सलखन संवाददाता@बद्रीप्रसाद…
..शिकायतों के बावजूद नहीं सुधरी व्यवस्था, सड़क किनारे की कई लाइटें भी बंद

चुर्क-गुरमा नगर पंचायत क्षेत्र के गुरमा रामलीला मैदान में पिछले करीब पांच माह से हाईमास्ट लाइट खराब पड़ी है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक इसकी मरम्मत नहीं कराई गई। रामलीला आयोजन सिर पर है और शाम ढलते ही पूरा मैदान अंधेरे में डूब जा रहा है। ऐसे में रामलीला के दौरान उमड़ने वाली भीड़ की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।रामलीला मैदान केवल आयोजन स्थल ही नहीं, बल्कि शाम के समय बच्चों और युवाओं के लिए खेलकूद का प्रमुख स्थान भी है।

इसके अलावा यहां समय-समय पर सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। हाईमास्ट बंद होने से रात में मैदान के साथ आसपास का इलाका भी पर्याप्त रोशनी से वंचित है। बरसात के मौसम में अंधेरे के बीच विषैले जीव-जंतुओं का खतरा भी लोगों को सताता रहता है। रामलीला आयोजन नजदीक आने के साथ ही प्रकाश व्यवस्था को लेकर लोगों की चिंता और गहरा गई है।

आयोजन के दौरान मैदान में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में पांच माह से बंद हाईमास्ट को लेकर लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो अंधेरा आयोजन में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।स्थानीय लोगों के अनुसार रामलीला मैदान की हाईमास्ट लाइट के साथ सड़क किनारे लगे कई विद्युत पोलों की लाइटें भी लंबे समय से खराब हैं। इससे गुरमा चौराहे की ओर आने-जाने वाले लोगों को रात में परेशानी होती है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि सभासद और संबंधित अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन मरम्मत के नाम पर अब तक ठोस पहल नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि रामलीला शुरू होने से पहले हाईमास्ट लाइट को चालू कराने के साथ सड़क किनारे बंद पड़ी सभी लाइटों की भी मरम्मत कराई जाए।

मांग करने वालों में सभासद प्रतिनिधि मनोज कुमार, चंदन सिंह, सुरेंद्र गुप्ता, शुभम गुप्ता, किशन भारती, इंद्रदेव कनौजिया, राजकुमार, विनोद विश्वकर्मा, चिंटू चौबे और अंकित कुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं।इस संबंध में अधिशासी अधिकारी अमित कुमार सरोज से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि जल्द ही इलेक्ट्रिशियन को भेजकर हाईमास्ट लाइट ठीक करा दी जाएगी। अब देखना यह है कि रामलीला शुरू होने से पहले नगर पंचायत वास्तव में प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करा पाती है या फिर इस बार भी ग्रामीणों को अंधेरे के बीच ही आयोजन देखने को मजबूर होना पड़ेगा।
