह और पनामा पर दबाव
इस एक हमले ने भारतीय खिलाड़ियों में भरोसा भर दिया कि पनामा के रक्षापंक्ति को भेदा जा सकता है, खासकर तब जब पनामा के तीन डिफेंडर्स अपना डेब्यू मैच खेल रहे थे. जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्टेडियम में मौजूद फैंस का उत्साह बढ़ता गया. भारतीय खिलाड़ियों के हर पास, हर टैकल और गेंद को बाहर भेजने के हर प्रयास पर स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता था.
रयान विलियम्स का शानदार गोल और बढ़त
हाफ टाइम से ठीक पहले लग रहा था कि मैच शून्य-शून्य पर खत्म होगा, लेकिन रयान विलियम्स ने कांतिरावा स्टेडियम का माहौल पूरी तरह बदल दिया. आकाश मिश्रा ने एक थ्रो-इन से गेंद हासिल की और पनामा की रक्षापंक्ति को चकमा देते हुए अपने कमजोर दाएं पैर से एक बेहतरीन लांग बॉल आगे बढ़ा दी. रयान विलियम्स पनामा के हाफ में अकेले मौजूद थे. कांतिरावा स्टेडियम, जो कि उनका होम ग्राउंड भी है, की लाइटों के नीचे 32 वर्षीय विलियम्स ने गजब का नियंत्रण दिखाया और गेंद को आसानी से पनामा के गोलपोस्ट के निचले दाएं कोने में डाल दिया. इस गोल के साथ ही भारतीय फैंस खुशी से झूम उठे.
पनामा के हमले और गुरप्रीत की मजबूत दीवार
दूसरी तरफ पनामा ने गेंद को ज्यादातर मैदान पर रखकर खेलने की रणनीति बनाई थी. उनके डिफेंडर जोसेफ जोन्स कॉर्डोबा ने गेंद का वितरण अच्छे से किया, लेकिन पनामा के विंगर्स भारत के फुलबैक्स अभिषेक टेकचम और आकाश मिश्रा की दीवार को तोड़ नहीं पा रहे थे. जब भी वे इस रक्षापंक्ति को पार करने में सफल होते, भारत के विशालकाय गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू उनके इरादों पर पानी फेर देते.
दूसरे हाफ का संयम और पनामा की बेबसी
दूसरे हाफ में भारतीय टीम ज्यादा संयमित नजर आई और गैर-जरूरी फाउल करने से बचती रही. पनामा के पास गेंद का कब्जा तो बहुत था, लेकिन उनके पास भारतीय रक्षापंक्ति को तोड़ने की रचनात्मकता की कमी दिखी. नतीजतन वे दूर से ही शॉट लगाने पर मजबूर रहे.
उमर वेलेंसिया का जादुई गोल
जब कोई टीम इतनी मजबूती से रक्षात्मक खेल दिखाती है, तो उस गतिरोध को तोड़ने के लिए किसी खास जादू की जरूरत होती है. पनामा के सबस्टिट्यूट खिलाड़ी उमर वेलेंसिया ने ठीक वैसा ही किया. भारतीय हाफ में एक खराब टच के कारण उनसे गेंद छिटक गई थी, लेकिन गेंद दोबारा बाउंस होकर उनके सामने आई और उन्होंने एक शानदार वॉली शॉट लगाया. गेंद हवा में गोता खाते हुए सीधे साइड नेटिंग में जा घुसी और गुरप्रीत बस देखते रह गए.
आखिरी क्षणों का रोमांच और बढ़ा आत्मविश्वास
68वें मिनट में हुए इस गोल के बावजूद भारतीय टीम का हौसला नहीं टूटा. कोच जमील ने मैदान पर फ्रेश खिलाड़ियों को उतारा, जिससे टीम ने दोबारा अपनी आक्रामकता हासिल कर ली. मैच के अंतिम क्षणों में मनवीर सिंह और एडमंड लालरिंदिका के पास गोल करने के बेहतरीन मौके आए. हालांकि एडमंड एक खुले गोलपोस्ट के सामने मौका गंवा बैठे, जो उन्हें लंबे समय तक कचोटता रहेगा.
इन मौकों के छूटने के बावजूद भारत ने मैच का अंत मजबूती से किया. कागजों पर पनामा के खिलाफ ड्रा का नतीजा असंभव सा लग रहा था, लेकिन भारत ने वर्ल्ड कप खेल चुकी टीम को बराबरी पर रोककर यह साबित कर दिया कि वे किसी भी चुनौती के लिए तैयार हैं. ब्राजील और उरुग्वे जैसी फुटबॉल की दिग्गजों से भिड़ने से पहले इस मैच ने भारतीय टीम को एक नया आत्मविश्वास दिया है.
