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Ghaziabad Furniture Market: घर को नया रूप देना हो या दफ्तर को संवारना, गाजियाबाद की ऐतिहासिक रमते राम रोड फर्नीचर मार्केट आधी सदी बीत जाने के बाद भी खरीदारों की पहली पसंद बनी हुई है. पांच दशक पहले महज छह-सात दुकानों से शुरू हुआ यह सफर आज करीब 70 दुकानों की एक विशाल मंडी में तब्दील हो चुका है. ₹500 के छोटे घरेलू सामान से लेकर ₹50,000 से अधिक के प्रीमियम और कस्टमाइज्ड फर्नीचर तक, यह बाजार गुणवत्ता और बजट का बेजोड़ संगम पेश करता है.
Ghaziabad Furniture Market: घर हो या ऑफिस, फर्नीचर की जरूरत पड़े तो गाजियाबाद की रमते राम रोड की फर्नीचर मार्केट आज भी लोगों की पसंद बनी हुई है. करीब पांच दशक पहले गिनी-चुनी दुकानों से शुरू हुई यह मार्केट अब फर्नीचर की बड़ी मंडी का रूप ले चुकी है. कभी रमते राम रोड पर फर्नीचर की छह-सात दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन आज यहां करीब 60 से 70 दुकानें हैं. खास बात यह है कि यहां जरूरत और बजट के हिसाब से फर्नीचर की इतनी विविधता है कि ग्राहक तैयार सामान खरीदने के साथ अपनी पसंद का फर्नीचर भी बनवा सकते हैं.
₹500 से ₹50,000 तक के विकल्प
फर्नीचर मार्केट में प्रवेश करते ही बेड, सोफा, अलमारी, टेबल-कुर्सी, रैक और दूसरे घरेलू सामान की दुकानें नजर आती हैं. यहां लकड़ी के साथ स्टील, लोहे और मोल्डेड फर्नीचर की भी अलग-अलग रेंज उपलब्ध है. गद्दे और अन्य जरूरी सामान भी इसी मार्केट में मिल जाता है. कीमत की बात करें तो करीब 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये या उससे अधिक कीमत तक का फर्नीचर यहां आसानी से मिल जाता है. यही वजह है कि सामान्य बजट में खरीदारी करने वाला ग्राहक हो या घर को नए अंदाज में सजाने वाला परिवार, दोनों के लिए यहां विकल्प मौजूद हैं.
पसंद और साइज के तैयार होता है कस्टमाइज्ड फर्नीचर
मार्केट की एक खासियत यह भी है कि ग्राहक को सिर्फ बना-बनाया सामान ही नहीं मिलता. अगर किसी को अपने कमरे के आकार, जरूरत या पसंद के मुताबिक बेड, अलमारी या अन्य फर्नीचर चाहिए तो दुकानदार से डिजाइन और साइज तय कराकर उसे बनवाया भी जा सकता है. इस वजह से यहां खरीदारी सिर्फ सामान लेने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से फर्नीचर तैयार भी करा सकता है.
दूर-दराज से पहुंचते हैं खरीदार, ऑनलाइन दौर में भी बरकरार भरोसा
मार्केट से जुड़े कारोबारी दीपक गर्ग ने बताया कि वह खुद करीब 36 वर्षों से यहां फर्नीचर का कारोबार कर रहे हैं. उनके मुताबिक जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब इस रोड पर छह-सात फर्नीचर की दुकानें थीं. अब इनकी संख्या बढ़कर 60-70 के आसपास पहुंच गई है. साहिबाबाद, शाहदरा, वसुंधरा, वैशाली, राजनगर एक्सटेंशन और मुरादनगर तक से ग्राहक यहां खरीदारी के लिए पहुंचते हैं. हालांकि ऑनलाइन बाजार बढ़ने से फर्नीचर कारोबार पर असर पड़ा है, लेकिन पुरानी मार्केट होने के कारण स्थानीय दुकानदारों के साथ ग्राहकों का भरोसा अब भी जुड़ा हुआ है. दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक सामान देखने, उसकी गुणवत्ता परखने और अपनी जरूरत के मुताबिक बदलाव कराने के लिए आज भी बाजार पहुंचता है.
कैसे पहुंचें रमते राम रोड फर्नीचर मार्केट?
रमते राम रोड की यह मार्केट घंटाघर और चौधरी मोड़ के बीच स्थित है. पुराने बस अड्डे की तरफ से आने वाले लोग मालीवाड़ा चौक से डासना रोड की ओर जाकर भी यहां पहुंच सकते हैं. पांच दशक का सफर तय कर चुकी यह मार्केट अब गाजियाबाद के पुराने बाजारों में अपनी अलग पहचान बना चुकी है.
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Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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