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जन्म से सुन नहीं सकता, लेकिन निशाना ऐसा कि जीत लिया स्टेट मेडल, 12 साल के प्रतीक की प्रेरक कहानी

Admin by Admin
July 3, 2026
in खेल
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जन्म से सुन नहीं सकता, लेकिन निशाना ऐसा कि जीत लिया स्टेट मेडल, 12 साल के प्रतीक की प्रेरक कहानी


Last Updated:July 03, 2026, 07:56 IST

Alwar News: अलवर के 12 वर्षीय मूक-बधिर खिलाड़ी प्रतीक ने अपनी शारीरिक अक्षमता को पीछे छोड़ते हुए राइफल शूटिंग में इतिहास रचना शुरू कर दिया है. जन्म से दोनों कानों से न सुन पाने के बावजूद प्रतीक ने मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत के दम पर राजस्थान स्टेट चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है. मनु भाकर से प्रेरित होकर शूटिंग शुरू करने वाले प्रतीक को उसके सेना में कार्यरत पिता ने आर्थिक तंगहाली के बीच सेकंड हैंड राइफल दिलाकर आगे बढ़ाया, जो आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं.

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Alwar News: कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो शारीरिक अक्षमता भी सपनों के आड़े नहीं आ सकती. इस कहावत को राजस्थान के अलवर जिले के रहने वाले 12 वर्षीय प्रतीक ने पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है. प्रतीक ने यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों और अटूट आत्मविश्वास के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती है. जन्म से ही दोनों कानों से सुनने में पूरी तरह असमर्थ होने के बावजूद वह राइफल शूटिंग जैसे अत्यधिक एकाग्रता, मानसिक संतुलन और कड़े अनुशासन वाले खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अमिट पहचान बना रहे हैं. अपनी कड़ी मेहनत, अटूट लगन और असाधारण आत्मविश्वास के दम पर प्रतीक लगातार अभ्यास कर रहे हैं और समाज के अन्य बच्चों के लिए एक नई प्रेरणा बनते हुए अपने सुनहरे सपनों को साकार कर रहे हैं.

प्रतीक के राइफल शूटर बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प और भावुक करने वाली है. प्रतीक के पिता अजय सिंह, जो भारतीय सेना (Indian Army) में देश की सेवा कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि करीब ढाई साल पहले वे घर पर टीवी देख रहे थे. उस समय टीवी पर भारतीय स्टार शूटर मनु भाकर को देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतते हुए दिखाया जा रहा था. मनु भाकर को पोडियम पर तिरंगे के साथ मेडल लेते देख प्रतीक बेहद उत्साहित हो गया. उसने तुरंत अपनी सांकेतिक भाषा और इशारों के माध्यम से अपने पिता के सामने राइफल शूटिंग सीखने और देश के लिए खेलने की तीव्र इच्छा व्यक्त की. बेटे के इस जज्बे को देखकर फौजी पिता ने तुरंत उसे अलवर शहर में संचालित एक प्रतिष्ठित शूटिंग अकादमी में दाखिला दिला दिया.

आर्थिक तंगहाली भी नहीं बनी रुकावट: पिता ने दिलाई सेकंड हैंड राइफल
प्रतीक ने बताया कि वह अभी कक्षा 6वीं का छात्र है और पिछले दो वर्षों से इस खेल का नियमित और कड़ा अभ्यास कर रहा है. उसका अंतिम सपना देश के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक में पदक जीतना है. प्रतीक की इस अद्भुत सफलता के पीछे उसके पिता का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है. शूटिंग एक बेहद महंगा खेल है और शुरुआत में नई राइफल की कीमत करीब 3 लाख रुपये थी. मध्यमवर्गीय परिवार होने के कारण इतनी बड़ी राशि अचानक जुटाना मुश्किल था, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया और उसे एक पुरानी यानी सेकंड हैंड राइफल खरीदकर दी. प्रतीक आज भी उसी सेकंड हैंड राइफल से साई शूटिंग रेंज में अपने अचूक निशाने का अभ्यास करता है.

कोच परमेंद्र का मार्गदर्शन: हियरिंग एबिलिटी के अनुसार आसान शब्दों में ट्रेनिंग
प्रतीक के मुख्य कोच परमेंद्र ने बताया कि प्रतीक ने वर्ष 2026 में अलवर के इंदिरा गांधी स्टेडियम स्थित साई (SAI) शूटिंग रेंज में अपना आधिकारिक प्रशिक्षण शुरू किया था. कोच के अनुसार, प्रतीक की सबसे बड़ी ताकत कम उम्र में सीखने की उसकी तीव्र ललक और गजब की एकाग्रता है. चूंकि प्रतीक सुन नहीं सकता, इसलिए उसकी हियरिंग एबिलिटी को ध्यान में रखकर उसे बेहद सरल, सांकेतिक और कम शब्दों में तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसे वह बाकी बच्चों की तुलना में बहुत जल्दी सीख लेता है. इसी कड़ी मेहनत का परिणाम है कि प्रतीक ने हाल ही में आयोजित हुई राजस्थान स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में अपनी श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) अपने नाम किया है.

उम्र की सीमा नहीं: अनुभवी खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रहा है प्रतीक
कोच परमेंद्र ने एक और महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि मूक-बधिर (डेफ) शूटिंग प्रतियोगिताओं में आयु सीमा का कोई विशेष या कड़ा प्रतिबंध नहीं होता है, जिसके कारण खिलाड़ी किसी भी उम्र में सीनियर वर्ग में भी हिस्सा ले सकते हैं. यही कारण है कि मात्र 12 वर्ष की बेहद कम उम्र का होने के बावजूद प्रतीक इस खेल में अपने से दोगुनी उम्र के और अत्यधिक अनुभवी खिलाड़ियों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहा है. हर प्रतियोगिता में वह अपने बेहतरीन और अचूक प्रदर्शन से जजों और खेल प्रेमियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है. वह प्रतिदिन करीब तीन घंटे अपने कोच की देखरेख में बेहद अनुशासित तरीके से अभ्यास करता है, ताकि देश का प्रतिनिधित्व करने का उसका सपना जल्द पूरा हो सके.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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