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Sonbhadra । दुद्धी तहसील के मझौली गांव से जुड़े कथित रिश्वतखोरी प्रकरण में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित राजस्व निरीक्षक (कानूनगो) के निलंबन की संस्तुति कर दी है। वहीं कार्य में लापरवाही पाए जाने पर क्षेत्रीय लेखपाल को भी उसके कार्यक्षेत्र से हटा दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें मझौली गांव के कानूनगो अखिलेश शुक्ला तहसील परिसर के एक कक्ष में पैसे गिनते हुए दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि दुद्धी क्षेत्र के एक गांव में पत्थरगड़ी से संबंधित मामले में कथित रूप से रिश्वत ली गई थी। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कराई।
उपजिलाधिकारी निखिल यादव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोप गंभीर पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कानूनगो के निलंबन की कार्रवाई हेतु जिलाधिकारी सोनभद्र को संस्तुति भेज दी गई है। साथ ही क्षेत्रीय लेखपाल की कार्यशैली में लापरवाही मिलने पर उसे भी संबंधित गांव के कार्यक्षेत्र से हटा दिया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार अथवा राजस्व कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि जिलाधिकारी चर्चित गौड़ द्वारा भूमि विवादों के निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद समय-समय पर राजस्व विभाग के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे में दुद्धी तहसील में हुई यह कार्रवाई प्रशासन के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि भूमि संबंधी मामलों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। लोगों का मानना है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की आय, संपत्ति और कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई अन्य अनियमितताएं भी उजागर हो सकती हैं।






