संवादाता@विशाल टंडन……
— तीन साल से काम का इंतजार कर रही बीसी सखी, लोन चुकाने की बढ़ी चिंता

सरकार की महत्वाकांक्षी बीसी सखी योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सपना कई जगह तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से अधूरा नजर आ रहा है। करमा विकासखंड के ग्राम गौरही की बीसी सखी उषा देवी इसका एक उदाहरण हैं। डिवाइस खराब होने के बाद पिछले लगभग तीन वर्षों से उनका काम पूरी तरह ठप पड़ा है।
आय का साधन बंद होने से अब उन्हें समूह से लिए गए 75 हजार रुपये के ऋण की किस्त चुकाने की चिंता सता रही है। उषा देवी बताती हैं कि वह वर्ष 2019 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। वर्ष 2021-22 में बीसी सखी का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें समूह के माध्यम से 75 हजार रुपये का ऋण मिला। इस राशि में से करीब 38 हजार रुपये का फिनो बैंक का डिवाइस उपलब्ध कराया गया।
उनका कहना है कि उन्होंने डिवाइस के स्थान पर लैपटॉप देने का अनुरोध किया था, ताकि अन्य कार्य भी किए जा सकें, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। शुरुआती दिनों में उन्होंने गांव में बैंकिंग सेवाएं देकर लोगों को नकद निकासी, जमा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं। पहले छह माह तक उन्हें 4,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय भी मिला। लेकिन लगभग एक वर्ष बाद डिवाइस की बैटरी खराब हो गई और मशीन ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया।
इसके बाद उन्होंने समूह, विभाग और बैंक से कई बार संपर्क किया। विभाग ने बैंक भेजा, जबकि बैंक ने नया डिवाइस अपने खर्च पर खरीदने की बात कह दी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह नया डिवाइस नहीं खरीद सकीं और उनका रोजगार पूरी तरह बंद हो गया। उषा देवी का कहना है कि परिवार की आय का मुख्य आधार थोड़ी-बहुत खेती है। बीसी सखी बनने के बाद उन्हें आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद जगी थी, लेकिन डिवाइस खराब होने के बाद वह केवल नाम की बीसी सखी बनकर रह गई हैं।

अब सबसे बड़ी चिंता ऋण की अदायगी की है। इस मामले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की उपायुक्त सरिता सिंह ने बताया कि सभी बीसी सखियों को नियमानुसार शुरुआती छह माह तक 4,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया गया था। उन्होंने बताया कि 31 मार्च को पूर्व में संचालित एल-जीरो (L0) प्रणाली बंद होने के कारण पुराने डिवाइस निष्प्रभावी हो गए हैं।
फिनो बैंक के साथ विभाग का अनुबंध भी समाप्त हो चुका है। नए बैंक के चयन की प्रक्रिया जारी है और विभाग ने इसके लिए पत्राचार किया है। अनुबंध पूरा होते ही नई डिवाइस उपलब्ध कराकर बीसी सखियों का कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा तथा लंबित समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।
उषा देवी का कहना है कि यदि नई व्यवस्था जल्द लागू नहीं हुई तो कई बीसी सखियों के सामने रोजगार और ऋण अदायगी का संकट और गहरा सकता है।





