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Spain Civil War: स्पेन की सड़कों पर जश्न की तैयारी है. फुटबॉल टीम वर्ल्ड चैंपियन बनने से महज एक कदम ही दूर है. आज 17 जुलाई की तारीख स्पेन के लिए ब्लैक चैप्टर की तरह से है. दो दिन बाद वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद के साथ ही आंखों में 90 साल पुराने दर्द के आंसू भी हैं. ये वो दौर था, जिसमें लाखों लोगों की मौत का इतिहास दफन है.
स्पेनिश सिविल वार
Spain Vs Argentina Fifa Final Match: स्पेन देश इस समय अलग ही रंग में डूबा हुआ है. राजधानी मैड्रिड से लेकर बार्सिलोना और वालेंसिया तक जश्न मनाने की तैयारी शुरू हो गई है. इसकी वजह से फुटबॉल विश्वकप. अपने सधी हुई तकनीक, लय और धैर्य की बदौलत स्पेन फाइनल तक पहुंच चुका है. फीफा ट्रॉफी चूमने से बस एक कदम दूर खड़े इस देश के सामने लियोनल मेसी की अगुवाई वाली अर्जेंटीना टीम की निर्णायक चुनौती है. लेकिन खुशी के इस मौके के बीच कुछ पुराने जख्म भी छिपे हैं. आज 17 जुलाई की तारीख स्पेन के लिए ब्लैक चैप्टर की तरह से है. दो दिन बाद वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद के साथ ही आंखों में 90 साल पुराने दर्द के आंसू भी हैं. ये वो दौर था, जिसमें लाखों लोगों की मौत का इतिहास दफन है.
इतिहास के पन्नों में 17 जुलाई 1936 का दिन एक ब्लैक चैप्टर के रूप में दर्ज है. इसी दिन स्पेन में एक ऐसा भीषण गृह युद्ध शुरू हुआ, जिसने अगले तीन सालों तक पूरे देश को लाशों के ढेर में तब्दील कर दिया. इस सिविल वार में करीब 5 लाख से अधिक लोग मारे गए थे. यह युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं के बीच लड़ा गया. एक तरफ लोकतंत्र और समाजवाद के पैरोकार रिपब्लिकन थे. दूसरी तरफ तानाशाही और फासीवादी विचार वाले थे. आखिर स्पेन में इस खूनी संघर्ष की नौबत क्यों आई?
साल 1931 तक स्पेन में राजशाही व्यवस्था थी. भारी जन-आक्रोश के बाद राजा अल्फोंसो XIII को देश छोड़ना पड़ा और स्पेन में सेकेंड रिपल्बिक की स्थापना हुई. लेकिन यह लोकतंत्र देश को स्थिरता नहीं दे सका. स्पेन वैचारिक रूप से दो धड़ों में बंट गया. लेफ्ट और रिपब्लिकन धड़े में इसमें मजदूर, किसान, समाजवादी और कम्युनिस्ट शामिल थे. ये लोग बदलाव चाहते थे. वहीं दक्षिणपंथी खेमे में बड़े जमींदार, कैथोलिक चर्च और सेना के बड़े अधिकारी शामिल थे. ये लोग रूढ़िवादी व्यवस्था को बनाए रखना चाहते थे.
किस वजह से भड़की चिंगारी?
1931 से 1936 के बीच सत्ता में आई वामपंथी सरकारों ने कई ऐसे बड़े सुधार लागू किए, जिससे देश का अमीर और प्रभावशाली वर्ग भड़क गया. इसमें कुछ मुख्य बातें थीं.
- भूमि सुधार: सरकार ने बड़े जमींदारों से जमीनें छीनकर गरीब किसानों में बांटनी शुरू कर दी. इससे जमींदार वर्ग सरकार का कट्टर दुश्मन बन गया.
- चर्च की शक्तियों पर लगाम: स्पेनिश समाज पर कैथोलिक चर्च का गहरा प्रभाव था. नई सरकार ने शिक्षा को चर्च से अलग कर दिया और पादरियों के विशेषाधिकार खत्म कर दिए, जिससे धार्मिक वर्ग नाराज हो गया.
- सेना में छंटनी: रिपब्लिकन सरकार ने सेना के बजट में कटौती की और कई रूढ़िवादी जनरलों को हटा दिया, जिससे सेना के भीतर असंतोष चरम पर पहुंच गया.
1936 का चुनाव और खूनी दौर
फरवरी 1936 में स्पेन में आम चुनाव हुए, जिसमें वामपंथी दलों के गठबंधन ‘पॉपुलर फ्रंट’ को जीत मिली. इस जीत के बाद देश में दंगों और राजनीतिक हिंसा का दौर शुरू हो गया. 12 जुलाई 1936 को एक वामपंथी पुलिस अधिकारी ‘लेफ्टिनेंट कैस्टिलो’ की हत्या कर दी गई. इसके बदले में अगले ही दिन 13 जुलाई को वामपंथी झुकाव वाले पुलिसकर्मियों ने स्पेन के प्रमुख दक्षिणपंथी नेता ‘खोस मोरिया काल्वो सोटेलो’ की गोली मारकर हत्या कर दी. इस हाई-प्रोफाइल हत्या ने सेना को तख्तापलट करने का बहाना दे दिया.
कैसे भड़का गृह युद्ध?
17 जुलाई 1936 को स्पेन के उपनिवेश मोरक्को में तैनात सेना ने जनरल एमिलियो मोला और जनरल फ्रांसिस्को फ्रैंको के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार के खिलाफ तख्तापलट का बिगुल फूंक दिया. यह विद्रोह पूरे स्पेन में फैल गया. सरकार के वफादार नागरिक और मजदूर हथियारों के साथ सेना के खिलाफ खड़े हो गए और देश गृह युद्ध की आग में झुलस गया. इसी 17 जुलाई के दिन को ब्लैक डे के रूप में याद किया जाता है.
यह दूसरे विश्वयुद्ध से 3 साल पहले की घटना है. इस समय तक दुनिया की महाशक्तियां दो धड़ों में बंट चुकी थीं. स्पेन में हो रहे बवाल में इन सभी को वर्ल्ड वार का सेमीफाइनल खेलने का मौका मिल गया. इससे सिविल वार ने भयावह रूप ले लिया. जर्मनी के एडोल्फ हिटलर, इटली के बेनिटो मुसोलिनी जैसे फासीवादी नेताओं ने स्पेन में विद्रोहियों की कमान संभाल रहे जनरल फ्रैंको की मदद के लिए टैंक, लड़ाकू विमान, हथियार भेजे.
वहीं दूसरी तरफ रिपबल्किन लोकतांत्रिक सरकार की मदद के लिए सोवियत संघ रूस के साथ ही वामपंथ सपोर्टर इंटरनैशनल ब्रिगेड्स के लोग सामने आए. यह गृहयुद्ध तीन साल तक खिंच गया. हिटलर और मुसोलिनी की मदद के बूते 1 अप्रैल 1939 को जनरल फ्रांसिस्को फ्रैंको ने सरकार को उखाड़ फेंका और मैड्रिड पर कब्जा कर लिया. इसके साथ ही स्पेन में लोकतंत्र खत्म हुआ और अगले 36 साल यानी 1975 तक के लिए जनरल फ्रैंको की तानाशाही स्थापित हो गई.
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ऐश्वर्य कुमार राय नेटवर्क 18 ग्रुप में जर्नलिस्ट हैं. वह यहां डेप्युटी न्यूज एडिटर के तौर पर देश और दुनिया के घटनाक्रमों पर विस्तृत रिपोर्ट्स कवर करते हैं. न्यूज 18 हिंदी में दिसंबर 2025 से जुड़े ऐश्वर्य यहां न…और पढ़ें






