Dharmendra Prahdan News: शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर छात्रों और विपक्ष के आंदोलन के सामने केंद्रीय शिक्षा मंत्री को आगे करके मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं, बल्कि जवाब देंगे, प्रहार करेंगे।
Dharmendra Prahdan News: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने की मांग को लेकर छात्रों और विपक्ष के फैलते आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मोर्चे पर आगे आकर साफ संकेत दे दिया है कि वो कहीं नहीं जा रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी की अपील पर आए छात्र-छात्राओं के बड़े संसद मार्च और प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद प्रधान ने मंगलवार की रात से खुद मोर्चा संभाल लिया है। आंदोलन प्रधान का इस्तीफा मांग रहा है। लेकिन प्रधान का सामने आकर आंदोलन के सवालों और मसलों पर संसद के अंदर समग्र बहस का ऐलान करना संकेत है कि उन पर सरकार या पार्टी से इस्तीफा देने का कोई दबाव नहीं है। अलबत्ता प्रधान ने छात्रों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप लगाकर यह जता दिया है कि वो इस मसले पर पलायन करने के बदले सदन में विपक्ष पर ही प्रहार करेंगे।
संसद के मानसून सत्र का बुधवार को तीसरा दिन है। सरकार ने कल साफ कर दिया था कि वो सदन में छात्रों की जायज चिंताओं पर चर्चा के लिए तैयार। ऐसे में इस बात के आसार हैं कि आज संसद में कुछ काम, कुछ बात हो। दो दिनों से दोनों सदन लगातार स्थगित हो रहे हैं, जिस वजह से सरकार के कई विधायी काम अटके हुए हैं। सरकार ने संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को कल पीएम आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन में भेजा था, लेकिन राहुल गांधी से बात बनी नहीं। जितेंद्र ने कहा कि राहुल पहले बहस के लिए तैयार हो गए थे, लेकिन बाद में प्रधान के इस्तीफे की मांग करने लगे।
बात नहीं बनती देख सरकार के अंदर विपक्ष और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को लेकर नई रणनीति बनी, जिसके तहत देर रात 10.51 बजे धर्मेंद्र प्रधान को एक ट्वीट के साथ मैदान में उतार दिया गया। अब इस मसले पर संसद में सरकार की तरफ से प्रधान ही विपक्ष से दो-दो हाथ करते दिखेंगे। प्रधान ने ट्वीट में कहा था कि छात्रों की जवाबदेही सरकार की है और सरकार जवाब देने, सुधार करने और जवाबदेही लेने के लिए तैयार है। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर लोकतांत्रिक बहस के बदले राजनीतिक तमाशा करने का भी आरोप लगाया था।
सरकार जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को भी खत्म कराने की कोशिश में जुट गई है, क्योंकि मार्च पर लाठीचार्ज के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस द्वारा तोड़ा गया मंच दोबारा खड़ा कर लिया है और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के अलावा नौजवानों ने वहां लगातार डेरा-डंडा डाल रखा है। इसी मंच से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनशन कर रहे थे, जिन्हें दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल भेज दिया गया है। कल रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने गुरुग्राम गए। सरकार और वांगचुक के बीच बातचीत का अभी कोई नतीजा सामने नहीं आया है।
जेपी नड्डा ने ही कॉकरोच जनता पार्टी के सौरव दास और आशुतोष रांका को सोमवार को बुलाकर मांगपत्र लिया था। ये लोग जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। जब तक जंतर-मंतर पर लोग जमा हैं, सरकार की बेचैनी खत्म नहीं होगी। सेंट्रल दिल्ली के 16 मेट्रो स्टेशन बुधवार को बंद कर दिए गए हैं। इससे जंतर-मंतर और इंडिया गेट की तरफ मेट्रो से जाना मुश्किल हुआ है। सरकार अब अभिजीत दीपके या सौरव दास के बदले सीधे सोनम वांगचुक पर फोकस करती दिख रही है। सरकार को उम्मीद है कि वांगचुक का अनशन टूट जाता है तो लोग लौट जाएंगे और जंतर-मंतर खाली हो जाएगा। सरकार की कोशिशों का संसद के अंदर विपक्ष और बाहर जंतर-मंतर पर किस तरह का असर होता है, यह आज देखने का दिन है।







