संवाददाता@अमिताभ मिश्रा…..

केंद्रीय श्रम संगठनों एवं संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर उपश्रमायुक्त कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उपश्रमायुक्त अचला पाण्डेय के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 16 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया।

प्रदर्शन की अध्यक्षता इंटक के सोनभद्र जिला अध्यक्ष हरदेवनारायण तिवारी ने की, जबकि संचालन सुरेंद्र पाल ने किया। ज्ञापन में चार श्रम संहिताओं को वापस लेने, श्रमिकों के लिए 8 घंटे का कार्य दिवस, संगठन बनाने व हड़ताल का अधिकार सुनिश्चित करने, न्यूनतम मजदूरी 42 हजार रुपये प्रतिमाह करने, सभी फसलों पर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी और खरीद की गारंटी देने तथा किसानों की कर्जमाफी की मांग की गई।

इसके अलावा विद्युत संशोधन विधेयक 2025 वापस लेने, बिजली के निजीकरण पर रोक, मनरेगा में वर्ष में 200 दिन काम और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी, सार्वजनिक उपक्रमों, बैंकों व बीमा के निजीकरण पर रोक, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, सरकारी संस्थानों में रिक्त पदों पर भर्ती, स्वास्थ्य को अधिकार बनाने और स्वास्थ्य बजट बढ़ाने की मांग उठाई गई।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार मजदूरों और किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत से करने के बजाय दमन की नीति अपना रही है। किसानों से आंदोलन के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। देश में बेरोजगारी बढ़ रही है और सरकारी संस्थानों में लाखों पद रिक्त हैं, इसके बावजूद भर्ती नहीं की जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

सभा को हरदेवनारायण तिवारी, विशंभर सिंह, राजेंद्र सिंह, लालचंद, उत्तम कुमार मिश्रा, अवधराज सिंह, शमीम अख्तर खान, महेशचंद्र मिश्रा, दिलीप कुमार सिंह समेत अन्य नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मजदूर और किसान मौजूद रहे।










