संवाददाता@अमिताभ मिश्रा…..

दीपावली पर्व पर पटाखों की बिक्री को लेकर जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित व्यवस्था रेणुकूट में पूरी तरह बेअसर नजर आई। प्रशासन के निर्देश पर नगर के गांधी मैदान में 37 लाइसेंसधारी पटाखा दुकानदारों को दुकान लगाने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए दुकानदारों ने हजारों रुपये खर्च कर अपनी दुकानें सजाई थीं, लेकिन मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे बिना लाइसेंस के दर्जनों पटाखा दुकानें खुल जाने से प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।

गांधी मैदान में लाइसेंस लेकर दुकान लगाने वाले दुकानदारों का आरोप है कि मुख्य मार्ग पर खुलेआम अवैध रूप से पटाखों की बिक्री होती रही, लेकिन प्रशासन की ओर से इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसका सीधा असर लाइसेंसधारी दुकानदारों के कारोबार पर पड़ा। निर्धारित स्थान पर दुकान लगाने वाले दुकानदार दिनभर ग्राहकों का इंतजार करते रह गए, जबकि बड़ी संख्या में लोग मुख्य मार्ग के किनारे लगी दुकानों से ही पटाखों की खरीदारी कर अपने घरों को जाते दिखाई दिए।

दुकानदारों का कहना था कि जिला प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए उन्होंने लाइसेंस बनवाने से लेकर दुकान लगाने तक सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कीं। गांधी मैदान में दुकान लगाने के लिए आर्थिक खर्च भी उठाया, लेकिन बिना लाइसेंस के दुकान लगाने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर पटाखा दुकानों के लिए गांधी मैदान निर्धारित किया था तो मुख्य मार्ग पर अवैध दुकानें कैसे संचालित होती रहीं।
इससे न केवल लाइसेंसधारी दुकानदारों के हित प्रभावित हुए, बल्कि भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्ग पर पटाखों की बिक्री से सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बनी रहीं। लोगों ने प्रशासन से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है।