बलिया: जिले के गड़वार शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पूर्व माध्यमिक विद्यालय शेरवा कलां में चोरी की घटनाएं किसी फिल्मी कहानी से कम नजर नहीं आती हैं. इस विद्यालय में चोरों को न तो किताबों की जरूरत है और न ही फीस से मतलब है, बल्कि मौका मिलते ही वे स्कूल का कीमती सामान लेकर फरार हो जाते हैं. कभी छोटे उपकरण गायब होते हैं, तो कभी बच्चों के लिए लगाए गए पानी के प्लांट और चार्जर जैसी जरूरी चीजें चोरों का निशाना बन जाती हैं.
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा आम हो चुकी है कि स्कूल में बच्चों की पढ़ाई कब होगी, यह अलग विषय है. लेकिन सबसे पहले चोरों की हाजिरी लगना बंद होना बेहद जरूरी है. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक शंकर कुमार रावत के अनुसार, उनके यहां पिछले कई सालों से अनोखी और हैरान करने वाली चोरियां हो रही हैं. जब उन्होंने इस विद्यालय में कार्यभार संभाला था, तब यहां चारदीवारी तक नहीं थी और एक कमरा हमेशा खुला रहता था. जब उन्होंने उस कमरे में ताला लगाने की सोची तो गांव के कुछ युवाओं ने उन्हें चेतावनी दी कि ताला लगाने से बाकी सारे ताले भी टूट जाएंगे.
ताले में भर गया अलकतरा
विज्ञान के छात्र रहे प्रधानाध्यापक ने इस बात का प्रैक्टिकल करना चाहा और ताला लगा दिया. उनका यह अनुमान सच साबित हुआ और ताला टूट गया. इसके बाद जब दोबारा जोखिम उठाकर ताला लगाया गया, तो चोरों ने ताले को तोड़ा नहीं, बल्कि उसमें अलकतरा भर दिया, ताकि वह खुल ही न सके. बाद में ग्राम प्रधान की मदद से विद्यालय की चारदीवारी का निर्माण कराया गया, जिसके बाद कुछ राहत मिली.
गायब होने शुरू हुए स्कूल के सामान
चारदीवारी बनते ही स्कूल में पहली चोरी माइक्रोस्कोप की हुई, जो सूक्ष्म वस्तुओं को देखने के काम आता था. इसके बाद सुरक्षा का स्तर बढ़ाया गया और लोहे के गेट लगाए गए और खिड़कियों पर रेलिंग लगवाई गई. रोशनदान बंद कर दिए गए, ताकि कोई खतरा न रहे. इसके बावजूद चोरों ने पंखे और खेलकूद का सामान चुरा लिया. यहां तक कि बच्चों के बैठने के लिए ठंड के मौसम में मंगाई गई तिरपाल भी चोरी हो गई.
चोरों ने अब गायब किए आरो मशीन
इन तमाम मुश्किलों के बावजूद इस विद्यालय के शिक्षकों की मेहनत रंग लाती रही है और यहां के बेहद गरीब पृष्ठभूमि के बच्चे केंद्र सरकार से लेकर बड़ी बड़ी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर रहे हैं. हालांकि चोर लगातार चोरी की वारदातों को अंजाम देते रहे और प्रधानाध्यापक व्यवस्था को संभालते रहे. लेकिन इस बार हुई चोरी ने सारी हदें पार कर दी हैं. विद्यालय में बच्चों के लिए लगाई गई आरओ मशीन के साथ दो भारी मोटर चोरी हो गए हैं. इसके अलावा ऑफिस का ताला तोड़कर इन्वर्टर, स्टेबलाइजर और दो बड़ी माइक्रोटेक बैटरी भी चुरा ली गई हैं.
गांव में चोर हैं या पूरा गांव ही चोर
हैरानी की बात यह है कि प्रधानाध्यापक का व्यक्तिगत बत्तीस हजार रुपये का मोबाइल फोन भी चोरी हो गया है. बच्चों को बांटने के लिए रखे गए छह हजार रुपये भी उनके बैग से गायब हो गए हैं. स्थिति यह हो गई है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि गांव में चोर हैं या पूरा गांव ही चोरी की चपेट में है.
पीड़ितों से ही मांगा जाता है सुराग
प्रधानाध्यापक ने जिला प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की गुहार लगाई है. हर बार मामला थाने की फाइलों में दबकर रह जाता है और पुलिस आज तक चोरों को पकड़ने में नाकाम रही है. पुलिस घटनास्थल पर आती है और औपचारिकता पूरी करके चली जाती है, उल्टा पीड़ित से ही चोरों के बारे में सुराग मांगा जाता है. हमेशा की तरह पुलिस का यही जवाब होता है कि मामले की जांच तेजी से चल रही है.

