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kuldeep vedwan sentenced to 5 years: सोनीपत की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने नेशनल पैरा तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को पॉक्सो एक्ट के तहत पांच साल की सजा सुनाई है.और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया है. वेदवान को अप्रैल 2023 में भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में एक नाबालिग खिलाड़ी के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया. वे प्रसिद्ध तीरंदाज शीतल देवी और पायल नाग के कोच रहे हैं. पिछले साल जमानत मिलने के बाद, अदालत के इस फैसले के बाद उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया है.
कुलदीप वेदवान को पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है.
चंडीगढ़. नेशनल पैरा तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को सोनीपत की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने पांच साल की सजा दी है. वेदवान को 2023 में एक नाबालिग खिलाड़ी के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में पेरिस पैरालंपिक से पहले जमानत पर रिहा कर दिया गया था. उन्हें पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी ठहराया गया और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया. अदालत ने 15 मई को उन्हें दोषी ठहराया और बुधवार को सजा सुनाई, जिसके बाद उन्हें फिर से हिरासत में लिया गया.
अदालत ने कुलदीप वेदवान (Kuldeep Vedwan) को पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत पांच साल और धारा 12 के तहत तीन साल की सजा दी, दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. यह मामला अप्रैल 2023 का है, जब एक नाबालिग तीरंदाज ने आरोप लगाया था कि वेदवान ने सोनीपत के भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में आयोजित ट्रायल्स के दौरान उसका यौन उत्पीड़न किया. शिकायत के मुताबिक, सात अप्रैल को सुबह करीब चार बजे कोच उसके होटल के कमरे में आया और उसके साथ गलत हरकतें कीं.
कुलदीप वेदवान को पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई है.
खिलाड़ी ने कहा कि उसने लगभग 15-20 मिनट तक विरोध किया और फिर किसी तरह भागकर दूसरे कमरे में पहुंची, जहां दूसरी महिला खिलाड़ी ठहरी थीं. उसने यह भी आरोप लगाया कि बाद के टूर्नामेंटों में वेदवान उस पर बार-बार अपने कमरे में रुकने का दबाव डालते थे और सहयोग करने पर बड़ी खिलाड़ी बनाने का वादा करते थे. जब खिलाड़ी ने अपने परिवार को बताया, तो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को शिकायत दी गई. जांच के बाद परिवार को सोनीपत में पुलिस शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई और अगस्त 2023 में मामला दर्ज हुआ. वेदवान को बाद में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, लेकिन 2024 के पेरिस पैरालंपिक से पहले उन्हें जमानत मिल गई थी. उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी अभिलाषा चौधरी को भारत की पैरा तीरंदाजी कोच नियुक्त किया गया.
वेदवान पूर्व राष्ट्रीय तीरंदाज और पूर्व सेना कर्मी हैं, जिन्होंने पैरा तीरंदाजी में पहचान बनाई थी. उन्हें 2018 एशियाई पैरा खेलों के लिए भारत का कोच बनाया गया था और बाद में टोक्यो पैरालंपिक तक यह जिम्मेदारी रही, जहां हरविंदर सिंह ने भारत का पहला पैरालंपिक पदक जीता था. इन उपलब्धियों के आधार पर वेदवान ने आरोप लगने से पहले द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए आवेदन किया था. वेदवान खास तौर पर बिना हाथों वाली पैरा तीरंदाज शीतल देवी को ट्रेनिंग देने के लिए जाने जाते हैं.
उन्होंने उनके लिए पैरों, कंधे और ठुड्डी से तीर चलाने की तकनीक बनाई थी. उनके मार्गदर्शन में शीतल देवी ने 2023 एशियाई पैरा खेलों में गोल्ड जीता और 2025 में विश्व चैंपियन बनीं. शीतल, जो फोकोमेलिया नामक दुर्लभ बीमारी के साथ पैदा हुई थीं, उन्हें जम्मू-कश्मीर में पहचान मिलने के बाद वेदवान की अकादमी में शामिल किया गया था. 2019 में वेदवान ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पायल नाग को भी खोजा और उन्हें कटरा स्थित अपनी अकादमी में लाए. पिछले महीने बैंकॉक में आयोजित विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज के फाइनल में पायल ने दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी को हराया था. पायल ने सोनीपत से कहा, हम बहुत परेशान हैं. उम्मीद है कि वह जल्द ही इससे बाहर आ जाएंगे.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें
