• Privacy Policy
Sonebhadra Live
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
  • Home
  • सोनभद्र
  • सिंगरौली
  • उत्तर प्रदेश
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राष्ट्रीय
  • वायरल वीडियो
No Result
View All Result
Sonebhadra Live
No Result
View All Result

बलिया का वो तीर्थ धाम, जहां पितरों को सीधे मिलता है मोक्ष, महर्षि भृगु को यहीं मिली थी मुक्ति

Admin by Admin
October 8, 2026
in उत्तर प्रदेश
0
बलिया का वो तीर्थ धाम, जहां पितरों को सीधे मिलता है मोक्ष, महर्षि भृगु को यहीं मिली थी मुक्ति


बलिया: पितृपक्ष के पावन महीने में देशभर के गंगा घाटों पर अपने पूर्वजों को जल और तर्पण देने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार विभिन्न तीर्थ स्थलों पर जा रहे हैं. लेकिन आज हम आपको उत्तर प्रदेश के बलिया की उस ऐतिहासिक और पौराणिक भूमि के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां तर्पण करने से पितरों को सीधे मुक्ति की प्राप्ति होती है. यह वही पावन धरती है, जहां कभी भगवान शिव ने साधना की थी और त्रिदेवों के परीक्षण के दौरान भगवान विष्णु के वक्ष पर प्रहार करने वाले महर्षि भृगु को भी इसी गंगा तट पर मोक्ष की प्राप्ति हुई थी.

प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय के अनुसार, इस समय बलिया में श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. सुबह होते ही श्रद्धालु गंगा और अन्य जलाशयों के तटों पर पहुंचने लगे हैं. जो लोग नदियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे अपने घरों में ही कुश की पैती बनाकर, तिल, जल और सफेद पुष्प अर्पित कर विधि-विधान से पितरों का तर्पण कर रहे हैं और घरों में विशेष अनुष्ठानों की शुरुआत हो चुकी है.

पितृ तर्पण के लिए अत्यंत विशिष्ट भूमि
डॉ. शिवकुमार सिंह बताते हैं कि पितरों के श्राद्ध के लिए देश में गया और सिद्धपुर जैसे तीर्थों की विशेष मान्यता है, लेकिन बलिया का भृगु-दर्दर क्षेत्र अपनी एक अलग और अनूठी धार्मिक पहचान रखता है. भृगु क्षेत्र महात्म्य के रचयिता कौशिकेय बताते हैं कि आर्ष ग्रंथों में इस क्षेत्र को पितृ तर्पण के लिए अत्यंत विशिष्ट भूमि माना गया है. गया को जहां मुख्य रूप से पुरुष पितरों और गुजरात के सिद्धपुर को स्त्री पितरों के तर्पण से जोड़ा जाता है, वहीं भृगु-दर्दर क्षेत्र का महत्व इन सबसे कहीं अधिक व्यापक बताया गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र क्षेत्र में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि देव, यक्ष, गंधर्व, ऋषि-मुनि और यहां तक कि पशु-पक्षियों व सूक्ष्म जीवों तक के उद्धार का वर्णन मिलता है. पद्म पुराण और मत्स्य पुराण का हवाला देते हुए इतिहासकार बताते हैं कि दर्दर क्षेत्र में श्रद्धा भाव से श्राद्ध और तर्पण करने वाला मनुष्य स्वयं तो पुण्य का भागी बनता ही है, साथ ही अपने समस्त पितरों का भी उद्धार कर देता है.

दर्दर क्षेत्र में पितरों को मोक्ष
शास्त्र में कहा गया है, ‘दर्दरं समनुप्राप्य श्राद्धं कुर्वन्ति मानवाः, स्वयं तुतारितं तैस्तु तारिताः पितृदेवता.’ यानि दर्दर क्षेत्र में पितरों (पूर्वजों) का तर्पण, श्राद्ध करने वाले मानव स्वयं तो तरते (मोक्ष प्राप्त) ही है, अपने पूर्वजों को भी मोक्ष दिलाते हैं. शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि दर्दर क्षेत्र में श्राद्ध करने वाले मानव स्वयं भी मोक्ष को प्राप्त होते हैं और अपने पूर्वजों को भी तार देते हैं.

उन्होंने कहा कि ऐसी अटूट मान्यता है कि इस धरती पर पिंडदान करने से आयु, यश, संतान सुख, समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है. माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को याद करने का sacred अवसर है और इसी पौराणिक विरासत के चलते बलिया आज एक बार फिर विशेष चर्चा में है.



Source link

Post Views: 4
Previous Post

‘याद आएंगे नाना पाटेकर के अमर किरदार, जिसने किसानों और वंचितों के दर्द को समझा’

Next Post

सोनभद्र. समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग, एनएचएम कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी

Next Post

सोनभद्र. समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग, एनएचएम कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार जारी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

error: Content is protected !!
No Result
View All Result
  • Privacy Policy

© 2026 Sonebhadra Live News - Design by Cliker Studio.

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement