जौनपुर: देशभर में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के लिए पहचान रखने वाले जौनपुर के माधोपट्टी गांव में एक बार फिर खुशियों का माहौल है. करीब दस साल के अंतराल के बाद गांव से एक नई पीढ़ी की बेटी ने अधिकारी बनकर गांव का नाम रोशन किया है. माधोपट्टी की मुस्कान सोलंकी ने हरियाणा पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल की है. खास बात यह है कि मुस्कान ने अपने पहले ही प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की है. उनके परिवार में पहले से ही दस सदस्य आईएएस, आईपीएस और पीसीएस जैसी सेवाओं में अधिकारी रह चुके हैं. अब मुस्कान परिवार की 11वीं अधिकारी बनी हैं. उनकी सफलता से परिवार के साथ पूरे गांव में खुशी की लहर है.
मुस्कान सोलंकी पुत्री नवीन सिंह की शुरुआती परवरिश पंजाब में हुई. उनके पिता नवीन सिंह पंजाब पुलिस में एएसआई के पद पर कार्यरत रहे हैं, जबकि उनके दादा वशिष्ठ नारायण सिंह सेना में थे. परिवार में शुरू से ही शिक्षा, अनुशासन और प्रशासनिक सेवाओं का माहौल रहा. बचपन में जब भी मुस्कान अपने गांव माधोपट्टी आती थीं, तो ग्रामीण उनसे अक्सर पूछते थे कि अभी भी आईएएस बनना है ना? गांव के लोगों की यह बात उन्हें अपने लक्ष्य की याद दिलाती रहती थी.
कानून की पढ़ाई में जीता गोल्ड
मुस्कान पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हैं. उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की और इसमें टॉपर रहीं. इसके बाद उन्होंने एमए-एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. कानून की पढ़ाई में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया. उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों को देखते हुए परिवार को भरोसा था कि वह प्रशासनिक सेवा में भी सफलता हासिल करेंगी.
दिल्ली रहकर की तैयारी
पिता नवीन सिंह ने बताया कि मुस्कान ने वर्ष 2024 और 2025 के दौरान दिल्ली में रहकर यूपीएससी की कोचिंग की. इसके बाद उन्होंने खुद से पढ़ाई करने का फैसला लिया. साल 2026 में वह कुछ समय के लिए प्रयागराज भी आईं और अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया. उन्होंने हरियाणा पीसीएस की परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर परिवार का विश्वास सच साबित कर दिया.
हरियाणा पीसीएस में हो चुका है चयन
मुस्कान का सफर आसान नहीं रहा. उन्होंने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा दो बार दी, लेकिन सफलता नहीं मिली. पिछले वर्ष वह महज 1.3 अंकों के अंतर से प्रीलिम्स में रह गई थीं. यह उनके लिए काफी निराशाजनक समय था. इसके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया. इस बार उन्होंने यूपीएससी प्रीलिम्स की परीक्षा पास की और मुख्य परीक्षा भी लिखी है. नवंबर में आने वाले परिणाम को लेकर वह आशान्वित हैं. इसी बीच हरियाणा पीसीएस में चयन ने उन्हें बड़ी राहत दी है.
6 से 7 घंटे करती थीं पढ़ाई
मुस्कान बताती हैं कि पढ़ाई में घंटों की संख्या से ज्यादा एकाग्रता और गुणवत्ता मायने रखती है. वह आमतौर पर प्रतिदिन छह से सात घंटे पढ़ाई करती थीं. उनका प्रयास रहता था कि जितना समय पढ़ें, पूरी क्षमता और ध्यान के साथ पढ़ें. उन्होंने अपनी तैयारी मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए की. सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए रखी और केवल व्हाट्सएप व टेलीग्राम का इस्तेमाल किया. असफलताओं के दौरान परिवार ने मुस्कान का लगातार साथ दिया.
असफल होने के बाद पिता और भाई ने दी सांत्वना
वह बताती हैं कि दूसरी बार यूपीएससी प्रीलिम्स में असफल होने पर वह काफी रोई थीं. ऐसे समय में उनके भाई और पिता ने उन्हें संभाला. पिता उन्हें समझाते थे कि परीक्षा में सफलता नहीं मिली तो कोई बात नहीं, अपना ध्यान रखो और आगे बढ़ो. दोस्तों का सहयोग भी लगातार मिलता रहा. मुस्कान को अपनी सफलता की जानकारी उस समय मिली, जब वह ट्रेन से घर जा रही थीं.
उन्होंने परिणाम से जुड़ी सूची देखी तो उन्हें सफलता का अंदाजा हुआ. इसके बाद उन्होंने पिता को फोन कर इसकी जानकारी दी. ट्रेन में ही परिवार, दोस्तों और कोचिंग संस्थानों से बधाइयों के फोन आने लगे, वह पल उनके लिए बेहद भावुक था.
पहली बार 1942 में बड़े बुजुर्ग बने थे तहसीलदार
मुस्कान के पिता नवीन सिंह ने कहा कि उनकी बेटी की सफलता पर पूरे परिवार को बहुत गर्व है. उनके परिवार में वर्ष 1942 में उनके बड़े बुजुर्ग तहसीलदार बने थे. इसके बाद परिवार के कई सदस्य प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में पहुंचे. परिवार में एसपी सिंह आईएएस अधिकारी रहे, जबकि विशाल विक्रम सिंह एसपी हैं. मुस्कान के चयन से अगली पीढ़ी में भी अधिकारी बनने की परंपरा आगे बढ़ी है.
मुस्कान कहती हैं कि माधोपट्टी गांव की पहचान अधिकारियों के गांव के रूप में रही है. लंबे समय तक गांव से किसी नए अधिकारी का चयन नहीं होने की बात उन्हें प्रेरित करती थी. वह इस दबाव को नकारात्मक रूप में लेने के बजाय गांव का नाम रोशन करने की प्रेरणा मानती थीं. उनकी सफलता से अब गांव के दूसरे युवाओं को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए नई उम्मीद मिली है.