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Bagpat News: बागपत की बेटी तानिया चौधरी ने आज मेहनत, लगन और समर्पण की एक शानदार मिसाल पेश की है और उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं. आइए उनकी सफलता की कहानी के बारे में जानते हैं.
बागपत: बागपत के गांधी गांव की बेटी तानिया चौधरी आज मेहनत, लगन और समर्पण की एक शानदार मिसाल बनकर उभरी हैं. तानिया, नरेंद्र चौधरी की पुत्री हैं और वह उन सभी बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखती हैं. उनकी सफलता यह साबित करती है कि अगर मेहनत सच्ची हो और साथ देने वाले लोग मिल जाए, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं है.
तानिया को कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता के चलते रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड से नवाजा गया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया है. क्षेत्रवासियों ने उनका हौसला बढ़ाया है और तानिया चौधरी देश के लिए गोल्ड मेडल लाने का सपना लेकर कड़ी मेहनत कर रही हैं.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां
तानिया चौधरी हैमर थ्रो की नेशनल प्लेयर हैं और 8 गोल्ड मेडल सहित कुल 15 पदक जीत चुकी हैं. तान्या चौधरी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की हैं. उन्होंने एशियन गेम्स 2023 (हांगझोउ, चीन) में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए महिलाओं की हैमर थ्रो स्पर्धा के फाइनल में 60.50 मीटर की सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ सातवां स्थान प्राप्त किया. इसके अलावा वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में 61.97 मीटर की थ्रो के साथ नौवां स्थान हासिल किया.
राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए जीता स्वर्ण पदक
तान्या ने जनवरी 2026 में 85वीं अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 65.60 मीटर की थ्रो कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता. उन्होंने सरिता सिंह का 9 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. साथ ही खेलो इंडिया में 64.29 मीटर की रिकॉर्ड थ्रो के साथ गोल्ड मेडल और 5वीं इंडियन ओपन थ्रो प्रतियोगिता 2026 में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया. तानिया चौधरी फिलहाल कॉमनवेल्थ गेम्स के प्रैक्टिस कर रही हैं और देश के लिए गोल्ड जीतने का सपना लेकर अपने इस मेहनत के सफर को आगे बढ़ा रही है.
कई कठिनाइयों का करना पड़ा सामना
तानिया चौधरी ने बताया कि बहुत कम संसाधनों में उन्होंने तैयारी की थी और 6 साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें सफलता मिलना प्रारंभ हुई, लेकिन जब सफलता मिलना शुरू हुई तो जितनी भी नेगेटिव चीज थी, वह सब किनारे हो गई और सफलता में सब लोग उनके साथ खड़े हैं. तानिया ने बताया कि शुरुआती दौर में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
सामाजिक और आर्थिक लड़ाई से उभरने के बाद उन्होंने सफलता हासिल की है और जो लोग उनकी हंसी उड़ाते थे, आज वह सफलता में तालियां बजा रहे हैं. फिलहाल तानिया चौधरी का कहना है कि हर खिलाड़ी और बच्चे को कड़ी मेहनत करनी चाहिए. कड़ी मेहनत के बाद जब सफलता मिलती है, तो खुशी चार गुना हो जाती है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
