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Sonbhadra। चोपन क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय झिरगाडंडी में कक्षा में पढ़ाने के तरीके को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप है कि एक शिक्षक ने बच्चों को ‘कुत्ता’ के पर्यायवाची शब्दों के रूप में ‘कलुआ’ और ‘झबरुआ’ बताया।

मामला सामने आने के बाद शिक्षक की पढ़ाने की शैली को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी होने पर बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से भी संज्ञान लिया गया।
बीएसए लोकेश मिश्रा ने इस तरह पढ़ाए जाने को अनुचित बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों को पढ़ाते समय पाठ्यक्रम के अनुरूप मानक एवं प्रचलित भाषा का ही प्रयोग किया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को सही जानकारी मिल सके।

हिंदी भाषा में ‘कुत्ता’ के प्रमुख पर्यायवाची शब्दों में श्वान, कुक्कुर, शुनक और सारमेय शामिल हैं। वहीं, स्थानीय स्तर पर प्रचलित किसी नाम या संबोधन को पाठ्यपुस्तक आधारित पर्यायवाची के रूप में पढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता।

विद्यालय में सामने आए इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और शिक्षकों द्वारा बच्चों को दी जा रही शैक्षिक जानकारी पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विभागीय स्तर पर मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।
