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गाजियाबाद की 125 साल पुरानी श्री सुल्लामल रामलीला की मूल भावना और धार्मिक परंपरा आज भी बरकरार, आधुनिक तकनीक का होता है प्रयोग

Admin by Admin
October 7, 2026
in उत्तर प्रदेश
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गाजियाबाद की 125 साल पुरानी श्री सुल्लामल रामलीला की मूल भावना और धार्मिक परंपरा आज भी बरकरार, आधुनिक तकनीक का होता है प्रयोग


Last Updated:October 07, 2026, 11:02 IST

गाजियाबाद की 125 साल पुरानी श्री सुल्लामल रामलीला घंटाघर मैदान में अपनी परंपरा के साथ जारी है. लाला सुल्लामल ने 1900 के आसपास इसकी शुरुआत की थी. आधुनिक तकनीक के बावजूद इसकी मूल भावना बरकरार है. सन 1900 के आसपास धार्मिक प्रवृत्ति के लाला सुल्लामल ने इसकी शुरुआत की थी बताया जाता है कि महज 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने मांडी भाषा में रामायण लिखी थी. इसी दौरान उनके मन में रामलीला के मंचन का विचार आया और उन्होंने इसकी शुरुआत की. शुरुआती दौर में रामलीला दिल्ली गेट के पास मोहल्ला अफगान के बाहर सड़क पर होती थी जिसमें स्थानीय लोग ही राम, लक्ष्मण, सीता और दूसरे पात्रों की भूमिका निभाते थे.

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गाजियाबादः गाजियाबाद की सबसे पुरानी रामलीला आज भी अपनी 125 साल पुरानी परंपरा के साथ जारी है. घंटाघर मैदान में होने वाली श्री सुल्लामल रामलीला की शुरुआत उस दौर में हुई थी जब गाजियाबाद चार दरवाजों के बीच सिमटा हुआ छोटा शहर था. दिल्ली गेट के पास सड़क से शुरू हुई यह रामलीला समय के साथ घंटाघर मैदान तक पहुंची और आज भव्य मंच, एलईडी स्क्रीन और आधुनिक तकनीक के बीच आयोजित होती है. शहर के विस्तार और बदलते दौर के बावजूद 125 साल पुरानी इस रामलीला ने अपनी पहचान और आस्था को कायम रखा है.

लाला सुल्लामल नें की थी शुरुआत

सुल्लामल नाम पड़ने की कहानी भी रामलीला के इतिहास से जुड़ी है. सन 1900 के आसपास धार्मिक प्रवृत्ति के लाला सुल्लामल ने इसकी शुरुआत की थी बताया जाता है कि महज 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने मांडी भाषा में रामायण लिखी थी. इसी दौरान उनके मन में रामलीला के मंचन का विचार आया और उन्होंने इसकी शुरुआत की. शुरुआती दौर में रामलीला दिल्ली गेट के पास मोहल्ला अफगान के बाहर सड़क पर होती थी जिसमें स्थानीय लोग ही राम, लक्ष्मण, सीता और दूसरे पात्रों की भूमिका निभाते थे. उस समय गाजियाबाद का विस्तार चार गेटों तक ही सीमित था. धीरे-धीरे शहर बढ़ा और रामलीला की लोकप्रियता भी बढ़ती गई इसके बाद इसका आयोजन घंटाघर स्थित रामलीला मैदान में होने लगा और तब से यह परंपरा लगातार जारी है.

पहले शहर के बीच में होती थी रामलीला

श्री सुल्लामल रामलीला समिति के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र कुमार में बताया कि उन्होंने अपने 82 साल के जीवन में बचपन से ही इस रामलीला को होते देखा है. उनके अनुसार रामलीला उनसे पहले भी कई दशकों से आयोजित होती आ रही थी. शुरुआती दौर में रामलीला शहर के बीच में आयोजित होती थी बाद में दशहरा और रामलीला के आयोजन के लिए घंटाघर स्थित जमीन उपलब्ध कराई गई. इसके बाद से यहां लगातार रामलीला और दशहरा मनाया जाने लगा.

रामलीला के शुरुआती दौर में शहर के लोग ही भगवान राम, लक्ष्मण, सीता और दूसरे पात्रों की भूमिका निभाते थे. बाद में मथुरा से कलाकार आने लगे और कई वर्षों तक वहीं के कलाकार मंचन करते रहे पिछले चार-पांच वर्षों से दिल्ली के कलाकार रामलीला का मंचन कर रहे हैं. समय के साथ मंचन का तरीका भी पूरी तरह बदल गया है पुराने पर्दों और पारंपरिक मंच की जगह अब एलईडी स्क्रीन, आधुनिक साउंड सिस्टम और रोशनी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

मूल भावना और धार्मिक परंपरा में नहीं हुआ कोई बदलाव

समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि तकनीक बदलने के बावजूद रामलीला की मूल भावना और धार्मिक परंपरा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. नई तकनीक का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है ताकि नई पीढ़ी भी इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़ सके. पहले शहर और आसपास के गांवों से लोग सिर्फ इसी रामलीला को देखने आते थे अब शहर में कई स्थानों पर रामलीला होने के कारण दर्शकों की संख्या पहले की तुलना में कुछ कम हुई है लेकिन दशहरे के दिन घंटाघर मैदान में आज भी भारी भीड़ जुटती है. घंटाघर की इस ऐतिहासिक रामलीला से शहर के राजनीतिक और सामाजिक लोगों का भी पुराना जुड़ाव रहा है. समिति के अनुसार पूर्व में राजनाथ सिंह समेत कई सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि रामलीला देखने पहुंच चुके हैं.

इस बार रामलीला में करीब 90 फीट के रावण के पुतले की चर्चा है. आयोजन से पहले शहर में रावण दूत के जरिए रामलीला शुरू होने का संदेश दिया गया इसके बाद गणेश यात्रा निकाली जा रही है. इसके बाद रामलीला मैदान में नियमित मंचन शुरू होगा. करीब 125 साल पुरानी यह रामलीला आज भी गाजियाबाद की बदलती तस्वीर के बीच उसकी पुरानी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है.

About the Author

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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Location :

Ghaziabad,Uttar Pradesh

First Published :

October 07, 2026, 10:16 IST



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