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Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी दीवानी न्यायालय को आदेश देते हुए एक 32 साल पुराने लंबित दीवानी विवाद को एक साल के अंदर फैसला देने का निर्देश दिया है. यह याचिका इंदु देवी की ओर से दाखिल की गई थी, जिसमें वर्ष 1994 से अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वितीय, वाराणसी की अदालत में मामला लंबित है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 32 साल से लंबित दीवानी विवाद को सुलझाने का आदेश दिया है. (फाइल फोटो)
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में करीब 32 साल से लंबित दीवानी मुकदमे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किया है. हाईकोर्ट ने वाराणसी की अधीनस्थ दीवानी अदालत को मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने और एक वर्ष के भीतर उसका निस्तारण करने का आदेश दिया है. अदालत ने सभी प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद रोजाना आधार पर सुनवाई करने और कानून के मुताबिक फैसला सुनाने का निर्देश दिया है. हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी या निर्णय नहीं दिया है.
यह मामला वाराणसी की अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) द्वितीय की अदालत में लंबित मूल दीवानी वाद से जुड़ा है. वर्ष 1994 में दाखिल किया गया यह मुकदमा राधेश्याम बनाम इंदु देवी के नाम से चल रहा है. करीब तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मामले का निस्तारण नहीं हो सका है.
किसने उठाया मुद्दा?
याचिकाकर्ता इंदु देवी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. याचिका पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ में सुनवाई हुई. याचिकाकर्ता की ओर से वकील अश्विनी कुमार श्रीवास्तव ने पक्ष रखा और अदालत के समक्ष मामले के लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा उठाया.
हाईकोर्ट का एक साल में फैसले का निर्देश?
सुनवाई के दौरान अदालत ने दीवानी मुकदमों के शीघ्र निस्तारण करने पर जोर दिया. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में अली शाद उस्मानी मामले का हवाला दिया. इस मामले में यह सिद्धांत सामने आया था कि वादकारियों के बीच अलग-अलग वर्ग बनाकर दीवानी मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए विशेष निर्देश नहीं दिए जा सकते. इसके बावजूद, मौजूदा मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमा वर्ष 1994 से लंबित है और इस दौरान लगभग 32 वर्ष बीत चुके हैं. इतनी लंबी अवधि तक मुकदमे का लंबित रहना सुनवाई में तेजी लाने की जरूरत है.
एक साल में करना होगा निस्तारण
हाईकोर्ट ने वाराणसी की संबंधित अधीनस्थ अदालत को निर्देश दिया. मुकदमे की कार्यवाही में तेजी लाने के आदेश दिए. अदालत को सभी प्रभावित पक्षों को सुनने के बाद मामले की सुनवाई रोजाना यानी डे-टू-डे आधार पर करनी होगी. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि मुकदमे का निस्तारण एक वर्ष के भीतर कानून के अनुसार किया जाए. इसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामले में सुनवाई को गति देना और निर्धारित अवधि में कानूनी प्रक्रिया पूरी करना है.
मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने विवाद के मूल तथ्यों या मामले के गुण-दोष पर कोई निर्णय नहीं दिया है. इसका अर्थ है कि वाराणसी की अधीनस्थ अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों, पक्षकारों की दलीलों और लागू कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला करना होगा. इन निर्देशों के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया. अब संबंधित दीवानी अदालत को निर्धारित निर्देशों के अनुसार सुनवाई आगे बढ़ानी होगी और एक वर्ष के भीतर मामले का फैसला करना होगा.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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