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Free Digital Library: गांव में पढ़ाई के लिए अच्छी सुविधाएं न होने के कारण कई युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. लेकिन फिरोजाबाद के 22 वर्षीय गौरव कुशवाह की कहानी बताती है कि अगर मेहनत करने का मौका मिले तो गांव में रहकर भी सपना पूरा किया जा सकता है. हाथवंत ब्लॉक के बवाइन गांव के गौरव को कभी पढ़ाई के लिए रोजाना 10 किलोमीटर दूर फिरोजाबाद जाना पड़ता था. साल 2024 में गांव में डिजिटल लाइब्रेरी बनी तो उनकी तैयारी को नई दिशा मिली. यहां एसी, इंटरनेट और किताबों जैसी सुविधाओं के बीच रोजाना 8 घंटे पढ़ाई करके गौरव ने 2025 की पुलिस भर्ती परीक्षा में कांस्टेबल पद पर सफलता हासिल की.
फिरोजाबाद: गांव में रहने वाले युवाओं को कई बार सुविधाओं की कमी के कारण अपने सपने पूरे करने में मुश्किल होती है. खेती-किसानी के काम के साथ पढ़ाई करना और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सही माहौल ढूंढना उनके लिए आसान नहीं होता. ऐसे में कुछ युवाओं को पढ़ाई के लिए शहर का रुख करना पड़ता है. लेकिन फिरोजाबाद के एक युवा ने गांव में रहकर ही अपना सपना पूरा कर लिया. गांव में बनी एक डिजिटल लाइब्रेरी ने उसकी पढ़ाई आसान कर दी और महज 22 साल की उम्र में उसका चयन पुलिस कांस्टेबल के पद पर हो गया.
यह कहानी फिरोजाबाद के हाथवंत ब्लॉक के गांव बवाइन में रहने वाले गौरव कुशवाह की है. गौरव ने Local18 से बातचीत में बताया कि वह पिछले कई सालों से पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे थे. लेकिन गांव में पढ़ाई के लिए अच्छी सुविधाएं नहीं थीं. न कोई लाइब्रेरी थी और न ही शांत माहौल में पढ़ने की उचित व्यवस्था. इंटरनेट की सुविधा भी नहीं थी. ऐसे में गांव के युवाओं को पढ़ाई और कोचिंग के लिए रोजाना करीब 10 किलोमीटर दूर फिरोजाबाद शहर जाना पड़ता था. इससे समय और पैसे, दोनों खर्च होते थे.
डिजिटल लाइब्रेरी से मिली मदद
गौरव के सामने भी यही परेशानी थी. लेकिन साल 2024 में गांव में डिजिटल लाइब्रेरी बनने से उनकी पढ़ाई आसान हो गई. यहां छात्रों के लिए एसी, हाई-स्पीड इंटरनेट और किताबों की सुविधा उपलब्ध है. सबसे बड़ी बात यह है कि यहां शांत माहौल में बैठकर पढ़ाई की जा सकती है. गौरव ने बताया कि उन्होंने इस लाइब्रेरी को अपना दूसरा घर बना लिया था और रोजाना करीब 8 घंटे पढ़ाई करते थे.
डिजिटल लाइब्रेरी में किताबें भी मिलती है मुफ़्त
गौरव की मेहनत और लाइब्रेरी में पढ़ाई के लिए मिले अच्छे माहौल का उन्हें फायदा मिला. साल 2025 में हुई पुलिस भर्ती परीक्षा में उनका चयन कांस्टेबल के पद पर हो गया. इस तरह महज 22 साल की उम्र में उनका पुलिस की वर्दी पहनने का सपना पूरा हो गया. गौरव ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी से उन्हें पढ़ाई में काफी मदद मिली. यहां शांत माहौल में एकाग्र होकर पढ़ाई करने का मौका मिलता है. साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए किताबें भी उपलब्ध हैं. इससे छात्रों को पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री जुटाने में मदद मिलती है.
गांव के दूसरे युवाओं के लिए भी बने प्रेरणा
गौरव की सफलता गांव के दूसरे युवाओं के लिए भी प्रेरणा है. गांव में ही पढ़ाई की सुविधाएं मिलने से अब युवाओं को तैयारी के लिए हर दिन शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती. डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं ग्रामीण इलाकों के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर माहौल दे रही हैं.
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Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…
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